SRS रिपोर्ट: एमपी, सीजी में एक महीने भी जीवित नहीं रहते 1 हजार में 26 बच्चे, राजस्थान तीसरे नंबर पर
Raipur. मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के लिए एसआरएस की रिपोर्ट बेहद शर्मनाक मानी जा सकती है। विकास के नए नए दावे कर प्रदेश की शक्ल बदलने और सुशासन का दावा करने वाली ये सरकारें अपने बच्चों ही नहीं बचा पा रही हैं। एसआरएस की रिपोर्ट इनके विकास और गुड गवर्नेंस के मॉडल को मुंह चिढ़ा रही है।
हाल ही में आई सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम यानी एसआरएस की रिपोर्ट ने इन सरकारों के दावों की पोल खोल दी है। यह साल 2024 के आंकड़े हैं। इस रिपोर्ट में नवजात बच्चों की मौत के आंकड़े दिए गए। इस सूची में पूरे देश में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ अव्वल हैं। यहां के एक हजार में से 26 बच्चे अपने जन्म की तारीख तक नहीं पहुंच पाते। यानी इनके मौत,जन्म के 28 दिनों में हो जाती है। इस लिस्ट में राजस्थान तीसरे नंबर है। यह तीनों राज्यों का औसत राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है।
जन्म के 28 दिनों में थम रहीं सांसें :
एसआरएस की ये रिपोर्ट बताती है कि मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सरकारें अपने नवजात बच्चों को नहीं बचा पा रही हैं। यहां तक कि इन राज्यों में नवजातों की मौत का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है। पूरे देश में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ टॉप पर हैं। वहीं राजस्थान तीसरे नंबर पर है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में एक हजार जन्म लेते हैं तो उनमें से 26 बच्चे 28 दिन भी जीवित नहीं रहते।
यानी इन बच्चों की मौत जन्म के एक महीने के अंदर हो जाती है। राजस्थान में यह आंकड़ा 21 बच्चों का है। यह औसत जन्म लेने वाले एक हजार बच्चों पर निकाला जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर 18 बच्चे अपने जन्म के बाद के 28 दिन नहीं देख पाते। गांवों में यह आंकड़ा शहरों की तुलना में बहुत ज्यादा है। यानी गांव में अभी भी स्वास्थ्य सेवाओं की सांसें उखड़ रही हैं।
जन्म के 7 दिनों में मौत :
जन्म के 7 दिनों में मौत होने वाले बच्चों की सूची में भी इन तीनों राज्यों की हालत बेहद खराब है। इस सूची में छत्तीसगढ़ पहले नंबर पर है, मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर और राजस्थान तीसरे नंबर पर है। यह आंकड़ा भी प्रति एक हजार बच्चों के जन्म पर निकाला जाता है। छत्तीसगढ़ में एक हजार में 19 बच्चे जन्म लेकर पहले सात दिनों में ही मौत का शिकार हो जाते हैं। मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 18 बच्चों का है। राजस्थान 15 बच्चों के साथ तीसरे स्थान पर है। यहां पर ही राष्ट्रीय औसत इन तीनों राज्यों से कहीं बेहतर है। राष्ट्रीय औसत के हिसाब से एक हजार में से 13 बच्चे अपने जन्म के 7 दिन भी नहीं देख पाते।
कोख में मौत :
कोख में मौत के मामले में भी छत्तीसगढ़ पहले नंबर पर है। यहां पर मध्य प्रदेश चौथे और राजस्थान पांचवें नंबर पर है। यानी पहले 7 दिन तो छोड़िए, बच्चे कोख में ही मौत का शिकार हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ में एक हजार जन्मों में 31 बच्चों की मौत कोख में ही हो जाती है। मध्यप्रदेश में 24 बच्चे मृत पैदा होते हैं जबकि राजस्थान में यह संख्या 21 है। इस मामले में राष्ट्रीय औसत 20 है। इस सूची में उत्तर प्रदेश और ओडिशा दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं।
नवजातों की गुनहगार सरकार :
जानकार कहते हैं कि इन नवजातों की मौत की गुनहगार सीधे तौर पर सरकार है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे जरुर किए जाते हैं लेकिन गांवों में आज भी स्वास्थ्य सुविधाएं वेंटीलेटर पर हैं। बच्चों की मौत का सबसे ज्यादा आंकड़ा गांवों से निकल कर आता है। यानी गांव में अभी भी प्रसव संस्थागत नहीं हो पा रहा है। सरकार अस्पताल में डिलेवरी की कई योजनाएं चला रही है लेकिन यह योजनाएं जमीन पर कम और कागजों पर ज्यादा चल रही हैं। यह आंकड़ा सरकार के सुशासन को मुंह चिढ़ा रहा है।
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