सौतेली बेटी से दुष्कर्म : कलयुगी पिता को मिली उम्रकैद की सजा

Aishwarya Dwivedi | Jun 24, 2026, 11:22 IST
सौतेले पिता को बलात्कार के मामले में उम्रकैद
बिलासपुर में सौतेली बेटी को गर्भवती करने वाले कलयुगी पिता को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आखिरी सांस तक जेल की सजा सुनाई है। मितानिन की सतर्कता और डीएनए टेस्ट से जुर्म साबित हुआ।

समझें क्या है पूरा मामला

बिलासपुर में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक कलयुगी पिता ने अपनी ही सौतेली बेटी को हवस का शिकार बनाया। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी को सख्त सजा सुनाई है। अब आरोपी को अपनी आखिरी सांस तक जेल में रहना होगा। मितानिन की सतर्कता और डीएनए रिपोर्ट से इस पूरे जुर्म का खुलासा हुआ।



दुष्कर्म करने वाले आरोपी को मिली सजा

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक झकझोर देने वाली खबर आई है। यहां की एक विशेष अदालत ने बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने अपनी ही नाबालिग सौतेली बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को सजा दी है। इस कलयुगी पिता को अब मरते दम तक जेल की सलाखों के पीछे रहना होगा।



यह फैसला बिलासपुर जिला न्यायालय में स्थित विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश पूजा जायसवाल की अदालत ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने आरोपी के कृत्य पर बहुत सख्त और तल्ख टिप्पणी भी की है। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ एक अपराध नहीं है। यह एक मासूम बच्ची के विश्वास और संरक्षण के अधिकार का घोर उल्लंघन है।



कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना

अदालत ने आरोपी को कठोर सजा देने के साथ ही आर्थिक दंड भी तय किया है। कोर्ट ने पीड़ित बच्ची को 7 लाख रुपए का मुआवजा देने की अनुशंसा की है। यह राशि पीड़िता के पुनर्वास और उसके भविष्य के लिए काम आएगी। इस मामले में पुलिस की विवेचना को भी कोर्ट ने बहुत महत्वपूर्ण माना है।



कोरोना काल में बदला परिवार का जीवन

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के सामने मामले की पूरी कहानी रखी। पीड़ित बच्ची की मां की पहली शादी बहुत अच्छे से चल रही थी। लेकिन कोरोना काल के दौरान उसका पहला पति उसे हमेशा के लिए छोड़कर चला गया। इसके बाद महिला पूरी तरह अकेली हो गई थी।



महिला ने अपने और बच्ची के सहारे के लिए एक दूसरा रास्ता चुना। उसने आरोपी व्यक्ति के साथ पारंपरिक 'चूड़ी विवाह' कर लिया। इसके बाद दोनों पति-पत्नी की तरह एक साथ रहने लगे। कुछ समय बाद आरोपी अपनी आजीविका चलाने के लिए बाहर जाने का फैसला करता है।



मुंबई की इमारत में सुरक्षा गार्ड की नौकरी

आरोपी अपनी पत्नी और उसकी 11 वर्षीय मासूम बेटी को लेकर मुंबई चला गया। वहां वह एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत में सुरक्षा गार्ड का काम करने लगा। इसी दौरान उसने अपनी ही सौतेली बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाना शुरू कर दिया। डरी-सहमी बच्ची किसी से कुछ कह नहीं पाई।



मितानिन की सूझबूझ से खुला राज

बीते साल दिसंबर के महीने में यह पूरा परिवार मुंबई से वापस रतनपुर लौटा। छत्तीसगढ़ सरकार के आयुष्मान सर्वे का काम चल रहा था। तभी स्थानीय मितानिन स्मृति गोपाल की नजर उस मासूम बच्ची पर पड़ी। मितानिन को बच्ची का पेट असामान्य रूप से फूला हुआ दिखाई दिया।



