छत्तीसगढ़ की राजनीति में धर्म का तड़का, संतों की शरण में बीजेपी सरकार,चुनाव से पहले राम का काम

Arun Tiwari | Oct 12, 2026, 16:28 IST
छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ का विकास
Raipur. छत्तीसगढ़ की सियासत में अब धर्म का तड़का लगना शुरु हो गया है। जैसे जैसे चुनाव करीब आते जा रहे हैं वैसे वैसे हिंदुत्व की बयार बहने लगी है। बीजेपी के लिए वैसे भी राम,हिंदुत्व,गाय जैसे मुद्दे कोर विषय हैं। बात मठ मंदिरों के जीर्णोद्धार की हो या फिर राम वन गमन पथ की। एक बार फिर इन सब पर काम शुरु हो गया है।

अगले कुछ महीनों में सरकार धर्म के नाम पर 100 करोड़ से ज्यादा का फंड खर्च करने जा रही है। 50 करोड़ से ज्यादा राम वन गमन पथ पर खर्च होंगे तो इतने ही मंदिरों के जीर्णोद्धार पर। रामलला दर्शन और बुजुर्गों की तीर्थ यात्रा अलग से है। चुनाव से पहले सरकर संतों की शरण में भी जा रही है। राम वन गमन पथ में जो प्रमुख स्थान होंगे वहां पर संतों के लिए कुटिया भी बनाई जाएगी।



प्रमुख धार्मिक योजनाओं के लिए कितना पैसा रखा गया

  • श्री रामलला दर्शन योजना - 36 करोड़
  • छत्तीसगढ़ आस्था पथ - 5 करोड़
  • धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग की कुल राशि- 50 करोड़
  • पर्यटन क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए अनुदान- 100 करोड़
  • सिरपुर विकास योजना -10 करोड़
  • मुख्यमंत्री जन-पर्यटन प्रोत्साहन योजना - 3 करोड़

राम वन गमन पथ पर शुरु होगा काम

छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम से जुड़े धार्मिक स्थलों को विकसित करने की योजना पर राज्य सरकार नए सिरे से काम शुरू करने जा रही है। राम वनगमन पथ परियोजना के तहत प्रदेश के 31 स्थलों को विकसित किया जाएगा। यहां मंदिरों के विकास के साथ श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आश्रय स्थल, धार्मिक आयोजनों के लिए सत्संग भवन और भोजन की व्यवस्था के लिए सीता रसोई बनाई जाएगी। योजना के पहले चरण में 10 स्थलों का सर्वे पूरा हो चुका है।



इसके लिए 62 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट रखा गया है। सरकार की योजना राम वनगमन पथ को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की है। इसके जरिए भगवान श्रीराम से जुड़ी मान्यताओं और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने के साथ स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी। सरकार का जोर ऐसे स्थलों पर सुविधाएं विकसित करने पर है, जहां श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ ठहरने और भोजन की व्यवस्था भी मिल सके।



तीन चरणों में पूरा होगा विकास कार्य

राम वनगमन पथ परियोजना के तहत 31 स्थलों को तीन चरणों में विकसित करने की योजना बनाई गई है। पहले चरण में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 10 स्थलों पर काम होगा। दूसरे चरण के लिए 2027-28 में 11 स्थल प्रस्तावित हैं, जबकि तीसरे चरण में 2028-29 के दौरान 10 अन्य स्थलों को विकसित किया जाएगा।



पहले चरण में कोरिया जिले का घुटरी मंदिर, धमतरी का श्रृंगी ऋषि-सप्तऋषि आश्रम, सुकमा जिले का रामाराम स्थित चिंतामणि मंदिर, सरगुजा का देवगढ़ स्थित महेश्वर मंदिर, उदयपुर की सीता बेंगरा, रायगढ़ का रामझरना, रामपुर-जुनवानी का विष्णु मंदिर, बस्तर के चित्रकोट स्थित शिव मंदिर और मवई की सीतामढ़ी-हरचौका को शामिल किया गया है।



दूसरे चरण में इन स्थलों पर होगा काम

वर्ष 2027-28 में दूसरे चरण के तहत मड़गांव-लखनपुर पायन, सीतामढ़ी-छतौड़गढ़, सीतामढ़ी-रायपा, सीतामढ़ी-कनवाई, सीता लेखनी, सीताबेंगरा के आसपास के धार्मिक क्षेत्र, पेंशर घाट, गढ़िया मंदिर, छोटे डोंगर स्थित शिव मंदिर, रामगढ़ और कोटुमसर-कुटुमसर क्षेत्र के धार्मिक स्थलों को विकसित करने की योजना है। इन जगहों पर भी श्रद्धालुओं की जरूरत के अनुसार बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।



सरकार का प्रयास है कि धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले लोगों को बेहतर वातावरण मिले और इन क्षेत्रों को पर्यटन के नक्शे पर पहचान दिलाई जा सके। वित्तीय वर्ष 2028-29 में तीसरे चरण के तहत डोंगर, शिव मंदिर, किश्किंधा क्षेत्र, लोमश ऋषि आश्रम, मंदिर परिसर, तीरथगढ़, मंडवा आश्रम, शिवरीनारायण, वाल्मीकि आश्रम, बागेश्वर शिव मंदिर, खरसिया क्षेत्र और सिरपुर जैसे स्थलों को योजना में शामिल किया गया है। इन स्थलों के विकास से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को विस्तार देने की उम्मीद है।



पुराने विकास कार्यों की कमियों को दूर करने की कोशिश

राम वनगमन पथ परियोजना पहले भी चर्चा में रही है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2019-20 में इसके विकास की घोषणा की गई थी। उस दौरान 75 स्थलों की सूची तैयार की गई थी, लेकिन विकास कार्य सीमित संख्या में स्थलों तक ही पहुंच पाए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पहले विकसित किए गए कुछ स्थानों पर अब आगे के निर्माण और सुविधाओं के विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही है।



रामगढ़ में पहले बनाए गए कुछ ढांचों और सुविधाओं में सुधार की योजना है। इसी तरह सीतामढ़ी-हरचौका में मंदिर परिसर, आश्रम, कैफेटेरिया, दीप स्तंभ और घाट जैसी सुविधाओं का विकास किया गया था। अब यहां घाट के शेष हिस्से का निर्माण और अन्य सुविधाओं का विस्तार प्रस्तावित है।



स्थानीय लोगों को भी मिलेगा लाभ

सरकार की योजना में धार्मिक स्थलों के विकास के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी पर भी जोर दिया गया है। आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई जैसी सुविधाओं से श्रद्धालुओं को सहूलियत मिलेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर भोजन, आवास, परिवहन और अन्य पर्यटन संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। पर्यटन विभाग के अनुसार योजना के तहत साधु-संतों के लिए आश्रम और धार्मिक आयोजनों के लिए उपयुक्त स्थान विकसित किए जाएंगे।



जरूरत के मुताबिक मंदिरों में भगवान श्रीराम की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ सरकार राम वनगमन पथ को नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी में है। अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित 31 स्थलों पर विकास कार्य कितनी तेजी से शुरू होते हैं और श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बजट का उपयोग किस तरह किया जाता है। अब जो भी हो लेकिन चुनाव के पहले हिंदुत्व की हवा तो तैयार की ही जा सकती है।



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