नकटी बुलडोजर कार्रवाई : अमित जोगी बोले-पीड़ितों की मुफ्त कानूनी लड़ाई लड़ूंगा
समझें क्या है पूरा मामला
Raipur। छत्तीसगढ़ के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने बेदखल किए गए परिवारों से मुलाकात कर कानूनी सहायता देने की घोषणा की।
जोगी ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों को पर्याप्त समय नहीं दिया गया। वर्षों से यहां रह रहे मजदूरों, पशुपालकों और अन्य परिवारों के घर तोड़ दिए गए। उन्होंने इसे गरीब परिवारों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
करीब 300 परिवार प्रभावित होने का दावा
अमित जोगी के मुताबिक, कार्रवाई में घरों के साथ पशुओं के बाड़े और घरेलू सामान भी क्षतिग्रस्त हुआ है। उन्होंने दावा किया कि करीब 300 परिवार इस कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं। इनमें मजदूर, पशुपालक और छोटे कामगार शामिल हैं।
जोगी ने कहा कि कई परिवार लगभग 50 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे थे। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे इलाके को छावनी में बदलकर ग्रामीणों को हटाया गया।
सेक्टर-30 के फ्लैटों पर उठाए सवाल
जोगी ने प्रभावित परिवारों को नवा रायपुर के सेक्टर-30 स्थित बहुमंजिला इमारतों में बसाने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बड़े ग्रामीण परिवारों को चौथी मंजिल के एक बीएचके फ्लैट में रखना व्यावहारिक नहीं है।
उनके अनुसार, पशुपालन और दैनिक मजदूरी पर निर्भर परिवारों के लिए ऐसी जगह पर रहना कठिन होगा। उन्होंने कहा कि पुनर्वास योजना बनाते समय परिवारों की आजीविका, पशुओं और सामाजिक जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए।
जोगी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ग्रामीणों को केवल मकान नहीं, सम्मानजनक और आजीविका से जुड़ा पुनर्वास चाहिए। उन्होंने पुनर्वास व्यवस्था को जमीन आधारित और परिवारों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की मांग की।
48 घंटे के नोटिस का आरोप
अमित जोगी ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों को कार्रवाई से केवल 48 घंटे पहले नोटिस दिया गया। इस अवधि के दौरान लगातार चार दिन अवकाश होने से प्रभावित परिवार कानूनी सहायता नहीं ले सके।
उन्होंने कहा कि परिवारों को तहसीलदार के आदेश के खिलाफ अदालत जाने का उचित अवसर नहीं मिला। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को अचानक बेघर करने की जल्दबाजी की जांच होनी चाहिए।
जोगी ने तहसीलदार के आदेश और पूरी कार्रवाई की न्यायिक जांच कराने की मांग की। उन्होंने मानसून के दौरान बेदखली रोकने और प्रभावित परिवारों को उसी क्षेत्र के पास अस्थायी आवास देने की बात कही।
अदालत में मुफ्त पैरवी की घोषणा
अमित जोगी ने कहा कि वह इस मामले में केवल राजनीतिक दल के नेता के रूप में नहीं, बल्कि अधिवक्ता के रूप में भी प्रभावित परिवारों के साथ खड़े होंगे। उन्होंने सक्षम न्यायालय में ग्रामीणों की ओर से निशुल्क कानूनी लड़ाई लड़ने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि न्याय की उम्मीद खत्म नहीं हुई है। प्रभावित परिवारों को जमीन आधारित स्थायी पुनर्वास और उचित मुआवजा दिलाने के लिए कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।
महत्वपूर्ण तथ्य
नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई से करीब 300 परिवार प्रभावित होने का दावा।
अमित जोगी ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की।
उन्होंने मुफ्त कानूनी पैरवी करने की घोषणा की।
ग्रामीणों को केवल 48 घंटे पहले नोटिस देने का आरोप।
कई परिवार करीब 50 वर्षों से क्षेत्र में रह रहे थे।
सेक्टर-30 के एक बीएचके फ्लैट पुनर्वास प्रस्ताव पर सवाल।
जमीन आधारित पुनर्वास और उचित मुआवजे की मांग।
तहसीलदार के आदेश और कार्रवाई की न्यायिक जांच की मांग।
मानसून में बेदखली रोकने की मांग।
प्रशासन की विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई।
FAQ
- नकटी बुलडोजर कार्रवाई में कितने परिवार प्रभावित हुए?
अमित जोगी के अनुसार, कार्रवाई से करीब 300 परिवार प्रभावित हुए हैं। इनमें मजदूर, पशुपालक और छोटे कामगार शामिल हैं। - अमित जोगी ने प्रभावित परिवारों के लिए क्या घोषणा की?
अमित जोगी ने सक्षम न्यायालय में प्रभावित परिवारों की मुफ्त कानूनी पैरवी करने की घोषणा की है। - पुनर्वास योजना पर क्या आपत्ति जताई गई?
जोगी ने सेक्टर-30 के एक बीएचके फ्लैटों को अव्यावहारिक बताया। उन्होंने जमीन आधारित पुनर्वास और उचित मुआवजे की मांग की।
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