RTE राशि में 14 साल बाद बदलाव की तैयारी, कमेटी गठित
NEWS IN SHORT
- RTE प्रतिपूर्ति राशि 14 साल बाद होगी पुनः निर्धारित
- निजी स्कूल संघ ने असहयोग आंदोलन वापस लिया
- गरीब बच्चों के दाखिले पर लगा संकट फिलहाल टला
- सरकार ने विशेष कमेटी बनाई नई राशि तय करने के लिए
- भविष्य के लिए उत्तरहीन सवाल: नई राशि कब लागू होगी?
NEWS IN DETAIL
Raipur, 9 जून 2026। छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार यानी RTE के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि में 14 साल बाद बदलाव होने वाला है।
स्कूल शिक्षा सचिव ने लोक शिक्षण संचालनालय को निर्देश दिया है कि इस राशि के पुनः निर्धारण के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाए। इस घोषणा के बाद निजी स्कूल संघ ने अपना असहयोग आंदोलन वापस ले लिया है।
क्या है RTE प्रतिपूर्ति राशि और क्यों है विवाद?
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत हर निजी स्कूल में 25 प्रतिशत सीटें गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। इन सीटों पर पढ़ने वाले बच्चों की फीस राज्य सरकार निजी स्कूलों को चुकाती है।
इसे ही प्रतिपूर्ति राशि कहते हैं। छत्तीसगढ़ में यह राशि 2011 से लेकर अब तक प्रति छात्र मात्र 7 हजार रुपए प्रति वर्ष तय है। यानी 14 साल में इसमें एक रुपए की भी बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि इस दौरान स्कूलों की फीस, बिजली, स्टाफ का वेतन और अन्य खर्चे कई गुना बढ़ चुके हैं।
निजी स्कूलों का आंदोलन और दाखिले का संकट
राशि न बढ़ने से नाराज निजी स्कूल संघ मार्च 2026 से असहयोग आंदोलन पर था। संघ ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में RTE सीटों पर गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं देने का फैसला लिया था।
इसका सीधा असर उन हजारों गरीब बच्चों पर पड़ा जिनका नाम RTE की पहली लॉटरी में आ चुका था-लेकिन स्कूलों ने उन्हें दाखिला देने से मना कर दिया। बच्चों और अभिभावकों को कई दिनों तक भटकना पड़ा।
हालांकि बाद में छात्रहित को सर्वोपरि मानते हुए निजी स्कूलों ने प्रवेश देना शुरू किया। पहले चरण के दाखिले पूरे होने के बाद अब दूसरे चरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
कमेटी बनने के बाद आंदोलन खत्म
सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति राशि के पुनः निर्धारण के लिए कमेटी बनाने की घोषणा के बाद निजी स्कूल संघ ने अपना असहयोग आंदोलन वापस ले लिया है। यह राहत की बात है क्योंकि इससे गरीब बच्चों की पढ़ाई पर जो संकट मंडरा रहा था वह फिलहाल टल गया है।
अभी भी एक बड़ा सवाल उत्तरहीन
हालांकि इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल अभी भी उत्तरहीन है-कमेटी द्वारा बढ़ाई गई नई राशि का भुगतान निजी स्कूलों को किस सत्र से मिलेगा?
क्या इसका लाभ वर्तमान सत्र 2026-27 से मिलेगा या अगले सत्र से? इस पर सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। निजी स्कूल संघ और अभिभावक दोनों इस सवाल का जवाब चाहते हैं।
गरीब बच्चों के भविष्य का सवाल
RTE की यह पूरी स्थिति उन लाखों गरीब बच्चों के भविष्य से जुड़ी है जो निजी स्कूलों में मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने के हकदार हैं। 14 साल से जमी हुई राशि के कारण निजी स्कूल RTE सीटों को बोझ मानने लगे थे।
अब कमेटी बनने से उम्मीद है कि एक उचित और न्यायसंगत राशि तय की जाएगी-जो न केवल निजी स्कूलों को राहत दे बल्कि गरीब बच्चों की शिक्षा भी निर्बाध रूप से जारी रहे।
IMP FACTS
RTE प्रतिपूर्ति राशि 14 साल से कोई बदलाव नहीं -2011 से प्रति छात्र 7,000 रुपए प्रति वर्ष।
25% सीटें गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित – निजी स्कूलों में।
निजी स्कूल संघ मार्च 2026 से असहयोग आंदोलन पर था-दाखिले में रुकावट आई।
सरकार ने विशेष कमेटी बनाई -नई प्रतिपूर्ति राशि तय करने के लिए।
भविष्य का बड़ा सवाल -नई राशि वर्तमान सत्र 2026-27 से लागू होगी या अगले सत्र से, स्पष्ट नहीं।
FAQ
- RTE प्रतिपूर्ति राशि क्या है?
यह वह राशि है जो राज्य सरकार गरीब बच्चों की फीस के लिए निजी स्कूलों को देती है। - निजी स्कूल संघ आंदोलन क्यों कर रहा था?
क्योंकि 14 साल से राशि 7,000 रुपए पर अटकी हुई थी और खर्च बढ़ने के बावजूद बढ़ोतरी नहीं हुई थी। - नई राशि कब लागू होगी?
अभी स्पष्ट नहीं है कि यह 2026-27 से लागू होगी या अगले सत्र से; सरकार ने कोई निर्णय नहीं दिया है।
FAQ
- RTE प्रतिपूर्ति राशि क्या है?
यह वह राशि है जो राज्य सरकार गरीब बच्चों की फीस के लिए निजी स्कूलों को देती है। - निजी स्कूल संघ आंदोलन क्यों कर रहा था?
क्योंकि 14 साल से राशि 7,000 रुपए पर अटकी हुई थी और खर्च बढ़ने के बावजूद बढ़ोतरी नहीं हुई थी। - नई राशि कब लागू होगी?
अभी स्पष्ट नहीं है कि यह 2026-27 से लागू होगी या अगले सत्र से; सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया है।
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