छत्तीसगढ़ आरटीई : 39% सीटें खाली, 8,500 बच्चों को नहीं मिला दाखिला
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ आरटीई एडमिशन में बड़ा गैप, 8500 सीटें खाली
- रायपुर और बिलासपुर में सबसे ज्यादा खाली सीटों की स्थिति
- आदिवासी जिलों में आरटीई योजना की सबसे कमजोर पहुंच
- दस्तावेज और प्रक्रिया की खामियों से रुका हजारों बच्चों का प्रवेश
- शिक्षा विभाग करेगा समीक्षा, सुधार की तैयारी शुरू
NEWS IN DETAIL
Raipur। छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) योजना के तहत निजी स्कूलों में गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 21,975 सीटें आरक्षित की गई थीं। लेकिन इस बार केवल 13,383 सीटों पर ही प्रवेश हो पाया है। बाकी करीब 8,500 सीटें खाली रह गई हैं। यह कुल सीटों का लगभग 39 प्रतिशत है। इस स्थिति से पता चलता है कि योजना का लाभ इस बार पूरी तरह बच्चों तक नहीं पहुंच सका।
रायपुर और बिलासपुर में सबसे ज्यादा खाली सीटें
राज्य के बड़े शहरों में भी आरटीई एडमिशन पूरी तरह नहीं भर पाए। रायपुर में 3,096 सीटों में से 2,297 बच्चों का प्रवेश हुआ और 799 सीटें खाली रह गईं। बिलासपुर में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गईं। बलरामपुर, सूरजपुर और सरगुजा जैसे जिलों में भी स्थिति कमजोर रही। शहरी जिलों में ज्यादा सीटें होने के बावजूद पूरी भरती न होना योजना की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
आदिवासी जिलों में सबसे खराब स्थिति
आदिवासी बहुल जिलों में आरटीई की स्थिति सबसे कमजोर रही। सुकमा में 97 प्रतिशत सीटें खाली रह गईं। बीजापुर में 96 प्रतिशत और दंतेवाड़ा में 93 प्रतिशत सीटें खाली रहीं। इन जिलों में बहुत कम बच्चों का चयन के बाद प्रवेश हो सका। इससे साफ है कि दूरस्थ इलाकों में योजना की पहुंच और जागरूकता दोनों कमजोर हैं।
प्रवेश न होने के पीछे प्रमुख कारण
शिक्षा विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में कई वजहें सामने आई हैं। कई मामलों में दस्तावेज पूरे नहीं हो पाए। कुछ अभिभावकों को प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं थी। कई जगह स्कूल स्तर पर प्रवेश प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हुई। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्कूल तक पहुंच भी बड़ी समस्या बनी। इन सभी कारणों ने मिलकर हजारों बच्चों का प्रवेश रोक दिया।
विशेषज्ञों की चिंता
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सीटें आरक्षित करना पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती चयन के बाद बच्चे को स्कूल तक पहुंचाने की है। उनका मानना है कि सिस्टम के अंतिम चरण में कमजोरियां रह जाती हैं, जिसकी वजह से हर साल बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाती हैं।
शिक्षा विभाग की समीक्षा की तैयारी
शिक्षा विभाग इस पूरे मामले की समीक्षा करने जा रहा है। खाली सीटों के कारणों को समझकर अगले चरण में सुधार करने की योजना है। विभाग का फोकस यह है कि भविष्य में चयनित हर बच्चे का प्रवेश सुनिश्चित हो और प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
IMP FACTS
आरटीई के तहत कुल 21,975 सीटें आरक्षित थीं
केवल 13,383 बच्चों का ही प्रवेश हो सका
लगभग 8,500 सीटें यानी करीब 39% खाली रह गईं
रायपुर और बिलासपुर में सबसे ज्यादा खाली सीटें दर्ज हुईं
सुकमा में 97%, बीजापुर में 96% सीटें खाली रह गईं
दंतेवाड़ा में 93% सीटों पर प्रवेश नहीं हो सका
मुख्य कारण: दस्तावेज की कमी, जागरूकता और प्रक्रिया में देरी
निष्कर्ष
आरटीई योजना का उद्देश्य गरीब बच्चों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। लेकिन हजारों सीटों का खाली रह जाना सिस्टम की खामियों को दिखाता है। अगर प्रक्रिया में सुधार नहीं हुआ तो इस योजना का वास्तविक लाभ जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचना मुश्किल होगा।
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