सारंगढ़ भाजपा में घमासान! जिला बैठक में फूटा कार्यकर्ताओं का गुस्सा, प्रभारी मंत्री को बदलने की उठी मांग
उनकी मांग प्रभारी मंत्री और जिला संगठन प्रभारी को बदलने की थी।
समझें क्या है पूरा मामला
- सारंगढ़ जिला भाजपा बैठक में कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आई।
- बैठक में संगठन के फैसलों पर कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई।
- सारंगढ़ नगर मंडल अध्यक्ष को हटाने का फैसला विवाद की वजह बना।
- जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारी की कार्यशैली पर भी सवाल उठे।
- बैठक के बाद प्रभारी मंत्री को बदलने की मांग पर नारेबाजी हुई।
जयप्रकाश बानी को हटाया, क्यों उठे सवाल?
बैठक में जयप्रकाश बानी को हटाए जाने के निर्णय पर आपत्ति जताई गई। नगर मंडल यानी शहर स्तर पर पार्टी की संगठनात्मक इकाई। कार्यकर्ताओं ने इस निर्णय पर खुलकर असंतोष जताया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि संगठन में महत्वपूर्ण फैसले लेते समय संवाद जरूरी है। उनके मुताबिक फैसलों में कार्यकर्ताओं की राय को भी महत्व मिलना चाहिए। सवाल सीधा है। फैसलों में कार्यकर्ताओं की राय की जगह कितनी है?
संवाद की कमी के आरोप क्या हैं?
बैठक में संगठन के भीतर संवाद की कमी के आरोप भी सामने आए। कार्यकर्ताओं की समस्याओं को नजरअंदाज किए जाने की बात भी उठी। ये आरोप बैठक में सामने आए हैं। बैठक में जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए। जिला प्रभारी शंकरलाल अग्रवाल की कार्यशैली पर भी यही हुआ। कार्यशैली यानी काम करने का तरीका।
सवाल इन दोनों पदाधिकारियों के काम करने के तरीके पर थे। नाराजगी संगठनात्मक फैसलों को लेकर थी। बैठक में सवाल दो स्तरों पर उठे। पहला, जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारी की कार्यशैली पर। दूसरा, मंडल स्तर के फैसलों और नियुक्तियों पर।
सत्येंद्र बरगाह से जुड़ा विषय
वरिष्ठ पार्षद सत्येंद्र बरगाह से जुड़े विषय पर माहौल और तनावपूर्ण हो गया। कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की। विषय का ब्योरा अभी सामने नहीं आया है।
बैठक में मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। नियुक्तियों में कथित लेन-देन के आरोप भी लगाए गए। कथित यानी जो अभी साबित नहीं हुआ है।
आरोप अभी पुष्ट नहीं, दोष तय नहीं
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यानी अभी ये सिर्फ आरोप हैं। किसी को दोषी कहना ठीक नहीं होगा। कथित लेन-देन का मतलब पैसे या किसी लाभ के आदान-प्रदान के आरोप से है। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे सिर्फ आरोप की तरह पढ़ना चाहिए।
बैठक के बाद नारेबाजी
अब जरा बैठक के बाद की तस्वीर देखते हैं। बैठक से बाहर निकलने के बाद कुछ कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। मांग थी कि प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा और जिला संगठन प्रभारी को बदला जाए।
इस घटनाक्रम से भाजपा में अंदरूनी खींचतान सार्वजनिक हो गई। सारंगढ़ का यह मामला छत्तीसगढ़ बीजेपी की जिला इकाई से जुड़ा है।
नारेबाजी में किसका नाम आया?
नारेबाजी में प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा को बदलने की मांग उठी। साथ में जिला संगठन प्रभारी को भी बदलने की बात कही गई। यह मांग कुछ कार्यकर्ताओं की ओर से आई। नारेबाजी बैठक के भीतर नहीं, बैठक से बाहर निकलने के बाद हुई। इसी वजह से यह घटनाक्रम सार्वजनिक हो गया।
नगरीय निकाय चुनाव से पहले चुनौती
नगरीय निकाय चुनाव भाजपा के लिए आगे की बड़ी परीक्षा है। नगरीय निकाय यानी नगर पालिका और नगर निगम जैसी शहरी संस्थाएं। इसी चुनाव से पहले यह नाराजगी सामने आई है। नाराजगी को संगठन के लिए चुनौती माना जा रहा है। मंडल स्तर के फैसलों, नियुक्तियों और संवाद पर सवाल उठे हैं। इन सवालों ने पार्टी के अंदरूनी मतभेद उजागर किए हैं।
पूरी घटना को तीन बिंदुओं में देखें। बैठक में नाराजगी जताई गई। आरोप लगाए गए। बैठक के बाद नारेबाजी हुई। कार्यकर्ताओं की चार बातें अब चर्चा में हैं। संवाद, नियुक्तियां, कार्यशैली और बदलाव की मांग। इन चारों बातों पर संगठन के जवाब का इंतजार है।