60 दिन की कम उम्र ने दूल्हे को बनाया नाबालिग, सरकारी गाड़ी में हुई दुल्हन की विदाई
NEWS IN SHORT
- शादी की रस्मों के बीच प्रशासन की अचानक दबिश।
- आधार में बालिग, लेकिन स्कूल रिकॉर्ड में नाबालिग निकला दूल्हा।
- महज 60 दिन की कम उम्र ने शादी को 'शून्य' किया।
- ससुराल से सरकारी गाड़ी में दुल्हन की अनोखी विदाई हुई।
- उम्र पूरी होने पर दोबारा विवाह की कानूनी सलाह दी गई।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं है। डौंडी विकासखंड के ग्राम पंचायत भर्रीटोला 43 में खुशियों का माहौल था।
शहनाइयां बज चुकी थीं और नई दुल्हन ससुराल की दहलीज पार कर चुकी थी। घर में 'धरम टीकावन' की रस्म की तैयारी चल रही थी कि तभी अचानक प्रशासन की "एंट्री" हुई और देखते ही देखते शादी का उल्लास सन्नाटे में बदल गया।
स्कूल रजिस्टर ने खोला राज
इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ दूल्हे की उम्र का वह 'लोचा' है, जिसने प्रशासन को गांव तक दौड़ने पर मजबूर कर दिया। दरअसल, दूल्हे के आधार कार्ड के अनुसार उसकी जन्मतिथि 13 जून 2002 दर्ज थी, जिसके मुताबिक वह शादी के लिए पूरी तरह बालिग था। लेकिन, प्रशासन के पास पहुंची शिकायत में स्कूल के दाखिल-खारिज (एडमिशन) रजिस्टर का हवाला दिया गया, जहाँ उसकी जन्मतिथि 13 जून 2005 दर्ज थी।
कानून की तराजू पर जब दोनों दस्तावेजों को तौला गया, तो स्कूल रजिस्टर भारी पड़ा। इसके अनुसार दूल्हे की उम्र 21 साल होने में महज 2 महीने कम रह गई थी। बस, इसी 60 दिन के फासले ने कानूनन इस दूल्हे को 'नाबालिग' करार दे दिया।
प्रशासन की समझाइश और 'शून्य' हुआ विवाह
महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम जब पुलिस बल के साथ भर्रीटोला पहुँची, तो परिजन हैरान रह गए। जिला अधिकारी समीर और देवेंद्र नेताम ने परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 की बारीकियां समझाईं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि दूल्हा अभी 21 वर्ष का नहीं हुआ है, इसलिए यह विवाह कानूनी रूप से अवैध यानी 'शून्य' माना जाएगा। शुरुआती हिचकिचाहट के बाद दूल्हे के पिता और परिजनों ने कानून का सम्मान करना बेहतर समझा। वे इस बात पर सहमत हो गए कि दुल्हन को वापस उसके मायके भेज दिया जाए।
विदाई का अनोखा मंजर
आमतौर पर दुल्हन की विदाई डोली या फूलों से सजी कार में होती है, लेकिन यहाँ नजारा अलग था। प्रशासन की मौजूदगी में एक घोषणा पत्र तैयार किया गया, जिस पर दूल्हा-दुल्हन और अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए।
इसके बाद, नई नवेली दुल्हन को महिला बाल विकास विभाग के सरकारी वाहन में पुलिस अभिरक्षा के बीच वापस राजनांदगांव जिले के साल्हेटोला (मायके) भेजा गया।
जांच के घेरे में 'आधार' का खेल
इस मामले ने एक गंभीर सवाल भी खड़ा कर दिया है। दूल्हे के आधार कार्ड में जन्मतिथि वर्ष 2025 में अपडेट कराई गई थी, जिसमें उसे बालिग दिखाया गया। अब प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर किस आधार पर स्कूल रिकॉर्ड को दरकिनार कर आधार कार्ड में उम्र बदली गई।
दो महीने बाद फिर बजेंगी शहनाइयां
भले ही अभी यह शादी टूट गई हो, लेकिन प्रेम और कानून के बीच एक बीच का रास्ता निकाला गया है। प्रशासन ने परिवार को सलाह दी है कि जैसे ही 2 महीने बाद युवक अपनी कानूनी उम्र (21 वर्ष) पूरी कर लेगा, वे दोबारा रीति-रिवाज से विवाह कर उसका विधिवत पंजीकरण करा सकते हैं।
फिलहाल, पूरे बालोद जिले में इस "दो महीने की दूल्हा-दुल्हन" वाली कहानी की खूब चर्चा हो रही है। ग्रामीणों के लिए यह एक बड़ा सबक है कि शादी के जश्न में कागजों की मजबूती भी उतनी ही जरूरी है जितनी कि रिश्तों की।
निष्कर्ष
बालोद का यह मामला सबक है कि कानून के आगे चालाकी नहीं चलती। आधार में उम्र बदलवाकर शादी तो कर ली गई, लेकिन स्कूल रिकॉर्ड ने पोल खोल दी। महज 2 महीने की कम उम्र ने कानूनी रूप से विवाह को 'शून्य' कर दिया, जिससे खुशियां सन्नाटे में बदल गईं और दुल्हन को सरकारी गाड़ी में वापस जाना पड़ा।
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