पहली बारिश में दरका 26 करोड़ का पुल, रमन बोले दोषियों पर हो सख्त एक्शन

VINAY VERMA | Jul 09, 2026, 21:01 IST
रमन सिंह भड़के रेल मंत्री को लिखा पत्र
राजनांदगांव में 26 करोड़ रुपए की लागत से बना रेल ओवरब्रिज पहली बारिश में ही दरक गया। पुल में 60 से 70 फीट लंबी दरारें मिलने के बाद डॉ. रमन सिंह ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से हाई लेवल जांच, सेफ्टी ऑडिट और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

समझें क्या है पूरा मामला

Rajnandgaon। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च कर बनाया गया रेल ओवरब्रिज पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गया है। राजनांदगांव जिले में करीब 26 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह रेल ओवरब्रिज जून 2026 में जनता को समर्पित किया गया था। लेकिन, महज एक महीने के भीतर इसमें खतरनाक दरारें पड़ गईं। मामला सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।



पहली बारिश...और पुल में लंबी दरार

जानकारी के मुताबिक दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर जोन के नागपुर मंडल अंतर्गत डोंगरगढ़-राजनांदगांव रेलखंड पर ग्राम बरगा, आलीवारा और मुसरा के पास यह रेल ओवरब्रिज बनाया गया है। जून में लोकार्पण के बाद 4 और 5 जुलाई को हुई बारिश के दौरान पुल में 60 से 70 फीट लंबी और 15 से 20 सेंटीमीटर चौड़ी दरारें दिखाई देने लगीं। इससे निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।



26 करोड़ खर्च...लेकिन सुरक्षा पर सवाल

जिस पुल को वर्षों तक लोगों की सुविधा और सुरक्षित आवागमन के लिए बनाया गया था, वह पहली ही बारिश में दरक गया। स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी जांच और मरम्मत नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।



डॉ. रमन सिंह ने दिखाई सख्ती

मामले को गंभीर मानते हुए डॉ. रमन सिंह ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को अर्धशासकीय (DO) पत्र भेजा है। उन्होंने लिखा कि लोकार्पण के कुछ ही दिनों बाद पुल का क्षतिग्रस्त होना निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही और तकनीकी मानकों की अनदेखी का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि इस घटना से क्षेत्र के लोगों और जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है।



ठेकेदार से अफसर तक कार्रवाई की मांग

डॉ. रमन सिंह ने रेल मंत्री से पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि केवल जांच ही नहीं, बल्कि निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, तकनीकी सलाहकार और यदि किसी रेल अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कठोर और उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कार्रवाई की जाए।



सेफ्टी ऑडिट कराने पर जोर

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में पुल का तत्काल सेफ्टी ऑडिट कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि जब तक विशेषज्ञ इसकी तकनीकी जांच नहीं कर लेते, तब तक लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक मरम्मत या जरूरत पड़ने पर पुनर्निर्माण भी कराया जाए।



26 करोड़ का पुल पहली बारिश में ढेर


अब रेल मंत्रालय की परीक्षा

यह मामला केवल एक पुल में आई दरार का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपए के सार्वजनिक धन और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से जुड़ा है। ऐसे समय में जब केंद्र और राज्य सरकारें आधुनिक बुनियादी ढांचे के दावे कर रही हैं, तब लोकार्पण के एक महीने के भीतर पुल का दरक जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। अब निगाहें मंत्रालरेलय पर हैं कि वह इस मामले में कितनी तेजी से जांच कराता है और आखिर इस 26 करोड़ की परियोजना में हुई कथित लापरवाही की जिम्मेदारी किस पर तय होती है।



महत्वपूर्ण तथ्य

स्थान: राजनांदगांव जिला, छत्तीसगढ़


परियोजना: रेल ओवरब्रिज (ROB)


लागत: करीब 26 करोड़ रुपए


योजना: प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना


निर्माण क्षेत्र: SECR के बिलासपुर जोन के नागपुर मंडल अंतर्गत डोंगरगढ़-राजनांदगांव रेलखंड


लोकार्पण: जून 2026


समस्या सामने आई: 4 और 5 जुलाई 2026 की बारिश के बाद


दरार की लंबाई: करीब 60 से 70 फीट


दरार की चौड़ाई: करीब 15 से 20 सेंटीमीटर


आपत्ति जताने वाले: छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह


मांग: हाई लेवल तकनीकी जांच, सेफ्टी ऑडिट और दोषियों पर कार्रवाई


जांच के दायरे में: निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, तकनीकी सलाहकार और संबंधित अधिकारी


मुख्य सवाल: करोड़ों की लागत से बने पुल में एक महीने के भीतर दरार कैसे आई?



FAQ

  1. राजनांदगांव रेल ओवरब्रिज में दरार कब सामने आई?
    राजनांदगांव के रेल ओवरब्रिज में 4 और 5 जुलाई 2026 को हुई बारिश के बाद दरारें दिखाई दीं।
  2. पुल निर्माण में कितनी राशि खर्च हुई थी?
    इस रेल ओवरब्रिज के निर्माण में करीब 26 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
  3. डॉ. रमन सिंह ने मामले में क्या मांग की है?
    डॉ. रमन सिंह ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर हाई लेवल तकनीकी जांच, सेफ्टी ऑडिट और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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