रावतपुरा विश्वविद्यालय का बड़ा फर्जीवाड़ा : डिग्री मिली, पर नौकरी नहीं

Umeshwari Baghel | Jul 14, 2026, 22:40 IST
रावतपुरा यूनिवर्सिटी का बड़ा फर्जीवाड़ा
रावतपुरा विश्वविद्यालय के बी-ऑप्टोमेट्री छात्रों ने आरोप लगाया है कि बिना पैरामेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के उन्हें प्रवेश दिया गया। डिग्री मिलने के बाद नौकरी में परेशानी आ रही है। छात्रों ने थाने पहुंचकर एफआईआर की मांग की है।

समझें क्या है पूरा मामला

Raipur। रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय के बी-ऑप्टोमेट्री (B.Optometry) पाठ्यक्रम से जुड़े छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल काउंसिल से मान्यता और रजिस्ट्रेशन मिलने का भरोसा देकर दाखिला दिया गया था, लेकिन कोर्स पूरा होने के बाद भी उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है। इसके कारण उन्हें सरकारी और निजी संस्थानों में नौकरी के लिए आवेदन करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।



मंगलवार को बी-ऑप्टोमेट्री बैच 2020-24 के कई छात्र रायपुर के मुजगहन थाने पहुंचे। छात्रों ने विश्वविद्यालय के खिलाफ शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। छात्रों का आरोप है कि उनके साथ धोखा हुआ है और विश्वविद्यालय ने कोर्स की मान्यता और रजिस्ट्रेशन को लेकर सही जानकारी नहीं दी।



चार साल के कोर्स के लिए ली गई करीब 6 लाख रुपए फीस

छात्रों के मुताबिक बी-ऑप्टोमेट्री कोर्स में प्रवेश के समय उन्हें बताया गया था कि यह पाठ्यक्रम मान्यता प्राप्त है और पढ़ाई पूरी होने के बाद पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा। छात्रों का दावा है कि चार साल के कोर्स के लिए प्रत्येक विद्यार्थी से करीब 6 लाख रुपए तक फीस ली गई।



छात्रों ने बताया कि हर साल लगभग डेढ़ लाख रुपए फीस जमा कराई गई। पढ़ाई के दौरान कई बार उन्होंने कोर्स की मान्यता और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से जानकारी मांगी। छात्रों का कहना है कि उस समय उन्हें जल्द प्रक्रिया पूरी होने का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक स्थिति साफ नहीं हुई है।



डिग्री मिलने के बाद भी नौकरी में बाधा

छात्रों का कहना है कि कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें डिग्री तो मिल गई, लेकिन पैरामेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण उनकी परेशानी बढ़ गई है। उनका कहना है कि कई सरकारी और निजी संस्थानों में नौकरी के लिए आवेदन करते समय रजिस्ट्रेशन नंबर मांगा जाता है।



छात्रों के अनुसार रजिस्ट्रेशन नहीं होने की वजह से उनकी योग्यता पर सवाल उठ रहे हैं और कई जगह उनकी डिग्री को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चार साल की पढ़ाई और लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।



काउंसिल की सूची में विश्वविद्यालय का नाम नहीं होने का दावा

छात्रों ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल काउंसिल की ओर से जिन संस्थानों को संबंधित पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति दी गई है, उनकी सूची में रावतपुरा विश्वविद्यालय का नाम शामिल नहीं है।



छात्रों का आरोप है कि इसके बावजूद विश्वविद्यालय में बी-ऑप्टोमेट्री जैसे पैरामेडिकल पाठ्यक्रम संचालित किए गए। उनका कहना है कि यदि कोर्स की मान्यता या रजिस्ट्रेशन की स्थिति स्पष्ट नहीं थी तो छात्रों को प्रवेश देने से पहले इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी।



पांच बैच पासआउट होने का NSUI का दावा

इस मामले में NSUI भी छात्रों के समर्थन में सामने आई है। रायपुर जिला NSUI अध्यक्ष प्रशांत गोस्वामी छात्रों के साथ मुजगहन थाना पहुंचे और विश्वविद्यालय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की मांग की।



