Pocso Act: मासूम की पहचान उजागर करने पर पॉक्सो के तहत दैनिक भास्कर के एमडी सुधीर अग्रवाल पर एफआईआर
The Sootr | May 31, 2026, 14:49 IST
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दैनिक भास्कर के एमडी सुधीर अग्रवाल और रिपोर्टर पर Pocso Act में केस दर्ज हुआ है। उन पर 5 साल की मासूम की पहचान बताने का आरोप है। जानिए राजस्थान से भोपाल तक के तार उजागर करती स्टोरी में सबकुछ…
समझें क्या है पूरा मामला...
- दैनिक भास्कर के एमडी सुधीर अग्रवाल और रिपोर्टर पर केस दर्ज हुआ है।
- इन पर 5 साल की मासूम पॉक्सो पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप है।
- जो खबर छापी गई उसमें पीड़ित बच्ची के घर का पता, स्कूल और पिता का पेशा छापा गया।
- पुलिस ने बीएनएस, पॉक्सो और जेजे एक्ट की धाराओं में कार्रवाई की है।
- यह मामला भोपाल के एमपी नगर थाने में शनिवार 30 मई को दर्ज किया गया है।
क्यों दर्ज हुई सुधीर अग्रवाल पर एफआईआर?
ऐसे मामलों में कानून बहुत सख्त होता है। कानून के मुताबिक पीड़ित की पहचान गुप्त रखनी पड़ती है। वहीं दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में गलती कर दी। उन्होंने ऐसी जानकारी छापी जिससे बच्ची की पहचान हो गई।
बता दें कि दिनांक 07 मई 2026 को एक खबर प्रकाशित हुई थी। यह खबर दैनिक भास्कर के भोपाल एडिशन में छपी थी। खबर का शीर्षक बहुत ही संवेदनशील था।
इसमें लिखा था दोस्तों संग खेलने पड़ोस के घर गई थी 5 साल की मासूम...। आरोप है कि यह खबर बहुत लापरवाही से लिखी गई थी।
इसे पढ़ने से कोई भी पीड़ित बच्ची तक पहुंच सकता था। बता दें कि किसी पीड़िता की पहचान उजागर करना साफतौर पर पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन माना जाता है।
जयपुर की महिला वकील ने उठाई आवाज
इसके बाद केस को भोपाल भेज दिया गया। अब भोपाल के एमपी नगर थाने में मामला दर्ज है। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कर रही है।
पीड़िता की कौन सी जानकारी सार्वजनिक की?
खबर में लिखा गया कि बच्ची किस इलाके में रहती है। इतना ही नहीं, पड़ोस में रहने वाले एक वकील का नाम भी छाप दिया।
इससे बच्ची के घर की पहचान करना आसान हो गया। खबर में पीड़िता के पिता के बारे में भी लिखा गया था। उसमें बताया गया कि पिता कहां काम करते हैं।
यह जानकारी देना भी कानूनन गलत माना जाता है। इतना ही नहीं बच्ची किस स्कूल में पढ़ती है यह भी बता दिया गया।
शिकायतकर्ता एडवोकेट रितिका पारीक का कहना है कि यह सब जानबूझकर किया गया। इसे एक सोची-समझी साजिश बताया गया है। अखबार ने अपनी ऐप पर भी इस खबर को शेयर किया। ऐप पर खबर का लिंक आज भी मौजूद है।
पहले टरकाती रही जयपुर पुलिस
इसके बाद उन्होंने DCP, Commissioner और DGP तक इसकी शिकायत की तब जाकर जीरो पर FIR करके भोपाल को हबीबगंज थाना को भेज दी गई। यहां से FIR को एमपी नगर थाना भेजा गया। रितिका का कहना है कि वे बच्चों के साथ होने वाले इस तरह के अन्याय के खिलाफ आगे भी आवाज उठाता रहेंगी।
कहीं इसलिए तो नहीं नप गए आईपीएस मनीष भारद्वाज
IPS Manish Bhardwaj
dainik bhaskar md sudhir agarwal fir pocso case
सख्त हैं पॉक्सो और जेजे एक्ट के कानून
इसके अलावा पॉक्सो एक्ट की धारा 23(2) भी लगाई गई है। पॉक्सो एक्ट बच्चों की सुरक्षा के लिए बना है। इसकी धारा 23 मीडिया के लिए नियम तय करती है।
नियम के अनुसार मीडिया पीड़ित की फोटो नहीं छाप सकता है। वह पीड़ित के परिवार या स्कूल का विवरण नहीं दे सकता है। दैनिक भास्कर ने इन सभी नियमों का उल्लंघन किया है।
पुलिस ने जेजे एक्ट की धारा 74 का भी प्रयोग किया है। यह कानून बच्चों की देखरेख और संरक्षण के लिए है। यह किसी भी रिपोर्ट में बच्चे की पहचान बताने से रोकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट के अनुसार पीड़ित की गोपनीयता सर्वोपरि है। किसी भी स्थिति में इसे भंग नहीं किया जा सकता है।
एफआईआर में सुधीर अग्रवाल (Sudhir Agarwal of Dainik Bhaskar) का नाम शामिल है। वह दैनिक भास्कर समूह के प्रबंध निदेशक हैं। उनके साथ अखबार के रिपोर्टर को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच करेगी।
POCSO Act क्या होता है?
एक्ट की मुख्य विशेषताएं
लिंग-तटस्थ: यह कानून लड़के और लड़की दोनों पर समान रूप से लागू होता है।
सहमति का कोई कानूनी आधार नहीं: 18 साल से कम उम्र के बच्चे की किसी यौन गतिविधि में सहमति मान्य नहीं होती। किसी रिश्ते या हां में भी अपराध माना जाएगा।
गोपनीयता और संवेदनशीलता: बच्चे की पहचान उजागर करना अपराध है। पुलिस अधिकारी सादे कपड़े पहनकर बयान दर्ज करते हैं। सुनवाई बंद कमरे (In-camera) में होती है।
अपराध और सजा: यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़: दोषी पाए जाने पर 2 से 10 साल की जेल और जुर्माना।
गंभीर यौन हमला: २० साल तक की जेल या आजीवन कारावास। 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म में मृत्युदंड तक का प्रावधान।
जांच प्रक्रिया और न्याय
- POCSO मामलों में तत्काल गिरफ्तारी होती है।
- जमानत मिलने की संभावना बहुत कम है।
- अपराध सिद्ध करने का भार अधिकांशतः आरोपी पर होता है।
ips manish bharadwaj
FAQ
- सुधीर अग्रवाल पर कौन सी धाराएं लगी हैं?
सुधीर अग्रवाल पर बीएनएस की धारा 72 लगाई गई है। साथ ही पोक्सो एक्ट की धारा 23 और जेजे एक्ट की धारा 74 लगी है। ये धाराएं पीड़िता की पहचान उजागर करने से संबंधित हैं। - सुधीर अग्रवाल पर एफआईआर किसने और कहां दर्ज कराई?
यह एफआईआर रितिका पारीक ने दर्ज कराई है। पहले शिकायत जयपुर के बजाज नगर थाने में हुई थी। बाद में इसे भोपाल के एमपी नगर थाने ट्रांसफर किया गया। - कानून के अनुसार खबर में पीड़िता की पहचान बताना अपराध क्यों है?
सुप्रीम कोर्ट और पोक्सो कानून इसकी मनाही करते हैं। पहचान उजागर होने से पीड़िता की सुरक्षा को खतरा होता है। इससे मासूम को समाज में मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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