रायपुर में साइबर ठगी : एक दिन में हुए 356 मोबाइल हैक
NEWS IN SHORT
रायपुर में एक ही दिन में 356 मोबाइल फोन हैक हुए।
शातिर ठगों ने तीन लोगों से 4.76 लाख रुपये लूटे।
शादी के निमंत्रण और ई-चालान के नाम पर आई एपीके फाइल।
फाइल खोलते ही मोबाइल का पूरा कंट्रोल साइबर ठगों के पास।
अंजान लिंक्स न खोलें और अननोन सोर्स सेटिंग्स बंद रखें।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से साइबर क्राइम का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां साइबर ठगों ने एक ही दिन में 356 लोगों के मोबाइल फोन को निशाना बनाया। ठगों ने लोगों को एपीके (APK) फाइल्स भेजकर उनके मोबाइल हैक किए और तीन लोगों के खातों से कुल 4 लाख 76 हजार रुपए गायब कर दिए। हालांकि, बाकी लोग समय रहते सावधान हो गए और पुलिस से संपर्क किया, जिससे वे ठगी का शिकार होने से बच गए।
निमंत्रण और ई-चालान के नाम पर धोखाधड़ी
मिली जानकारी के मुताबिक, ठग लोगों को फंसाने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। किसी को शादी का निमंत्रण पत्र तो किसी को सरकारी योजनाओं और ई-चालान के नाम पर व्हाट्सएप (WhatsApp), टेलीग्राम या एसएमएस पर लिंक और एपीके फाइल्स भेजी जा रही हैं। जैसे ही कोई यूजर इस फाइल को डाउनलोड या ओपन करता है, उसके फोन में एक मैलवेयर (वायरस) इंस्टॉल हो जाता है। इसके बाद मोबाइल का पूरा कंट्रोल ठगों के पास चला जाता है, जिससे वे लाइव मॉनिटर करके मैसेजेस, चैट्स, ओटीपी (OTP) समेत पूरा डेटा चुरा लेते हैं और बैंक खातों से पैसे निकाल लेते हैं।
पीड़ितों की जुबानी: कैसे हुए शिकार?
केस 1 : शिवानंद नगर के एक पीड़ित ने बताया कि उनके पास एक परिचित के नंबर से शादी का निमंत्रण आया था। उन्होंने उसे खोल लिया, जिसके दो दिन बाद खाते से 76 हजार रुपए निकलने का मैसेज आया। घबराकर उन्होंने तुरंत 1930 पर कॉल कर खाता ब्लॉक कराया। लेकिन तब तक उनके नंबर से कई लोगों को वही फर्जी मैसेज भेजे जा चुके थे।
केस 2 : मुकुट नगर निवासी एक महिला के मोबाइल पर ई-चालान का मैसेज आया, जिसमें एपीके फाइल थी। फाइल खोलते ही उनके दो अलग-अलग बैंक खातों से किस्तों में 3 लाख 67 हजार रुपए निकाल लिए गए।
केस 3: एक अन्य मामले में शादी का निमंत्रण खोलने पर एक व्यक्ति के खाते से 60 हजार रुपए और एक अन्य पीड़ित के खाते से करीब 59 हजार रुपए साफ हो गए।
बचाव के तरीके और साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह
साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए लोगों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है:
1. अपरिचित फाइल्स न खोलें : व्हाट्सएप, टेलीग्राम या एसएमएस पर आई ऐसी किसी भी फाइल को ओपन न करें जिसके अंत में apk लिखा हो।
2. केवल ऑफिशियल ऐप्स का उपयोग करें : किसी भी ऐप को डाउनलोड करने के लिए सिर्फ गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर का ही इस्तेमाल करें।
3. Unknown Sources बंद रखें : अपने मोबाइल की सेटिंग्स में जाकर Install Unknown Apps या Unknown Sources को हमेशा बंद रखें।
4. परमिशन पर ध्यान दें : ऐप इंस्टॉल करते समय एसएमएस (SMS), कॉन्टैक्ट और एक्सेसिबिलिटी जैसी परमिशन को ध्यान से देखें और बिना जरूरत के अलाउ न करें।
सभी मामलों में पीड़ितों द्वारा साइबर सेल और ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई गई है, और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
निष्कर्ष
रायपुर में हुई यह घटना दर्शाती है कि साइबर ठग अब शादी के कार्ड और ई-चालान जैसे रोजमर्रा के विषयों का सहारा लेकर लोगों को शिकार बना रहे हैं। डिजिटल युग में अनजाने लिंक्स और एपीके (APK) फाइल्स को बिना सोचे-समझे खोलना भारी वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है। अतः तकनीकी सतर्कता और जागरूकता ही इस बढ़ते खतरे से बचने का एकमात्र प्रभावी उपाय है।
FAQ
- APK का फुल फॉर्म क्या है और यह साइबर ठगी में कैसे काम करता है?
उत्तर: APK का फुल फॉर्म Android Package (एंड्रॉइड पैकेज) है। यह एंड्रॉइड ऐप्स की एक फाइल फॉर्मेट है। साइबर ठग इसमें वायरस (Malware) छुपाकर भेजते हैं। जैसे ही यूजर इसे इंस्टॉल करता है, फोन का पूरा कंट्रोल (ओटीपी, चैट्स, बैंक डिटेल्स) ठगों के पास चला जाता है। - भारत सरकार द्वारा जारी किया गया राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर क्या है?
राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 है। - मोबाइल में 'Unknown Sources' सेटिंग को बंद रखना क्यों जरूरी है?
उत्तर: यदि यह सेटिंग ऑन (चालू) रहती है, तो कोई भी अनधिकृत या वायरस वाली फाइल (जैसे .apk) बैकग्राउंड में अपने आप इंस्टॉल हो जाती है। इसे बंद रखने से बाहरी या असुरक्षित ऐप्स फोन में इंस्टॉल नहीं हो पाते।
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