तेलंगाना ने बैराज पर छत्तीसगढ़ से मांगी NOC, मुआवजे का दिया भरोसा
समझें क्या है पूरा मामला
- तेलंगाना सरकार ने छत्तीसगढ़ से मांगी मंजूरी
- डूब क्षेत्र के लोगों को पूरा मुआवजा देने का दावा
- गोदावरी नदी पर बने बैराज को लेकर बढ़ी हलचल
- CM विष्णु देव साय से मुलाकात कर रखी मांग
- सिंचाई परियोजना के लिए NOC का इंतजार
तेलंगाना सरकार ने सम्मुक्का सारक्का बैराज परियोजना के लिए छत्तीसगढ़ सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मांगा है। तेलंगाना के सिंचाई, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर इस परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग की मांग की है।
मंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार से बैराज में पूर्ण जलस्तर तक पानी भरने की अनुमति देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि परियोजना से मिलने वाले सिंचाई लाभ को देखते हुए जल्द मंजूरी जरूरी है।
डूब क्षेत्र की जमीन और मकानों का मिलेगा मुआवजा
तेलंगाना सरकार ने भरोसा दिलाया है कि बैराज बनने से छत्तीसगढ़ के जिन इलाकों पर असर पड़ेगा वहां जमीन और मकानों का पूरा मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए मुआवजे की राशि नियमों के अनुसार पहले जमा कराने की तैयारी भी जताई गई है। सरकार का कहना है कि प्रभावित लोगों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। किसी भी परिवार को नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
गोदावरी नदी पर बना है बैराज
सम्मुक्का सारक्का बैराज तेलंगाना के मुलुगु जिले के कन्नाईगुडेम मंडल के तुपाकुलगुडेम में गोदावरी नदी पर बनाया गया है। इसकी लंबाई करीब 1,143 मीटर है। बैराज में 59 रेडियल गेट लगाए गए हैं। इसकी जल भंडारण क्षमता 6.94 टीएमसी बताई गई है। इस परियोजना के जरिए गोदावरी नदी के पानी का उपयोग सिंचाई के लिए करने की योजना है।
लाखों एकड़ जमीन को मिलेगा सिंचाई लाभ
तेलंगाना सरकार के अनुसार इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य श्रीराम सागर प्रोजेक्ट चरण-2 के तहत पानी की कमी झेल रही करीब 4.40 लाख एकड़ जमीन तक सिंचाई सुविधा पहुंचाना है। इसके अलावा रामाप्पा-पखाल लिंक कैनाल से 30 हजार एकड़ नए क्षेत्र को भी सिंचाई सुविधा मिलने की योजना है।
परियोजना से देवाडुला लिफ्ट सिंचाई योजना को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। आसपास के गांवों में पेयजल व्यवस्था सुधारने का भी लक्ष्य रखा गया है।
2009 में मिली थी परियोजना को मंजूरी
इस बैराज परियोजना की शुरुआत पुरानी कांतनपल्ली सुजला स्रवंती योजना से हुई थी। इसे साल 2009 में मंजूरी मिली थी। तेलंगाना गठन के बाद परियोजना में बदलाव कर इसका स्थान तुपाकुलगुडेम किया गया। साल 2017 में प्रशासनिक स्वीकृति मिली और 2020 में इसका नाम बदलकर सम्मुक्का सागर कर दिया गया। अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ से NOC लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
FAQ
- सम्मुक्का सारक्का बैराज के लिए किस राज्य ने NOC मांगी है?
तेलंगाना सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार से बैराज के लिए NOC मांगी है। - बैराज से प्रभावित लोगों को क्या मिलेगा?
तेलंगाना सरकार ने डूब क्षेत्र की जमीन और मकानों का पूरा मुआवजा देने का भरोसा दिया है। - सम्मुक्का सारक्का बैराज परियोजना का उद्देश्य क्या है?
इस परियोजना का उद्देश्य लाखों एकड़ जमीन तक सिंचाई सुविधा पहुंचाना और जल संसाधनों का उपयोग बढ़ाना है।
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