छत्तीसगढ़ सड़क निर्माण: 400 गांव बनते हैं टापू, लापरवाह ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का बड़ा संकट है। राज्य के 1200 से अधिक गांवों तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती। मॉनसून के दौरान करीब 400 गांव पूरी तरह टापू बन जाते हैं। नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से रास्ते बंद हो जाते हैं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सड़कों के लिए कड़ा रुख अपनाया है।
1200 गांवों तक नहीं पहुंचती एम्बुलेंस
छत्तीसगढ़ में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। इसके बावजूद जमीनी हकीकत आज भी बेहद चिंताजनक है। राज्य की एक बहुत बड़ी आबादी विकास की मुख्यधारा से कटी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पक्की सड़कों का नेटवर्क अब तक नहीं पहुंच पाया है।
इस वजह से लोगों को दैनिक जीवन में भारी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। बुनियादी ढांचे की कमी के कारण ग्रामीण बेहद लाचार नजर आते हैं। सरकार अब इस गंभीर समस्या को दूर करने के प्रयास में जुटी है।
गांवों की बदहाल जमीनी हकीकत
राज्य में 1200 से अधिक ऐसे गांव और कस्बे हैं। इन इलाकों में आज तक पक्की सड़क का नामोनिशान नहीं है। कई मजरे और टोले भी इस विकट समस्या से जूझ रहे हैं। इन क्षेत्रों में हालात इतने खराब हैं कि गाड़ियां नहीं चल पातीं।
चार पहिया वाहनों का इन गांवों में पहुंचना पूरी तरह असंभव है। आपातकालीन स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाना बहुत मुश्किल होता है। सामान्य दिनों में मोटरसाइकिल से सफर करना भी किसी चुनौती से कम नहीं। राहगीरों को कीचड़ और गड्ढों से होकर गुजरना पड़ता है।
इसके अलावा करीब 400 गांव ऐसे हैं जो बेहद संवेदनशील हैं। बारिश के दिनों में ये गांव पूरी तरह टापू बन जाते हैं। इनका संपर्क जिला मुख्यालयों और अन्य विकासखंडों से टूट जाता है। ग्रामीण कई महीनों तक अपने घरों में ही कैद रहने को मजबूर हैं।
बारिश में संपर्क टूटने की वजह
लगातार होने वाली बारिश से नदी और नाले उफान पर आ जाते हैं। पानी का तेज बहाव रास्तों को पूरी तरह से रोक देता है। इन गांवों में आने-जाने का एकमात्र रास्ता बंद हो जाता है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ जगहों पर कच्ची सड़कें बनी हैं। मगर वहां आवश्यक पुल और पुलिया का निर्माण नहीं किया गया है। स्थानीय नदियों पर छोटे रपटे या कम ऊंचाई वाले पुल बने हैं।
बारिश के मौसम में इन रपटों के ऊपर पानी आ जाता है। अक्सर सड़कों पर तीन से चार फीट तक पानी बहने लगता है। इस कारण से यातायात पूरी तरह से ठप हो जाता है। पक्की सड़क न होने का सीधा असर जरूरी सेवाओं पर पड़ता है। स्वास्थ्य सेवाएं समय पर न मिलने से मरीजों की जान जोखिम में रहती है। बच्चों की शिक्षा और स्कूल जाना भी इससे बुरी तरह प्रभावित होता है। राशन और आपातकालीन सेवाएं ग्रामीणों तक समय पर नहीं पहुंच पाती हैं।
उप मुख्यमंत्री की सख्त समीक्षा बैठक
ग्रामीणों की इस बड़ी समस्या को सरकार ने गंभीरता से लिया है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। वह लोक निर्माण विभाग (PWD – Public Works Department) के मंत्री भी हैं।
नवा रायपुर के 'निर्माण भवन' में यह महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभागीय अधिकारियों के कामकाज की गहन समीक्षा की गई। मंत्री ने अफसरों के ढुलमुल रवैए पर कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने अफसरों को दोटूक शब्दों में अपनी बात कह दी है। संवेदनशील गांवों तक सालभर का संपर्क सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। ऑल वेदर कनेक्टिविटी (All Weather Connectivity) देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है।
डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को तुरंत एक व्यापक सर्वे करने का निर्देश दिया। इस कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए समय-सीमा तय की गई है। पीडब्ल्यूडी सचिव ने सभी अधिकारियों को सख्त हिदायत जारी की है।
31 अगस्त तक का मिला अल्टीमेटम
अधिकारियों को आगामी 31 अगस्त तक नए प्रस्ताव भेजने होंगे। इसके साथ ही विस्तृत प्राक्कलन (Estimate) तैयार कर शासन को भेजना होगा। इस काम के लिए समय-सीमा पूरी तरह अनिवार्य कर दी गई है।
सरकार का उद्देश्य इस काम को जल्द से जल्द पूरा करना है। बरसात खत्म होते ही धरातल पर काम शुरू कराया जा सके। सितंबर और अक्टूबर के महीने में कार्य आदेश जारी कर दिए जाएंगे। ताकि ठंड की शुरुआत होते ही निर्माण कार्य तेज गति से चले।
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पुराने ढर्रे को बदलने को कहा। उन्होंने मैदानी स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लापरवाह ठेकेदारों पर गिरेगी गाज
बैठक में काम की गुणवत्ता को लेकर भी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री ने लापरवाह ठेकेदारों को स्पष्ट चेतावनी दी है। अनुबंध के अनुसार तय समय-सीमा में काम पूरा करना होगा।
जो ठेकेदार समय पर काम पूरा नहीं करेंगे उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। सरकार उन्हें तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी में है। उनके अनुबंध को सीधे समाप्त यानी टर्मिनेट (Terminate) कर दिया जाएगा।
FAQ
- छत्तीसगढ़ के कितने गांवों में एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ के 1200 से अधिक गांवों और कस्बों में पक्की सड़क न होने के कारण एम्बुलेंस या कोई भी चार पहिया वाहन नहीं पहुंच पाता है। - छत्तीसगढ़ में बारिश के दिनों में कितने गांव टापू बन जाते हैं?
उत्तर: अत्यधिक बारिश और नदी-नालों में उफान आने के कारण छत्तीसगढ़ के करीब 400 गांव पूरी तरह टापू बन जाते हैं और उनका संपर्क कट जाता है। - छत्तीसगढ़ सरकार ने सड़क निर्माण के प्रस्ताव के लिए क्या समय-सीमा तय की है?
उत्तर: पीडब्ल्यूडी मंत्री और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अधिकारियों को 31 अगस्त तक नए प्रस्ताव और प्राक्कलन तैयार कर भेजने की समय-सीमा दी है।
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