विधायक की मांग पर बिना सेफ्टी ऑडिट खुला एक्सप्रेस-वे कट, दुर्घटनाओं के बाद बैकफुट पर अफसर
राजधानी रायपुर में पंडरी इलाके के सामने एक्सप्रेस-वे पर खोले गए नए कट को लेकर बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। मामला तब सामने आया जब यह खुलासा हुआ कि बिना ट्रैफिक सर्वे, रोड सेफ्टी ऑडिट और तकनीकी परीक्षण के एक्सप्रेस-वे पर कट खोल दिया गया। अब दुर्घटना और ट्रैफिक अव्यवस्था बढ़ने के बाद अधिकारी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा ने प्रशासन को पत्र लिखकर मांग की थी कि पंडरी क्षेत्र में लगातार लगने वाले जाम को देखते हुए एक्सप्रेस-वे पर कट खोला जाए। विधायक का तर्क था कि इससे स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी और ट्रैफिक दबाव कम होगा।
इसके बाद नगर निगम और यातायात विभाग के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और एक्सप्रेस-वे पर नया कट खोल दिया गया। लेकिन नियमों के अनुसार किसी भी एक्सप्रेस-वे या हाई-स्पीड कॉरिडोर पर नया कट खोलने से पहले:
ट्रैफिक सर्वे
रोड सेफ्टी ऑडिट
तकनीकी मूल्यांकन
दुर्घटना संभाव्यता अध्ययन
करना अनिवार्य माना जाता है। आरोप है कि इनमें से कोई प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
अधिकारियों पर सवाल
पूर्व निगम कमिश्नर और ट्रैफिक अधिकारियों के बयान अब सवालों के घेरे में हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय “वरिष्ठ स्तर” पर लिया गया था और स्थानीय ट्रैफिक दबाव को देखते हुए अनुमति दी गई।
एक अधिकारी के अनुसार: 'विधायक की ओर से लगातार मांग आ रही थी, इसलिए अस्थायी राहत के तौर पर कट खोला गया।'
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सप्रेस-वे जैसे तेज रफ्तार मार्गों पर अनियोजित कट सीधे दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।
क्या बोले जिम्मेदार
तकनीकी विशेषज्ञों की आपत्ति
ट्रैफिक इंजीनियरों का कहना है कि एक्सप्रेस-वे का डिजाइन सीमित एंट्री और एग्जिट व्यवस्था पर आधारित होता है। बीच में नया कट खोलने से:
- अचानक वाहन मोड़ने की स्थिति बनती है
- तेज रफ्तार ट्रैफिक बाधित होता है
- दुर्घटना की संभावना बढ़ती है
- जाम और अव्यवस्था पैदा होती है
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि यदि स्थानीय ट्रैफिक दबाव था तो वैकल्पिक सर्विस रोड या यू-टर्न विकसित किया जाना चाहिए था।
अब बंद करने की तैयारी
विवाद बढ़ने और सुरक्षा सवाल उठने के बाद प्रशासन अब इस कट को बंद करने पर विचार कर रहा है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों के बीच भी इस मुद्दे पर मतभेद हैं। कुछ लोग इसे राहत बताते हैं, जबकि कई नागरिकों का कहना है कि इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है।
जनता के बीच बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या केवल एक पत्र के आधार पर शहर की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के नियम बदले जा सकते हैं? और यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
मामले ने अब राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है और विपक्ष प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों दोनों की भूमिका पर सवाल उठा रहा है।
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