छत्तीसगढ़ में शिक्षा सत्र शुरू पर किताबें गायब, पुरानी बुक्स से चल रही क्लास
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में 16 जून से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। इसके बाद भी रायपुर के स्कूलों में किताबें नहीं पहुंच पाई हैं। बच्चे क्लास में सिर्फ नई प्रार्थना याद कर रहे हैं। कुछ जगहों पर पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कराई जा रही है। किताबों की स्कैनिंग में दिक्कत से वितरण का काम ठप है।
राजधानी में ही व्यवस्था बेपटरी
छत्तीसगढ़ की रायपुर के सरकारी स्कूलों का हाल बेहाल है। नया सत्र शुरू हुए कई दिन बीत चुके हैं। इसके बाद भी अधिकांश बच्चे किताबों का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षा विभाग के समय पर पढ़ाई शुरू करने के दावे फेल हो गए हैं।
शिक्षकों के पास अभी बच्चों को पढ़ाने के लिए नई किताबें नहीं हैं। वे बच्चों को क्लास में नई प्रार्थना याद करवा रहे हैं। कुछ स्कूलों में जैसे-तैसे पुरानी किताबों से काम चलाया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि अब जुलाई से ही ठीक से पढ़ाई शुरू हो पाएगी।
विकासखंडों में किताबों की स्थिति
रायपुर जिले के चार विकासखंडों में किताबों की सप्लाई अधूरी है। धरसींवा, तिल्दा और आरंग में सिर्फ हाई स्कूल की किताबें मिली हैं। वहीं अभनपुर के केवल 12 हाई स्कूलों तक ही किताबें पहुंच पाई हैं। प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं की स्थिति इससे भी ज्यादा खराब है। पहली से आठवीं तक की किताबें सिर्फ धरसींवा ब्लॉक में पहुंची हैं। बाकी तीन विकासखंडों में छोटे बच्चे अभी भी किताबों की राह देख रहे हैं।
स्कैनिंग की समस्या ने बढ़ाई मुश्किल
जिन स्कूलों में कुछ किताबें पहुंच भी गई हैं, वहां नई मुसीबत खड़ी हो गई है। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम की किताबों की स्कैनिंग नहीं हो पा रही है। तकनीकी खराबी के कारण बार-कोड स्कैन करने में दिक्कत आ रही है। स्कैनिंग पूरी न होने के कारण शिक्षक बच्चों को किताबें नहीं बांट पा रहे हैं। इस वजह से किताबें डिपो से स्कूल आने के बाद भी बक्सों में बंद पड़ी हैं।
गणवेश वितरण का काम भी अधूरा
किताबों के साथ-साथ बच्चों के यूनिफॉर्म यानी गणवेश का संकट भी बना हुआ है। धरसींवा विकासखंड में ही अभी गणवेश की खेप पहुंच पाई है। आरंग विकासखंड में बहुत कम संख्या में गणवेश पहुंचे हैं। तिल्दा और अभनपुर विकासखंड के स्कूलों में तो अभी तक गणवेश पहुंचा ही नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की संख्या की जांच के बाद ही यूनिफॉर्म बांटी जाएगी।
प्राइवेट स्कूलों को करना होगा इंतजार
निजी स्कूलों के लिए भी किताबें मिलने की तारीख तय कर दी गई है। रायपुर के मान्यता प्राप्त गैर-अनुदान प्राप्त प्राइवेट स्कूलों को 25 जून से किताबें मिलेंगी। भनपुरी डिपो से 12 जुलाई तक इसका वितरण किया जाएगा। तिल्दा के स्कूलों को 25 जून और अभनपुर के स्कूलों को 27 जून को किताबें मिलेंगी। आरंग के स्कूलों को 28 जून और धरसींवा के स्कूलों को 1 जुलाई से 12 जुलाई के बीच किताबें दी जाएंगी।
अब कब शुरू होगी पढ़ाई
मौजूदा हालात को देखते हुए तस्वीर साफ है। राजधानी के सभी स्कूलों तक किताबें पहुंचने में समय लगेगा। प्राइवेट स्कूलों का वितरण भी 25 जून के बाद ही शुरू होगा। ऐसे में जानकार मान रहे हैं कि नियमित पढ़ाई जुलाई से ही रफ्तार पकड़ेगी। तब तक बच्चे पुरानी किताबों और प्रार्थना के सहारे ही रहेंगे। बच्चों और शिक्षकों की नजरें अब किताबों के पहुंचने पर टिकी हैं।
FAQ
- रायपुर में नया शिक्षा सत्र कब शुरू हुआ?
छत्तीसगढ़ में नया शिक्षा सत्र 16 जून से शुरू हुआ है। लेकिन रायपुर के ज्यादातर स्कूलों में अब तक किताबें नहीं पहुंचीं। - छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों के लिए किताबों का प्रकाशन और वितरण कौन सा विभाग करता है?
उत्तर: राज्य में कक्षा 1 से 12वीं तक की किताबों के प्रकाशन और वितरण की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम (CGTBC) की है, जिसका मुख्य डिपो रायपुर के भनपुरी में स्थित है। - रायपुर जिले में स्कूली शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को किन चार प्रमुख विकासखंडों (ब्लॉक्स) में बांटा गया है?
उत्तर: रायपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए चार विकासखंड तय किए गए हैं, जिनके नाम धरसींवा, तिल्दा, आरंग और अभनपुर हैं।
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