छत्तीसगढ़ में रेड मड से निकलेंगे कीमती खनिज, CMDC का JNARDDC से समझौता

Umeshwari Baghel | Jul 19, 2026, 16:52 IST
छत्तीसगढ़ में रेड मड से निकलेंगे कीमती खनिज
छत्तीसगढ़ में रेड मड से गैलियम, वैनेडियम और स्कैंडियम निकालने की तैयारी शुरू हो गई है। CMDC और नागपुर के JNARDDC के बीच समझौता हुआ है। रिसर्च के जरिए इन महत्वपूर्ण खनिजों को निकालने की तकनीक विकसित की जाएगी। इससे उद्योग और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

समझें क्या है पूरा मामला

Raipur। छत्तीसगढ़ अब अपनी खनिज संपदा से क्रिटिकल मिनरल निकालने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा रहा है। राज्य में रेड मड और बॉक्साइट से जुड़े अवशेषों से गैलियम, वैनेडियम और स्कैंडियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज निकालने की संभावनाओं पर रिसर्च होगी। इसके लिए छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड और नागपुर के जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम रिसर्च डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर के बीच समझौता हुआ है।



इस साझेदारी के तहत छत्तीसगढ़ में मौजूद खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। आधुनिक तकनीक की मदद से यह पता लगाया जाएगा कि औद्योगिक अवशेषों से कीमती और रणनीतिक महत्व के खनिजों को किस तरह निकाला जा सकता है। इस पहल को केंद्र सरकार के क्रिटिकल मिनरल मिशन और आत्मनिर्भर भारत अभियान से भी जोड़कर देखा जा रहा है।



रेड मड से बहुमूल्य खनिज निकालने पर होगा रिसर्च

JNARDDC के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र सिंह के मुताबिक संस्थान रेड मड से गैलियम और वैनेडियम की रिकवरी पर काम कर रहा है। इसके साथ ही बॉक्साइट से निकलने वाले उप-उत्पादों से स्कैंडियम प्राप्त करने की तकनीक पर भी रिसर्च चल रही है।



इन तीनों खनिजों की आधुनिक उद्योगों में लगातार जरूरत बढ़ रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर रक्षा क्षेत्र और ऊर्जा भंडारण तक इनका इस्तेमाल होता है। भारत अभी कई महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। ऐसे में घरेलू स्तर पर इनकी उपलब्धता बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।



क्या है रेड मड

रेड मड एल्युमीनियम उद्योग से निकलने वाला एक औद्योगिक अवशेष है। बॉक्साइट से एल्युमिना बनाने की प्रक्रिया के बाद बड़ी मात्रा में यह लाल रंग का पदार्थ बचता है। इसे बॉक्साइट रेजिड्यू भी कहा जाता है।



रेड मड काफी क्षारीय होता है। इसलिए इसका सुरक्षित निपटान लंबे समय से पर्यावरण के लिए चुनौती माना जाता है। वैज्ञानिक शोध में यह संभावना सामने आई है कि इसी अपशिष्ट में कई उपयोगी खनिज मौजूद हो सकते हैं। इन्हें तकनीक की मदद से अलग किया जाए तो औद्योगिक कचरे को आर्थिक संसाधन में बदला जा सकता है।



छत्तीसगढ़ में रेड मड से निकलेंगे कीमती खनिज


गैलियम कहां होता है इस्तेमाल

गैलियम सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए महत्वपूर्ण खनिज है। इसका उपयोग कंप्यूटर चिप्स, LED, सोलर सेल और हाई-स्पीड इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जाता है। 5G और आधुनिक संचार तकनीक में भी गैलियम आधारित कंपाउंड की उपयोगिता बढ़ी है। देश में इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार के साथ इसकी जरूरत भी बढ़ सकती है।



वैनेडियम से मजबूत स्टील और बेहतर बैटरी

वैनेडियम का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्टील को अधिक मजबूत बनाने में होता है। इसकी मदद से तैयार मिश्र धातु ज्यादा तापमान और दबाव सह सकती है। ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में वैनेडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी को भी एक महत्वपूर्ण तकनीक माना जाता है। बड़े स्तर पर बिजली स्टोर करने वाले ग्रिड सिस्टम में भविष्य में इसकी भूमिका बढ़ सकती है।



स्कैंडियम से हल्के और मजबूत उपकरण

स्कैंडियम को एल्युमीनियम के साथ मिलाने पर हल्का और मजबूत मिश्र धातु तैयार किया जा सकता है। इसी वजह से एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग में इसकी उपयोगिता है। हल्के विमान बनाने में ऐसे मिश्र धातुओं का इस्तेमाल ईंधन की खपत कम करने में मदद कर सकता है। स्कैंडियम का उपयोग कुछ विशेष प्रकार के फ्यूल सेल में भी किया जाता है।



छत्तीसगढ़ में निवेश और रोजगार की उम्मीद

CMDC और JNARDDC के बीच हुए समझौते से राज्य में खनिज आधारित रिसर्च को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सफल तकनीक विकसित होने पर खनिजों के केवल खनन तक सीमित रहने के बजाय उनका वैल्यू एडिशन भी छत्तीसगढ़ में किया जा सकेगा।



समझौते के दौरान भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर जनरल और JNARDDC के निदेशक पंकज कुलश्रेष्ठ सहित CMDC के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि रिसर्च और प्रोसेसिंग तकनीक विकसित होने पर राज्य में नए उद्योगों के साथ तकनीकी रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के लिए यह समझौता खनिज क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है। रेड मड जैसे औद्योगिक अपशिष्ट से गैलियम, वैनेडियम और स्कैंडियम निकालने की तकनीक सफल होती है तो इससे पर्यावरण प्रबंधन और खनिज आत्मनिर्भरता दोनों को फायदा मिल सकता है। साथ ही राज्य क्रिटिकल मिनरल की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में रेड मड से कौन-कौन से खनिज निकाले जाएंगे?
    छत्तीसगढ़ में रेड मड से गैलियम, वैनेडियम और स्कैंडियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज निकालने पर रिसर्च की जाएगी।
  2. CMDC और JNARDDC के बीच समझौता क्यों हुआ है?
    दोनों संस्थानों के बीच समझौता खनिज अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के जरिए क्रिटिकल मिनरल निकालने के लिए हुआ है।
  3. गैलियम, वैनेडियम और स्कैंडियम का उपयोग कहां होता है?
    इन खनिजों का उपयोग सेमीकंडक्टर, सोलर सेल, रक्षा उपकरण, मजबूत धातु और बैटरी तकनीक में किया जाता है।

यह खबरें भी पढ़े...

सरगुजा में 4 बॉक्साइट खदानों को पर्यावरण मंजूरी की तैयारी, पंचायतों से मांगी एनओसी



ग्वालियर रोजगार मेला में 32 कंपनियां देंगी 45 हजार सैलरी तक की नौकरी



नई पीढ़ी का सोने के गहनों से छूटा मोह, निवेश बढ़ा पर खरीदारी घटी



छत्तीसगढ़ का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट खुलेगा नवा रायपुर में, मिलेंगे बंपर रोजगार



Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • पर्यावरण
  • निवेश
  • रोजगार
  • रिसर्च
  • खनिज
  • सेमीकंडक्टर प्लांट