भगवान राम पर भारी अडानी की आरी, वन गमन पथ और जानकी रसोई को मिटाने की तैयारी
NEWS IN SHORT
- राम पर भारी पड़ी अडानी की आरी
- राम वन गमन पथ खतरे में
- मिट जाएगी जानकी की रसोई
- नए कोल ब्लॉक की अनुमति से संकट
- अडानी के पास नए कोल ब्लॉक का ज़िम्मा
NEWS IN DETAIL
Raipur : कहते हैं राम से बड़ा राम का नाम। लेकिन छत्तीसगढ़ में राम से बड़ा अडानी नाम है। केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ में नई कोयला खदान को मंजूरी दे दी है जिसका ज़िम्मा अडानी के पास है। इसकी मंजूरी से राम वन गमन पथ पर खतरा मंडरा गया है। सीता गुफा और जानकी रसोई भी नष्ट होने की कगार पर हैं। 7 लाख पेड़ कटने और धमाकों से राम के पदचिन्ह भी मिट जाएंगे।
राम-सीता के पद चिन्ह पर संकट
हसदेव के नए कोल ब्लॉक की अनुमति ने भगवान राम और माता सीता की निशानियों को खतरे में डाल दिया है। भगवान राम ने वन गमन के दौरान लंबा समय छत्तीसगढ़ में बिताया है। यहां राम के आगमन के कई चिन्ह मौजूद हैं। सीता जहां भोजन पकाती थीं वो स्थान भी है।
यह कोल ब्लॉक रामगढ़ की पहाड़ियां, प्राचीन नाट्यशाला, सीता गुफा, जानकी रसोई और प्रभु श्री राम के वन गमन पथ की पुण्य स्मृतियों को मिटा देगा। कहा जा रहा है कि अडानी के आर्थिक लाभ के लिए इन ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों को संकट में डाला जा रहा है।
लंग्स ज़ोन में है कोयला खदान
छत्तीसगढ़ सरकार ने केते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल माइनिंग और पिट हेड कोल वॉशरी परियोजना के लिए 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोग में बदलने की परमीशन दी है।
राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद यह प्रस्ताव अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास भेजा गया, अब केंद्र ने भी अनुमति दे दी। केंद्र से हरी झंडी मिलते ही 7 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ हो गया। यह वही इलाका है जिसे सेंट्रल इंडिया का “लंग्स ज़ोन“ कहा जाता है।
कांग्रेस ने जताया विरोध
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि बीजेपी सरकार छत्तीसगढ़ को अडानीगढ़ बनाने पर तुली हुई है। सरकार के अडानी परस्त नीतियों से हसदेव अरण्य के घने जंगलों पर संकट उत्पन्न हो गया है।
मोदी के मित्र अडानी के मुनाफे के लिए सरगुजा रेंज के केते एक्सटेंशन की खुदाई अडानी को देने के लिए इस सरकार ने अनुमति दी है। अडानी का नाम भगवान राम से भी बड़ा हो गया है।
प्रभु राम और सीता की पावन स्मृतियों को मिटाया जा रहा है। वंदना राजपूत ने कहा कि हसदेव अरण्य का यह क्षेत्र पांचवी अनुसूची का भाग है, जहां नई खदान स्थापित करने का लगातार विरोध स्थानीय आदिवासियों के द्वारा किया जा रहा है। यह सरकार आदिवासियों के अधिकारों को कुचल रही है।
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन शुरू
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के साथ कई गांवों के आदिवासी समुदाय के लोग लगातार आंदोलित हैं। अति महत्वपूर्ण जैव विविधता संपन्न क्षेत्र में खनन से जंगल, जल स्रोत और उनकी परंपरागत आजीविका पर गहरा असर होगा। हाथियों और अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होगा और बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा, इस मुद्दे पर महीनों से आंदोलन चल रहा है, कई ग्राम सभाओं ने विरोध प्रस्ताव भी पारित किये, लेकिन सरकार में किसी की सुनवाई नहीं है।
निष्कर्ष
जानकर कहते हैं कि इससे पर्यावरण पर बड़ा संकट पैदा होगा। भगवान राम के वन गमन पथ पर पड़े भगवान के पदचिन्हों के साथ आदिवासियों के देवी देवता भी वन में स्थापित हैं। ऐसे में इन सब पर संकट आ गया है। सरकार को विकास के लिए कुछ तो सीमा रेखा खींचनी होगी।
FAQ
- कौन‑कौन सी जगहें खतरे में हैं?
राम वन गमन पथ, सीता गुफा, जानकी रसोई, रामगढ़ की पहाड़ियां और प्राचीन नाट्यशाला अडानी के कोल ब्लॉक से खतरे में हैं। लगभग 7 लाख पेड़ कटेंगे और पौराणिक स्मृतियां मिटने की कगार पर हैं। - पेड़ कटने से क्या असर होगा?
जंगल, जल स्रोत और जैव विविधता प्रभावित होगी। हाथियों और अन्य वन्य जीवों का आवास नष्ट होगा। आदिवासी समुदाय की परंपरागत आजीविका पर भी गंभीर असर पड़ेगा। - विरोध और राजनीतिक रुख क्या है?
स्थानीय आदिवासी और छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन विरोध में हैं। कांग्रेस ने कहा कि सरकार अडानी के मुनाफे के लिए पौराणिक और प्राकृतिक स्मृतियों को खतरे में डाल रही है।
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