छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर बदलवाने के लिए कांग्रेस भरवा रही फॉर्म, घर-घर पहुंच रहे नेता
RAIPUR : छत्तीसगढ़ में लोग बिजली के बढ़े हुए बिल से परेशान हैं। जब से स्मार्ट मीटर लगा है तब से बिजली के बिल चार से पांच गुना ज्यादा आ रहा है। कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर के खिलाफ नया अभियान छेड़ दिया है। कांग्रेस नेता लोगों से एक फॉर्म भरवा रहे है। इस फॉर्म में लिखा है कि वे स्मार्ट मीटर बदलना चाहते हैं। इस फॉर्म को लेकर कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता घर घर पहुंच रहे हैं। इन फॉर्म को भरवाकर बिजली विभाग में जमा किया जाएगा और मीटर बदलने का दबाव बनाया जाएगा। स्मार्ट मीटर बदलने के लिए लोग भी सामने आ रहे हैं।
वसूली का नया तरीका :
बिजली विभाग ने स्मार्ट मीटर के नाम पर कमाई का स्मार्ट तरीका निकाल लिया है। नए नियमों के मुताबिक यदि आपका बिल बढ़ा हुआ आया है और उसकी जांच करानी है तो इसके लिए फीस देनी होगी। अब लोग इस बात से परेशान हैं कि एक तो बिजली का बिल ज्यादा आ रहा है और दूसरी तरफ उसे कम कराने जाओ तो फीस लगने लगी है। सरकार स्मार्ट बनकर लोगों की जेब से कमाई निकाल रही है। बिजली विभाग के नियमों के अनुसार सिंगल फेज स्मार्ट मीटर की जांच के लिए 500 रूपए और थ्री फेज मीटर की जांच के लिए 1000 रूपए जमा करना अनिवार्य है।
यानी यदि किसी उपभोक्ता को अपने बिजली बिल पर संदेह है और वह मीटर की सटीकता की जांच कराना चाहता है, तो उसे पहले अपनी जेब से राशि खर्च करनी होगी। जांच के बाद ही यह तय होगा कि शिकायत सही थी या नहीं। प्रदेश में लगभग 60 लाख बिजली उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार अब तक करीब 40 लाख मीटर बदले जा चुके हैं। इस परियोजना का काम टाटा और जीनस जैसी कंपनियों को सौंपा गया है। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।
स्मार्ट मीटर से बढ़ा बिल :
मीटर लगने के बाद बिल बढ़ने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर कई उपभोक्ता अपने पुराने और नए बिल की तुलना साझा कर रहे हैं। मोहल्लों और बाजारों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा हो रही है। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि स्मार्ट मीटर के नाम पर आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि उन्हें बिजली बिल पर आपत्ति है तो जांच का खर्च भी उनसे ही क्यों लिया जा रहा है।
उनका कहना है कि जब मीटर सरकार और बिजली विभाग की ओर से लगाए जा रहे हैं, तो शिकायत मिलने पर उसकी जांच निशुल्क होनी चाहिए। कई लोगों का तर्क है कि यदि विभाग को मीटर की सटीकता पर पूरा भरोसा है, तो उपभोक्ता से शुल्क लेने की जरूरत ही नहीं होनी चाहिए।आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए 500 या 1000 रुपये अतिरिक्त खर्च करना आसान नहीं है। ऐसे में वे बिल अधिक आने की शिकायत होने के बावजूद जांच नहीं करा पाते।
बिजली विभाग का स्मार्ट तर्क :
बिजली विभाग का कहना है कि यदि जांच में मीटर दोषपूर्ण पाया जाता है, तो उपभोक्ता के बिल का पुनर्मूल्यांकन किया जाता है। मीटर लगने की अवधि के आधार पर अधिक वसूली गई राशि का समायोजन या संशोधन करने का प्रावधान भी नियमों में मौजूद है। यानी शिकायत सही साबित होने पर उपभोक्ता को राहत मिल सकती है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं का कहना है कि जांच शुल्क की अनिवार्यता व्यवस्था को जटिल बना रही है। उनका सवाल है कि जो व्यक्ति जांच शुल्क जमा करने में सक्षम नहीं है, वह अपनी शिकायत कैसे साबित करेगा।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर जांच की फीस कितनी है?
उत्तर: सिंगल फेज स्मार्ट मीटर की जांच के लिए 500 रुपये की फीस तय की गई है। वहीं थ्री फेज मीटर की जांच के लिए 1000 रुपये जमा करना अनिवार्य है। जांच में मीटर खराब पाए जाने पर बिल का समायोजन किया जाता है। - स्मार्ट मीटर के खिलाफ कांग्रेस कौन सा अभियान चला रही है?
उत्तर: कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर उपभोक्ताओं से आवेदन फॉर्म भरवा रहे हैं। इन फॉर्मों के जरिए पुराने मीटर वापस लगाने और स्मार्ट मीटर बदलने की मांग की जा रही है। इन्हें बिजली विभाग में जमा कराया जाएगा। - छत्तीसगढ़ में कितने स्मार्ट मीटर लगाए जाने का लक्ष्य है?
उत्तर: राज्य में लगभग 60 लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है। इनमें से अब तक करीब 40 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
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