RTE प्रतिपूर्ति पर अड़ा स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ के निजी स्कूल बंद
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूलों का विरोध तेज हुआ।
- फीस प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन।
- प्रदेशभर में स्कूलों की तालाबंदी की गई।
- काली पट्टी बांधकर विरोध जताया गया।
- यदि मांगें पूरी नहीं हुई, तो आरटीई छात्रों को प्रवेश नहीं मिलेगा।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्राइवेट स्कूलों की फीस और प्रतिपूर्ति राशि को लेकर विवाद बढ़ गया है। एसोसिएशन और शिक्षा विभाग के बीच तनाव गहरा गया है। इस मुद्दे पर एसोसिएशन ने राज्य सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन जारी रखते हुए एक नया ऐलान किया है।
प्राइवेट स्कूलों में बंद की घोषणा
प्रतिपूर्ति राशि के निर्धारण में हो रही देरी से नाराज एसोसिएशन ने 18 अप्रैल को प्रदेशभर में प्राइवेट स्कूलों की तालाबंदी कर दी। एसोसिएशन के नेताओं का कहना है कि उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे स्कूल संचालकों में गहरी नाराजगी है।
विरोध का स्वरूप
रैली से पहले, 17 अप्रैल को सभी स्कूल संचालकों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। यह प्रतीकात्मक विरोध था, लेकिन इसके जरिए सरकार को अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की गई। एसोसिएशन का कहना है कि यदि प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी नहीं की जाती है, तो वे आरटीई के तहत चयनित विद्यार्थियों को प्रवेश देने से मना कर सकते हैं।
मंत्री को पत्र लिखकर जताया विरोध
स्कूल शिक्षा मंत्री और विभाग के अधिकारियों को एक पत्र भेजते हुए एसोसिएशन ने बताया कि 13 अप्रैल को शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए विज्ञापन में इस बात का जिक्र किया गया था कि प्रतिपूर्ति राशि का निर्धारण सरकारी विद्यालय में प्रति विद्यार्थी खर्च या प्राइवेट स्कूल की वास्तविक फीस के आधार पर किया जाएगा। लेकिन एसोसिएशन का कहना है कि 2011 से इस राशि का पुनर्निर्धारण नहीं हुआ है, जिससे समस्या और गहरी हो गई है।
2011 से लंबित है निर्धारण
एसोसिएशन का कहना है कि शासकीय विद्यालयों में प्रति विद्यार्थी खर्च का सार्वजनिक आंकड़ा जारी करने के बाद ही निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि का निर्धारण किया जा सकता है।
आंदोलन के अगले कदम
एसोसिएशन ने 1 मार्च से प्रदेशभर में असहयोग आंदोलन शुरू किया था। 4 अप्रैल को एसोसिएशन ने घोषणा की थी कि यदि प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि नहीं की गई, तो वे आरटीई के तहत वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं देंगे। इस आंदोलन को और तेज करते हुए 17 अप्रैल को काली पट्टी बांधकर काम करने का निर्णय लिया गया था, और 18 अप्रैल को पूरे प्रदेश में स्कूलों की तालाबंदी कर दी गई।
एसोसिएशन का कहना है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि नहीं की जाती। इस मुद्दे पर प्राइवेट स्कूलों का विरोध प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में बड़ा असर डाल सकता है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूलों ने फीस प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। एसोसिएशन ने प्रदेशभर में स्कूलों की तालाबंदी की और काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। यदि सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना, तो वे आरटीई छात्रों को प्रवेश देने से मना कर सकते हैं।
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