26 करोड़ फूंककर भी बंद पड़ी हैं महिला योजनाएं, न काम मिला न रहने का ठिकाना
NEWS IN SHORT
- 26 करोड़ के महिला प्रोजेक्ट अधर में
- मोवा गारमेंट फैक्ट्री अब तक बंद
- 11 करोड़ का वुमन हॉस्टल खाली पड़ा
- संचालन मॉडल फेल होने से प्रोजेक्ट अटके
- अब नए प्लान पर फिर से उम्मीदें
NEWS IN DETAIL
Raipur। शहर में महिलाओं के रोजगार और रहने की सुविधा के नाम पर करीब 26 करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन दोनों बड़े प्रोजेक्ट आज तक पूरी तरह शुरू नहीं हो पाए हैं। मोवा में बनी गारमेंट फैक्ट्री और पंडरी में बना वर्किंग वुमन हॉस्टल दोनों लंबे समय से बंद पड़े हैं। अब नगर निगम फिर से नए प्रोजेक्ट की तैयारी कर रहा है, लेकिन पुराने हालात को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मोवा गारमेंट फैक्ट्री दो साल बाद भी शुरू नहीं
मोवा इलाके में नगर निगम ने महिलाओं को रोजगार देने के लिए गारमेंट फैक्ट्री बनाई थी। इस प्रोजेक्ट पर करीब 15 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। योजना थी कि यहां बड़ी संख्या में महिलाओं को सिलाई और गारमेंट उत्पादन का काम दिया जाएगा।
भवन और शेड तैयार कर दिए गए थे और मशीनों के जरिए उत्पादन शुरू होना था, लेकिन आज तक फैक्ट्री चालू नहीं हो पाई है। पूरा ढांचा तैयार होने के बाद भी संचालन शुरू नहीं हो सका।
पीपीपी मॉडल पर अटका प्रोजेक्ट
नगर निगम ने इस गारमेंट फैक्ट्री को पीपीपी मॉडल पर चलाने की योजना बनाई थी। इसके लिए निजी एजेंसी से संचालन की उम्मीद थी, लेकिन कोई संस्था आगे नहीं आई। इसी वजह से फैक्ट्री तैयार होने के बावजूद बंद पड़ी रही। मशीनें और आधारभूत ढांचा होने के बाद भी यहां कोई काम शुरू नहीं हो सका।
11 करोड़ का वर्किंग वुमन हॉस्टल खाली पड़ा
पंडरी इलाके में महिलाओं के लिए 11 करोड़ रुपए की लागत से वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाया गया था। यह चार मंजिला भवन है जिसमें 124 फ्लैट तैयार किए गए थे। इसका उद्देश्य कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और सस्ता आवास उपलब्ध कराना था।
साल 2019 में यह भवन बनकर तैयार हो गया था, लेकिन यहां महिलाएं रहने नहीं आईं। शहर से दूरी, सुरक्षा को लेकर चिंता और सुविधाओं की कमी को इसकी बड़ी वजह माना गया।
कोविड काल में हुआ उपयोग, बाद में फिर खाली
कोरोना काल में इस हॉस्टल को अस्थायी रूप से कोविड सेंटर और आइसोलेशन सुविधा के रूप में इस्तेमाल किया गया था। महामारी खत्म होने के बाद इसे फिर खाली कर दिया गया। इसके बाद भवन का कोई स्थायी उपयोग नहीं हो सका। बाद में इसे योग आयोग कार्यालय को किराए पर दे दिया गया, जिससे इसका मूल उद्देश्य पूरी तरह खत्म हो गया।
अब नए प्रोजेक्ट की तैयारी
पुराने प्रोजेक्ट बंद होने के बावजूद नगर निगम महिलाओं के लिए नए निर्माण की योजना बना रहा है। इसके तहत महिला शांति गृह बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को मानसिक, शारीरिक और सामाजिक सहयोग देना बताया जा रहा है।
इसके अलावा पंडरी और नौतालाब क्षेत्र में नए वर्किंग वुमन हॉस्टल भी तैयार किए जा रहे हैं। नौतालाब वाला हॉस्टल लगभग पूरा हो चुका है और फिनिशिंग का काम चल रहा है।
महिला समूहों को संचालन देने की योजना
नगर निगम का कहना है कि आगे चलकर गारमेंट फैक्ट्री और अन्य प्रोजेक्ट महिला स्वयं सहायता समूह के जरिए चलाए जाएंगे। इसके लिए योजना तैयार करने और संचालन मॉडल सुधारने की बात कही जा रही है। अधिकारी मानते हैं कि पहले संचालन एजेंसी न मिलने और उपयोगकर्ताओं की कमी के कारण प्रोजेक्ट सफल नहीं हो पाए।
पुराने प्रोजेक्ट पर उठते सवाल
लगभग 26 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद दोनों बड़े प्रोजेक्ट बंद पड़े हैं। एक तरफ फैक्ट्री शुरू नहीं हो सकी और दूसरी तरफ हॉस्टल खाली रह गया। अब नए प्रोजेक्ट की घोषणा के बीच यह सवाल बना हुआ है कि क्या इस बार योजनाएं जमीन पर सफल हो पाएंगी या फिर स्थिति वही दोहराई जाएगी।
FAQ
- मोवा गारमेंट फैक्ट्री क्यों शुरू नहीं हो पाई?
यह प्रोजेक्ट पीपीपी मॉडल पर था लेकिन कोई एजेंसी आगे नहीं आई, इसलिए संचालन शुरू नहीं हो सका और फैक्ट्री तैयार रहने के बावजूद बंद पड़ी है। - वर्किंग वुमन हॉस्टल उपयोग में क्यों नहीं आया?
यह हॉस्टल शहर से काफी दूर बना था और सुरक्षा व सुविधाओं को लेकर महिलाओं की रुचि नहीं बनी, इसलिए यह लंबे समय तक खाली रहा और बाद में अन्य उपयोग में दे दिया गया। - अब नगर निगम की क्या योजना है?
नगर निगम महिलाओं के लिए नए हॉस्टल और महिला शांति गृह जैसे प्रोजेक्ट ला रहा है और साथ ही पुराने मॉडल को सुधारकर महिला समूहों के जरिए संचालन की योजना पर काम कर रहा है।
यह खबरें भी पढ़े..
छतीसगढ़ में योजनाएं ठप ; भारी-भरकम बजट के बाद भी विकास की रफ्तार सुस्त, फंड लैप्स
रायपुर के पोरवाल ऑयल फैक्ट्री में भीषण आग, कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका
महिला एवं बाल विकास विभाग में बड़ा फेरबदल : 12 अधिकारियों के तबादले