प्रशांत गोस्वामी ने दावा किया कि विश्वविद्यालय से बी-ऑप्टोमेट्री के पांच बैच पासआउट हो चुके हैं, जबकि छठा बैच भी कोर्स पूरा करने वाला है। उनका आरोप है कि अब तक किसी भी बैच के छात्रों को पैरामेडिकल रजिस्ट्रेशन नहीं मिला है।



उन्होंने कहा कि अगर 15 दिनों के भीतर विश्वविद्यालय के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है तो NSUI स्वास्थ्य मंत्री के निवास का घेराव कर विरोध प्रदर्शन करेगी।



विश्वविद्यालय प्रबंधन ने आरोपों पर नहीं दिया स्पष्ट जवाब

वहीं इस मामले में रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार अमृतपाल राव ने कहा कि यदि कोई छात्र विश्वविद्यालय के बाहर जाकर कोई गतिविधि करता है तो उसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय की नहीं होगी।



जब उनसे बी-ऑप्टोमेट्री कोर्स के रजिस्ट्रेशन और मान्यता को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। छात्रों के आरोपों और रजिस्ट्रेशन की स्थिति पर विश्वविद्यालय की ओर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।



पुलिस शिकायत के बाद जांच की मांग

छात्रों ने पुलिस से पूरे मामले की जांच कराने और विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। अब पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच करेगी।



मामला छात्रों के भविष्य और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की मान्यता से जुड़ा होने के कारण इस पर आगे प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। छात्रों का कहना है कि उनकी मांग केवल रजिस्ट्रेशन और रोजगार के अधिकार को लेकर है, ताकि उनकी वर्षों की मेहनत और खर्च का उचित लाभ मिल सके।



IMP FACTS

मामला: रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय के बी-ऑप्टोमेट्री छात्रों की शिकायत


स्थान: रायपुर, छत्तीसगढ़


शिकायत थाना: मुजगहन थाना


प्रभावित छात्र: बी-ऑप्टोमेट्री बैच 2020-24 के छात्र-छात्राएं


छात्रों का आरोप: पैरामेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के बिना एडमिशन दिया गया


फीस (छात्रों के अनुसार): करीब 1.50 लाख रुपए प्रति वर्ष


चार साल की फीस (छात्रों के अनुसार): करीब 6 लाख रुपए प्रति छात्र


मुख्य समस्या: कोर्स पूरा होने के बाद पैरामेडिकल रजिस्ट्रेशन नहीं मिला


नौकरी पर असर: रजिस्ट्रेशन नहीं होने से नौकरी आवेदन में परेशानी का दावा


छात्रों की मांग: विश्वविद्यालय के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच की जाए


NSUI का दावा: बी-ऑप्टोमेट्री के 5 बैच पासआउट हो चुके हैं


NSUI का आरोप: अब तक छात्रों को रजिस्ट्रेशन नहीं मिला


NSUI चेतावनी: 15 दिन में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की बात कही


विश्वविद्यालय पक्ष: रजिस्ट्रार अमृतपाल राव ने आरोपों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया


विवाद का केंद्र: बी-ऑप्टोमेट्री कोर्स की मान्यता और पैरामेडिकल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया


मामले की स्थिति: छात्रों की शिकायत के आधार पर जांच की मांग की गई है।



FAQ

  1. रावतपुरा विश्वविद्यालय के छात्रों ने क्या आरोप लगाए हैं?
    छात्रों का आरोप है कि बी-ऑप्टोमेट्री कोर्स में पैरामेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन का भरोसा देकर दाखिला दिया गया, लेकिन कोर्स पूरा होने के बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं मिला।
  2. छात्रों को नौकरी में क्या परेशानी आ रही है?
    छात्रों के अनुसार रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं होने के कारण सरकारी और निजी संस्थानों में नौकरी के लिए आवेदन करने में दिक्कत हो रही है।
  3. छात्रों ने विश्वविद्यालय के खिलाफ क्या मांग की है?
    छात्रों ने मुजगहन थाने में शिकायत देकर विश्वविद्यालय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

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