छत्तीसगढ़ में समग्र शिक्षा में अफसरों की मौज, मंत्री के नाम पर किराए की 12 लग्जरी गाड़ियां
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में पीएम मोदी की अपील और सरकार के निर्देशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। अधिकारी अपनी मनमर्जी से फिजूलखर्ची कर रहे हैं। समग्र शिक्षा विभाग में किराए की 12 गाड़ियां चल रही हैं जबकि सिर्फ दो अफसरों को सरकारी वाहन की पात्रता है। किराए की इन लग्जरी गाड़ियों में मौज अधिकारी कर रहे हैं बिल मंत्री के नाम पर फाड़ा जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों के साथ ही मंत्रियों और सरकारी अफसरों से अपील की है कि वे अपने खर्चे कम करें। एक ही जगह जाने के लिए वाहन पूलिंग करें। इसके बाद सरकारों ने भी खर्च में अपने हाथ खींच लिए। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी ऑर्डर जारी कर दिया कि अधिकारी,कर्मचारी अनावश्यक खर्च न करें।
यात्रा पर रोक के साथ साथ किराए की गाड़ियों पर भी रोक लगा दी गई। इतनी सख्ती के बाद भी कुछ सरकारी विभाग अपनी मनमर्जी कर रहे हैं। समग्र शिक्षा विभाग में दर्जन भर किराए की लग्जरी गाड़ियां चल रही हैं और वे भी मंत्री के नाम पर। जबकि विभाग में दो अधिकारियों को ही सरकारी वाहन की पात्रता है।
किराए की गाड़ियों पर मौज :
छत्तीसगढ़ सरकार का वित्त विभाग सरकारी खर्चों में कटौती और वित्तीय अनुशासन लागू करने के लिए लगातार सख्ती बरत रहा है। वहीं समग्र शिक्षा अभियान में वाहन संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वित्त विभाग ने 16 मई 2026 को मितव्ययिता और वित्तीय अनुशासन के लिए निर्देश जारी किए थे।
जो 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी हैं। इन निर्देशों में अनावश्यक खर्चों पर रोक, वाहनों के उपयोग में कमी, वाहन पूलिंग व्यवस्था, ई-ऑफिस को बढ़ावा और विदेश यात्राओं पर प्रतिबंध जैसे कई उपाय शामिल किए गए हैं। इसके बावजूद इन नियमों की ठेंगा दिखाकर समग्र शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में अनावश्यक रुप से किराये के वाहन लगाए गए हैं।
दो को पात्रता,12 वाहन :
जानकारी के अनुसार समग्र शिक्षा में शासकीय वाहन की पात्रता केवल सीमित अधिकारियों को ही प्राप्त है। वित्त विभाग के स्थायी वित्त निर्देश व अन्य प्रावधानों के तहत अखिल भारतीय सेवा के वरिष्ठ अधिकारी, संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी अथवा विशेष अनुमति प्राप्त अधिकारियों को ही वाहन सुविधा प्रदान की जा सकती है। समग्र शिक्षा में वर्तमान व्यवस्था के अनुसार केवल प्रबंध संचालक और वित्त नियंत्रक ही इस श्रेणी में आते हैं। इसके बावजूद विभाग में वर्तमान में 12 किराये के वाहन लगाए गए हैं। इनमें क्रिस्टा, सियाज, टाइगुन, अर्टिगा, वेरना, डिजायर और ग्लैंजा जैसी गाड़ियां शामिल हैं।
मंत्री के नाम फाड़े जा रहे बिल :
बताया जा रहा है कि इन सभी वाहनों का संचालन दो निजी एजेंसियों के माध्यम से किया जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि इन गाड़ियों के किराये के बिल माननीय मंत्री के नाम से जारी किए जा रहे हैं। पात्रता वाले संबंधित अधिकारियों को शासन स्तर पर अलग से शासकीय वाहन उपलब्ध हैं। इतना ही नहीं वाहन किराये की दरों में भी समानता नहीं दिखाई देती और इनके लिए वित्त विभाग से आवश्यक पूर्व स्वीकृति लिए जाने संबंधी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
वित्त विभाग के निर्देशों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में किराये के वाहन लेने की नामंजूरी है। यदि किसी विशेष परिस्थिति में इसकी आवश्यकता हो तो इसके लिए वित्त विभाग की पूर्व अनुमति आवश्यक मानी गई है। ऐसे में केवल दो पात्र अधिकारियों वाले संस्थान में 12 किराये की गाड़ियों का संचालन कई सवाल खड़े कर रहा है।
निष्कर्ष :
मामला केवल वाहन उपयोग तक सीमित नहीं है। वित्त विभाग ने मितव्ययिता के तहत वाहन पूलिंग, ईंधन की बचत, अनावश्यक यात्राओं में कमी, डिजिटल कार्यप्रणाली, ई-ऑफिस के उपयोग और भौतिक बैठकों को सीमित करने जैसे आठ प्रमुख उपायों को लागू करने के निर्देश दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में वाहन नियमित रूप से संचालित किए जा रहे हैं, तो इन निर्देशों की भावना पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
FAQ
- 'समग्र शिक्षा' (Samagra Shiksha) क्या है और यह किस मंत्रालय के अंतर्गत आता है?
उत्तर: समग्र शिक्षा स्कूली शिक्षा के लिए एक एकीकृत (Integrated) केंद्र प्रायोजित योजना है, जो प्री-स्कूल से लेकर बारहवीं कक्षा तक फैली हुई है। यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) के अंतर्गत काम करती है। - सरकारी विभागों में वित्तीय अनुशासन और खर्चों में कटौती के लिए जारी नियमों को प्रशासनिक भाषा में क्या कहा जाता है?
उत्तर: इसे 'मितव्ययिता निर्देश' (Austerity Measures/Directives) कहा जाता है। छत्तीसगढ़ के वित्त विभाग ने हाल ही में 16 मई 2026 को ऐसे निर्देश जारी किए थे। - नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी विभाग में किराये पर वाहन (Luxury Cars) लेने के लिए किस विभाग की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होती है?
उत्तर: राज्य के वित्त विभाग (Finance Department) की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है।
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