पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिग से दरिंदगी पर 5 दोषियों को उम्रकैद
समझें क्या है पूरा मामला
- नाबालिग शोषण केस में पांच दोषियों को उम्रकैद
- राजनांदगांव POCSO कोर्ट का बड़ा फैसला
- बहला-फुसलाकर ले जाने वाले पांच दोषियों को सजा
- देह व्यापार में धकेलने के मामले में कड़ी कार्रवाई
- POCSO कोर्ट ने सुनाई पांच आरोपियों को उम्रकैद
राजनांदगांव की विशेष POCSO अदालत (पॉक्सो कोर्ट) ने नाबालिग के साथ यौन शोषण और उसे देह व्यापार में धकेलने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पांच दोषियों को अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास की सजा दी है। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधों में दोषियों के प्रति नरमी नहीं बरती जा सकती।
एक अन्य आरोपी को पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर अदालत ने बरी कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटना से जुड़े कई सबूत पेश किए। इन्हीं के आधार पर कोर्ट ने पांच आरोपियों को दोषी माना।
2024 में सामने आया था मामला
मामला फरवरी 2024 का है। नाबालिग के पिता ने छुरिया थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनकी बेटी घर से बाहर गई थी और वापस नहीं लौटी।
पुलिस जांच में पता चला कि नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाया गया था। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने उसे रायगढ़ से बरामद किया था। उस समय वह साधना वैष्णव के संपर्क में थी।
बस में हुई थी आरोपी महिला से मुलाकात
जांच में सामने आया कि नाबालिग बैंक में आधार लिंक कराने के लिए घर से निकली थी। इसके बाद वह बस से राजनांदगांव होते हुए रायपुर जा रही थी।
यात्रा के दौरान उसकी मुलाकात साधना वैष्णव से हुई। आरोप है कि साधना ने उसे अपने साथ चलने के लिए कहा। इसके बाद वह उसे रायपुर ले गई, जहां मुस्कान गोस्वामी भी रहती थी।
पैसे कमाने का दबाव बनाने का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार नाबालिग को कई दिनों तक रायपुर में रखा गया। उसने घर जाने की इच्छा जताई, लेकिन उसे वापस नहीं भेजा गया।
आरोप है कि बाद में पैसे कमाने का दबाव बनाया गया। इसके बाद अलग-अलग लोगों के जरिए उसका शोषण कराया गया। जांच में यह भी सामने आया कि उसे रायगढ़ के बाजीनपाली क्षेत्र में ले जाया गया था।
तीन आरोपियों को भी मिली सजा
कोर्ट ने साधना वैष्णव और मुस्कान गोस्वामी को गंभीर धाराओं में दोषी माना। दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
इसके अलावा चेतन नवरंगे, तोरण सोनकर और धनंजय धृतलहरे को भी सामूहिक दुष्कर्म और POCSO एक्ट की धाराओं में कठोर सजा दी गई।
एक आरोपी को मिला संदेह का लाभ
मामले में एक अन्य आरोपी गोपीराम कोल को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उसके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। अदालत ने पीड़िता के साथ हुए अपराध को गंभीर मानते हुए दोषियों को कड़ी सजा देने का फैसला सुनाया।
FAQ
- राजनांदगांव POCSO कोर्ट ने किस मामले में फैसला सुनाया?
राजनांदगांव POCSO कोर्ट ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने, यौन शोषण और देह व्यापार में धकेलने के मामले में फैसला सुनाया। - कोर्ट ने कितने दोषियों को सजा दी है?
कोर्ट ने इस मामले में पांच दोषियों को अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। - क्या सभी आरोपियों को दोषी ठहराया गया था?
नहीं, एक आरोपी को पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
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