मितानिन को तुरंत किसी अनहोनी का संदेह हुआ। उन्होंने बिना देरी किए इस बात की जानकारी बच्ची की मां को दी। मितानिन ने मां को सलाह दी कि वह बच्ची को तुरंत अस्पताल लेकर जाए। इसके बाद मां अपनी बेटी को जांच के लिए सिम्स (SIMS) अस्पताल लेकर पहुंची।



सोनोग्राफी रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्ची की सोनोग्राफी जांच की। इस जांच की रिपोर्ट आते ही सबके होश उड़ गए। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वह 11 साल की मासूम बच्ची 8 महीने की गर्भवती थी। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया।



इसके बाद 16 जुलाई 2024 को रतनपुर थाने में मामले की लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर मामले की बारीकी से जांच शुरू कर दी। शुरुआत में बच्ची की मां को कुछ स्थानीय नशेड़ी युवकों पर शक था।



पुलिस अधिकारी को हुआ सौतेले पिता पर शक

मामले की जांच तत्कालीन रतनपुर थाना प्रभारी रजनीश सिंह कर रहे थे। उन्हें मां के शक पर थोड़ा संदेह हुआ। पुलिस अधिकारी को लगा कि असली गुनहगार घर के अंदर ही छिपा है। उनका शक सीधे सौतेले पिता पर जाकर टिका।



सच्चाई को सामने लाने के लिए पुलिस ने एक ठोस वैज्ञानिक तरीका अपनाया। पुलिस ने नवजात शिशु और आरोपी पिता के रक्त के नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को जांच के लिए रायपुर स्थित राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया।



TIMELINE

  • कोरोना काल (प्रारंभिक बिंदु): पीड़िता के पिता की मृत्यु ➔ मां ने आरोपी के साथ 'चूड़ी विवाह' किया।
  • पलायन (मुंबई): आरोपी परिवार को मुंबई ले गया➔ सुरक्षा गार्ड की नौकरी के दौरान सौतेली बेटी से दुष्कर्म शुरू।
  • दिसंबर (वापसी): परिवार छत्तीसगढ़ के रतनपुर लौटा।
  • आयुष्मान सर्वे: मितानिन स्मृति गोपाल को बच्ची पर संदेह हुआ ➔ मां को अस्पताल जाने की सलाह दी।
  • सिम्स (SIMS) अस्पताल: सोनोग्राफी में खुलासा हुआ कि 11 वर्षीय बच्ची 8 महीने की गर्भवती है।
  • 16 जुलाई 2024: रतनपुर थाने में FIR दर्ज ➔ थाना प्रभारी रजनीश सिंह ने सौतेले पिता को हिरासत में लिया।
  • वैज्ञानिक जांच: नवजात और आरोपी का डीएनए (DNA) टेस्ट हुआ ➔ रायपुर फॉरेंसिक लैब से जुर्म साबित।
  • अदालत का फैसला: विशेष पॉक्सो कोर्ट (न्यायाधीश पूजा जायसवाल) द्वारा आरोपी को मरते दम तक जेल और 7 लाख रुपए मुआवजे की सजा।

FAQ

  1. पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) का पूरा नाम क्या है और यह कब लागू हुआ था?
    उत्तर: POCSO का पूरा नाम "Protection of Children from Sexual Offences Act" (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) है। यह कानून भारत में 14 नवंबर 2012 को लागू किया गया था।
  2. पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत 'बच्चे' या 'नाबालिग' की उम्र क्या तय की गई है?
    उत्तर: इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति (लड़का या लड़की) को बच्चा/नाबालिग माना जाता है।
  3. छत्तीसगढ़ में 'मितानिन' (Mitanin) किन्हें कहा जाता है और स्वास्थ्य प्रणाली में इनका क्या स्थान है?
    उत्तर: छत्तीसगढ़ में ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर काम करने वाली महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को 'मितानिन' कहा जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर इन्हें ही आशा (ASHA - Accredited Social Health Activist) कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है।

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