सरकारी फाइलों में कैद रहा नसबंदी अभियान, सड़कों पर मासूमों को नोंच रहे आवारा कुत्ते
NEWS IN SHORT
- बालोद में आवारा कुत्ते का हमला।
- 4 साल का बच्चा गंभीर रूप से घायल।
- कुत्ते ने 17 स्थानों पर काटा।
- ग्रामीणों ने कुत्ते को पकड़ा।
- पीड़ित बच्चे का इलाज रायपुर में जारी।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से आई एक घटना ने स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के ग्राम चिल्हाटीखुर्द में एक 4 वर्षीय मासूम नादित्य पाथरे पर आवारा कुत्ते के जानलेवा हमला कर दिया। जिससे सरकारी तंत्र की उस लापरवाही को भी उजागर किया है जिसे ग्रामीण लंबे समय से झेल रहे हैं।
कागजों पर नसबंदी, सड़कों पर दहशत
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या पिछले कुछ महीनों में अनियंत्रित तरीके से बढ़ी है। शासन द्वारा कुत्तों की नसबंदी और उनके प्रबंधन के लिए बजट तो जारी किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत चिल्हाटीखुर्द की गलियों में लहूलुहान पड़े मासूम के रूप में सामने आई है। सवाल यह उठता है कि आखिर पशु चिकित्सा विभाग और स्थानीय प्रशासन आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को रोकने में विफल क्यों रहा?
चेतावनी को नजरअंदाज करने का नतीजा
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने कई बार प्रशासन को आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरों से अवगत कराया था। चिल्हाटीखुर्द में जिस कुत्ते ने नादित्य को अपना शिकार बनाया, उसने उसी दिन दो अन्य ग्रामीणों (हुमन चंदेल और एक अन्य) तथा चार मवेशियों को भी अपना निशाना बनाया। यदि प्रशासन ने पहले ही शिकायतों पर संज्ञान लेकर कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया होता, तो आज एक मासूम अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच नहीं झूल रहा होता।
प्रशासनिक विफलता के 3 बड़े सवाल
एबीसी (Animal Birth Control) प्रोग्राम कहां है? आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए चलाई जाने वाली योजनाएं बालोद जिले में केवल फाइलों तक ही सीमित क्यों हैं?
ग्रामीण सुरक्षा की अनदेखी: क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा था? ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है?
निगरानी का अभाव: आक्रामक हो चुके कुत्तों को समय रहते चिन्हित कर उन्हें आबादी से दूर करने के लिए कोई हेल्पलाइन या टीम सक्रिय क्यों नहीं है?
आक्रोश में ग्रामीण, ठोस कार्रवाई की मांग
घटना के बाद से गांव में जबरदस्त आक्रोश है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर उस कुत्ते को तो पकड़ लिया, लेकिन उनका कहना है कि यह समस्या केवल एक कुत्ते की नहीं बल्कि पूरे तंत्र की है। लोगों ने दो टूक शब्दों में प्रशासन से मांग की है कि:
तत्काल पूरे ब्लॉक में आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान शुरू किया जाए। पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता और इलाज का पूरा खर्च दिया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा नीति बनाई जाए।
निष्कर्ष
4 साल के नादित्य के शरीर पर आए 17 गहरे जख्म केवल कुत्ते के दांतों के निशान नहीं हैं, बल्कि यह उस सरकारी सिस्टम की नाकामी के निशान हैं जो आम नागरिकों को उनके घर के सामने भी सुरक्षा देने में असमर्थ साबित हो रहा है। अब देखना यह होगा कि इस बड़ी घटना के बाद प्रशासन जागता है या फिर किसी और मासूम के शिकार होने का इंतजार करता है।
यह खबरें भी पढ़ें...
सिद्धि और स्नेह वेलफेयर का खेल: 1639 रुपए प्रति कुत्ता नसबंदी, रायपुर में 50 हजार कुत्ते
गाय और कुत्ते पर तीखी बहस: एमपी विधानसभा में BJP–Congress आमने-सामने, धर्म और सुरक्षा पर सियासत
जयपुर एयरपोर्ट पर कुत्ते ने महिला पैसेंजर को बनाया शिकार, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल