नई पीढ़ी का सोने के गहनों से छूटा मोह, निवेश बढ़ा पर खरीदारी घटी
thesootr Desk | Jul 19, 2026, 15:42 IST
new generation gold jewellery demand decline
जेन Z हर चीज को नए नजरिए से देख रही है। वह पारंपरिक रिवाजों से अलग फैसले ले रही है। इसका असर सोने के गहनों की खरीद पर भी दिखाई दे रहा है। पिछले 26 साल में पहली बार सोने के आभूषणों की मांग में बड़ी कमी आई है।
भारतीय घरों में सोना का हमेशा से खास महत्व रहा है। लोग सोने को परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं। इसके विपरीत अब यह संस्कृति धीरे-धीरे बदल रही है। नई पीढ़ी सोने के गहनों की जगह सोने में निवेश को ज्यादा महत्व दे रही है। 26 साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब सोने के गहनों की खरीद में नई पीढ़ी की रुचि कम हुई है, जबकि निवेश के तौर पर सोने की मांग बढ़ी है।
भारतीय घरों में सोने के गहनों को स्त्रीधन और आपातकालीन फंड माना जाता है। हालांकि, युवा पीढ़ी अब इसे डेड इन्वेस्टमेंट मानने लगी है। यही वजह है कि देश में सोने के गहनों की मांग घट रही है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, इस साल की पहली तिमाही में निवेश के लिए सोने की मांग 54 प्रतिशत बढ़कर 82 टन हो गई। वहीं, आभूषणों की मांग 19 प्रतिशत घटकर 66 टन रह गई।
पहले शादी-ब्याह और अन्य खास मौकों पर दुल्हन से लेकर दूल्हे तक के लिए बड़ी संख्या में सोने के गहने खरीदे जाते थे। लेकिन अब युवा हल्की ज्वेलरी, गोल्ड कॉइन और गोल्ड ईटीएफ को प्राथमिकता दे रहे हैं।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के उपभोक्ता सर्वे के अनुसार, 18 से 24 साल की महिलाओं का मानना है कि पारंपरिक गहने उनकी लाइफस्टाइल से मेल नहीं खाते। वे हल्के डिजाइन वाले गहने या निवेश के विकल्पों को ज्यादा पसंद करती हैं।वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में रिसाइकिल्ड सोने की मात्रा 78 टन थी, जो 2025 में बढ़कर करीब 140 टन पहुंच गई है।
सोने की ज्वेलरी खरीदने पर 10 से 25 प्रतिशत तक मेकिंग चार्ज देना पड़ता है। यह राशि गहने बेचते समय वापस नहीं मिलती। इसके मुकाबले गोल्ड बार, कॉइन और गोल्ड ईटीएफ को खरीदना और बेचना आसान माना जाता है।
सोने के गहनों की सुरक्षा के लिए बैंक लॉकर की जरूरत पड़ती है। इसके लिए सालाना किराया भी देना होता है। वर्तमान में पुराने सोने के बदले नई ज्वेलरी खरीदने का चलन बढ़ रहा है।लोग भारी गहने देकर हल्की ज्वेलरी खरीद रहे हैं। इससे ज्वेलरी बाजार में ग्राहकों की पसंद बदल रही है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जेन Z और मिलेनियल्स अब सोने को सिर्फ लॉकर में रखने वाली संपत्ति नहीं मानते। वे इसे लिक्विड इन्वेस्टमेंट के रूप में देखते हैं। पिछले दो दशकों में युवाओं का रुझान सोने के अलावा इक्विटी, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ, स्टार्टअप और रियल एस्टेट जैसे निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है।
हर साल जांची जाएगी सैनिकों की मर्दानगी, इस देश की सेना का अनोखा फरमान
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में छाए बॉलीवुड के सितारे
किसानों का 17 साल पुराना इंतजार खत्म, देश की सबसे बड़ी टनल हुई तैयार
ई20 पेट्रोल ने बिगाड़ा कार का इंजन, कोर्ट का आदेश, डॉक्टर को मिलेगी नई कार
भारतीय घरों में सोने के गहनों को स्त्रीधन और आपातकालीन फंड माना जाता है। हालांकि, युवा पीढ़ी अब इसे डेड इन्वेस्टमेंट मानने लगी है। यही वजह है कि देश में सोने के गहनों की मांग घट रही है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, इस साल की पहली तिमाही में निवेश के लिए सोने की मांग 54 प्रतिशत बढ़कर 82 टन हो गई। वहीं, आभूषणों की मांग 19 प्रतिशत घटकर 66 टन रह गई।
लाइफस्टाइल ने बदली पसंद
निवेश में बढ़ा रुझान
नई पीढ़ी क्यों बना रही गहनों से दूरी?
नई ज्वेलरी का चलन
पहली तिमाही में घटी मांग
FAQ
- क्या नई पीढ़ी सोने के गहनों से दूर हो रही है?
हां, नई पीढ़ी में सोने के पारंपरिक गहनों की जगह निवेश के तौर पर सोना खरीदने का चलन बढ़ रहा है। युवा अब भारी गहनों की बजाय गोल्ड ईटीएफ, कॉइन और बार जैसे विकल्पों को पसंद कर रहे हैं। - सोने के गहनों की मांग क्यों घट रही है?
बदलती लाइफस्टाइल, मेकिंग चार्ज, गहनों की सुरक्षा और निवेश के नए विकल्पों की वजह से सोने के गहनों की मांग में कमी देखी जा रही है। - सोने में निवेश की मांग कितनी बढ़ी है?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, इस साल की पहली तिमाही में निवेश के लिए सोने की मांग 54 प्रतिशत बढ़कर 82 टन हो गई है। - सोने के गहने खरीदने पर कितना मेकिंग चार्ज देना पड़ता है?
सोने की ज्वेलरी खरीदने पर आमतौर पर 10 से 25 प्रतिशत तक मेकिंग चार्ज देना पड़ता है। यह राशि गहने बेचते समय वापस नहीं मिलती। - युवा सोने की जगह किन निवेश विकल्पों को पसंद कर रहे हैं?
नई पीढ़ी सोने के अलावा इक्विटी, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, गोल्ड ईटीएफ, सिल्वर ईटीएफ, स्टार्टअप और रियल एस्टेट जैसे निवेश विकल्पों में रुचि दिखा रही है।
ये भी पढ़ें...
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में छाए बॉलीवुड के सितारे
किसानों का 17 साल पुराना इंतजार खत्म, देश की सबसे बड़ी टनल हुई तैयार
ई20 पेट्रोल ने बिगाड़ा कार का इंजन, कोर्ट का आदेश, डॉक्टर को मिलेगी नई कार
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA