SRS रिपोर्ट: बच्चों और किशोरों वाले प्रदेश हैं एमपी, सीजी और राजस्थान, युवाओं की आबादी में पीछे हैं ये राज्य
Important Points :
- टीनएजर राज्य हैं एमपी,छत्तीसगढ़,राजस्थान
- एसआरएस की ताजा रिपोर्ट में आई जानकारी
- 0-14 वर्ष की उम्र वालों की आबादी सबसे ज्यादा
- 15-59 वर्ष की आयु वाले इन राज्यों सबसे कम
News in Detail :
Raipur. विकास की दौड़ में भले ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान पीछे हों, लेकिन एक बात यहां पर अच्छी है। ये तीनों प्रदेश देश के टीएजर स्टेट हैं। एसआरएस की ताजा रिपोर्ट बताती है कि यहां पर बच्चों और किशोरों की यानी 0-14 साल की उम्र वाली आबादी बाकी प्रदेशों में सबसे ज्यादा है। यानी आने वाले समय में यह देश के युवा प्रदेश बनेंगे। वर्तमान में युवाओं की जनसंख्या में यह प्रदेश पीछे है। कामकाजी लोगों जिनकी उम्र 15 से 59 साल है, उनमें यह तीनों राज्य नीचे की गिनती में आते हैं।
यंग स्टेट बनने को तैयार :
विकास के कई पैमानों पर भले ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान अभी अग्रणी राज्यों में शामिल न हों, लेकिन जनसंख्या संरचना के लिहाज से ये राज्य देश के सबसे युवा भविष्य वाले प्रदेश बनकर उभर रहे हैं। भारत के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 0-14 वर्ष आयु वर्ग की आबादी इन राज्यों में देश के बड़े राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है।
रिपोर्ट बताती है कि बच्चों और किशोरों की आबादी के मामले में बिहार सबसे आगे है, लेकिन उसके बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ का स्थान आता है। 0-14 वर्ष आयु वर्ग की आबादी मध्यप्रदेश में 27.4 फीसदी, जबकि राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 27.3 फीसदी दर्ज की गई है। छत्तीसगढ़ में थोड़ी कम 26.3 फीसदी आबादी भी इस श्रेणी के राज्यों में शामिल है।
इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में इन राज्यों में युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ेगी और ये प्रदेश यंग स्टेट्स के रूप में उभर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी राज्य में बच्चों और किशोरों की अधिक आबादी भविष्य की कार्यशील जनसंख्या का संकेत मानी जाती है। यदि इन राज्यों में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर पर्याप्त निवेश किया जाए तो आने वाले दशक में यही आबादी आर्थिक ताकत बन सकती है।
युवा आबादी में पीछे ये राज्य :
हालांकि वर्तमान स्थिति अलग तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के अनुसार 15-59 वर्ष आयु वर्ग यानी कामकाजी आबादी के मामले में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ अभी पीछे हैं। देश में कार्यशील आयु वर्ग की राष्ट्रीय औसत आबादी 66.4 फीसदी है। जबकि राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से कम है।
यह राज्य निचले पायदानों पर नजर आते हैं। यह आबादी मध्य प्रदेश में 65.1 फीसदी और राजस्थान में 63.7 फीसदी है। छत्तीसगढ़ में स्थिति थोड़ी बेहतर है। छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 65.6 फीसदी है। बिहार में तो यह प्रतिशत सबसे कम 60.7 फीसदी दर्ज किया गया है। दिल्ली,तेलंगाना और आंध्र प्रदेश इस सूची में टॉप पर हैं।
बुजुर्ग आबादी इतनी :
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है। केरल में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी 15.1 फीसदी है, जो देश में सबसे ज्यादा है। तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश भी इस सूची में ऊपर हैं। इसके विपरीत, असम, झारखंड, बिहार और दिल्ली में बुजुर्ग आबादी का प्रतिशत सबसे कम है। यह आंकड़ा मध्य प्रदेश में 8.5 फीसदी, राजस्थान में 9 फीसदी और छत्तीसगढ़ में 8.1 फीसदी है।
निष्कर्ष :
राज्यों के सामने चुनौती :
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ अभी टीनएजर राज्य हैं जो आने वाले समय में यंग स्टेट बनेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आने वाले वर्षों में इस युवा आबादी को रोजगार और कौशल से जोड़ने की होगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यही जनसंख्या दबाव सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों को भी बढ़ा सकता है।
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