सचिन पायलट ने परखीं तैयारियाँ, रायपुर पहुंचेंगे राहुल गांधी
समझें क्या है पूरा मामला
रायपुर में कांग्रेस के 41 नए जिलाध्यक्षों का 10 दिन का प्रशिक्षण शिविर शुरू हुआ है। सचिन पायलट ने शनिवार को व्यवस्थाओं का जायजा लिया। रविवार को राहुल गांधी भी शिविर में शामिल होंगे। जिलाध्यक्षों को संगठन प्रबंधन और डिजिटल संचार की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह शिविर 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
कांग्रेस जिलाध्यक्षों का प्रशिक्षण शिविर शुरू
कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में अपने संगठन को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के 41 नवनियुक्त जिलाध्यक्षों के लिए 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू हो गया है। यह शिविर रायपुर के अभनपुर स्थित अग्रवाल मंगल भवन में आयोजित किया जा रहा है। शनिवार को शिविर की औपचारिक शुरुआत हुई। छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट दोपहर में रायपुर पहुंचे। उन्होंने सीधे प्रशिक्षण स्थल जाकर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
परिचय सत्र से शुरुआत
शिविर की शुरुआत जिलाध्यक्षों के परिचय सत्र के साथ हुई। इसमें सभी नवनियुक्त जिलाध्यक्षों ने एक-दूसरे से बातचीत की। प्रभारी सचिवगण एस. सम्पत, जरिता लैतफलांग और विजय जांगिड़ भी इस शिविर में शामिल होने रायपुर पहुंच चुके हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी रविवार को शिविर में शामिल होंगे। कांग्रेस के लिए यह सिर्फ एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है। पार्टी इसे संगठन के पुनर्निर्माण और आने वाले चुनाव की रणनीति का अहम चरण मान रही है।
संगठन मजबूत बनाने पर जोर
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठन के बिना सत्ता में वापसी संभव नहीं है। इसी सोच के साथ जिलाध्यक्षों को बदलते राजनीतिक माहौल के अनुसार तैयार किया जा रहा है। शिविर में एआईसीसी (AICC – All India Congress Committee) की प्रशिक्षण टीम जिलाध्यक्षों को कई विषयों पर सिखा रही है। इनमें संगठन प्रबंधन, जनसंपर्क, राजनीतिक रणनीति, सोशल मीडिया और नेतृत्व विकास शामिल हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रशिक्षक सचिन राव भी अपनी टीम के साथ रायपुर पहुंच चुके हैं। जिलाध्यक्षों को सिर्फ कक्षा में नहीं पढ़ाया जाएगा। उन्हें फील्ड विजिट, श्रमदान और गांवों में रात्रि विश्राम जैसे कार्यक्रमों से भी गुजरना होगा। इससे उनमें जमीनी स्तर की समझ विकसित होगी।
कांग्रेस कनेक्ट एप से निगरानी
शिविर में डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम भी एक बड़ा विषय रहेगा। 27 और 28 जून को जिलाध्यक्षों को कांग्रेस कनेक्ट प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस एप के जरिए पदाधिकारियों को अलग-अलग राजनीतिक और संगठनात्मक काम सौंपे जाएंगे।
काम पूरा होने पर इसकी फोटो, वीडियो और रिपोर्ट सीधे एआईसीसी के केंद्रीय डैशबोर्ड पर अपलोड होगी। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली के राष्ट्रीय वार रूम से इन गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। जो पदाधिकारी समय पर काम पूरा नहीं करेंगे, उनकी रिपोर्ट अलग से दर्ज होगी। इस ट्रेनिंग का नेतृत्व वामसी रेड्डी, शशिकांत सेंथिल और दीपक मिश्रा करेंगे।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे शिविर
कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान नया नहीं है। इससे पहले सितंबर 2025 में गुजरात के जूनागढ़ में और नवंबर 2025 में मध्यप्रदेश के पचमढ़ी में ऐसा शिविर लग चुका है। जनवरी 2026 में हरियाणा-उत्तराखंड के कुरुक्षेत्र में और मार्च 2026 में झारखंड के चाईबासा में भी प्रशिक्षण आयोजित हुआ था।
इन सभी शिविरों में बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया गया। कुछ राज्यों में जिन जिलाध्यक्षों ने प्रशिक्षण को गंभीरता से नहीं लिया, उन्हें प्रमाणपत्र तक नहीं दिए गए। इससे साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस अब अपने संगठन को लेकर पहले से ज्यादा सख्त और जवाबदेह रवैया अपना रही है।
FAQ
- रायपुर के अभनपुर में आयोजित कांग्रेस के इस 10 दिवसीय शिविर का मुख्य उद्देश्य क्या है और इसमें कितने पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं?
उत्तर: इस शिविर का मुख्य उद्देश्य 'मिशन 2028' (आगामी विधानसभा चुनाव) के लिए संगठन को मजबूत करना है। इसमें छत्तीसगढ़ के 41 नवनियुक्त जिलाध्यक्षों को बदलते राजनीतिक माहौल के अनुसार संगठन प्रबंधन, जनसंपर्क, राजनीतिक रणनीति, सोशल मीडिया और नेतृत्व विकास का कड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। - अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रीय प्रशिक्षक कौन हैं और उनके साथ इस डिजिटल व सांगठनिक ट्रेनिंग का नेतृत्व कौन से प्रमुख नेता कर रहे हैं?
उत्तर: इस शिविर में मुख्य राष्ट्रीय प्रशिक्षक सचिन राव हैं। उनके साथ इस पूरी ट्रेनिंग और सांगठनिक सत्रों का नेतृत्व एआईसीसी (AICC) की टीम से वामसी रेड्डी, शशिकांत सेंथिल और दीपक मिश्रा कर रहे हैं। - 'कांग्रेस कनेक्ट' (Congress Connect) ऐप क्या है और दिल्ली के राष्ट्रीय वार रूम से इसके जरिए जिलाध्यक्षों की निगरानी कैसे की जाएगी?
उत्तर: यह कांग्रेस पार्टी का एक विशेष डिजिटल मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए जिलाध्यक्षों को अलग-अलग सांगठनिक और राजनीतिक काम सौंपे जाएंगे। काम पूरा होने पर पदाधिकारियों को इसकी फोटो, वीडियो और ग्राउंड रिपोर्ट सीधे ऐप पर अपलोड करनी होगी, जिसकी सीधी मॉनिटरिंग दिल्ली स्थित केंद्रीय डैशबोर्ड (राष्ट्रीय वार रूम) से की जाएगी।
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