60 साल, एक कॉलेज और अधूरा विकास ; छात्रों ने उठाई मेडिकल व कृषि महाविद्यालय की मांग
NEWS IN SHORT
- राजिम में दशकों से केवल एक ही सरकारी कॉलेज संचालित है।
- स्थानीय छात्र और पालक मेडिकल कॉलेज खोलने पर अड़े।
- संसाधनों की कमी से मेधावी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित।
- बड़ा राजनीतिक केंद्र होने के बावजूद शिक्षा क्षेत्र में पिछड़ापन।
- नागरिकों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से की त्वरित कार्रवाई।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की प्रयाग नगरी के रूप में विख्यात राजिम, जो अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत के लिए वैश्विक मानचित्र पर अंकित है, आज अपनी एक बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष कर रही है। वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहे राजिम के युवाओं और पालकों ने अब सुर में सुर मिलाकर एक ही मांग बुलंद की है— "राजिम में मेडिकल कॉलेज की स्थापना हो।"
दशकों से ठहरा हुआ है शिक्षा का पहिया
क्षेत्र के युवाओं का दर्द अब आक्रोश में बदल रहा है। छात्र चेमन, दुष्यंत, भारती, चित्रलेखा और नवीन जैसे सैकड़ों मेधावी छात्रों का कहना है कि पिछले 60 वर्षों से राजिम में केवल एक ही शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय संचालित है। विडंबना देखिए कि राजिम तहसील से अनुविभागीय कार्यालय (SDM Office) बन गया,
यहाँ का पुन्नी मेला अब 'राजिम कुंभ कल्प' के रूप में भव्य स्वरूप ले चुका है, लेकिन शिक्षा के बुनियादी ढांचे में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। यहाँ न तो मेडिकल कॉलेज है, न कृषि महाविद्यालय और न ही नर्सिंग शिक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम। छात्रों का आरोप है कि संसाधनों के इसी अभाव के कारण क्षेत्र की प्रतिभाएं समय से पहले दम तोड़ रही हैं।
आर्थिक तंगी और प्रतिभाओं का पलायन
क्षेत्र के अभिभावकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि 12वीं की परीक्षा में उनके बच्चे उत्कृष्ट अंक तो ले आते हैं, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए महानगरों का रुख करना उनके बजट से बाहर है। बाहर रहकर पढ़ाई करने का भारी खर्च मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों की कमर तोड़ देता है।
"यदि राजिम में मेडिकल कॉलेज और अन्य तकनीकी संस्थान खुलते हैं, तो किसान और मजदूर का बच्चा भी डॉक्टर-इंजीनियर बनकर देश की सेवा कर सकेगा। अभी तो गरीबी हमारे बच्चों के सपनों के आड़े आ रही है।" — एक स्थानीय पालक
सियासी रसूख भारी, फिर भी बदहाली जारी
राजिम का राजनीतिक इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। यहाँ के जनप्रतिनिधियों ने अविभाजित मध्य प्रदेश में तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद भी यहाँ के विधायक कैबिनेट मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। इसके बावजूद, शिक्षा के क्षेत्र में कोई 'क्रांतिकारी परिवर्तन' न होना क्षेत्र की जनता के लिए एक अनुत्तरित प्रश्न बना हुआ है। अब नागरिकों की उम्मीदें मोदी और साय सरकार पर टिकी हैं।
आंदोलन की तैयारी में जन प्रतिनिधि और संगठन
इस मांग को लेकर अब जन प्रतिनिधियों ने भी मोर्चा खोल दिया है:
- इंद्रजीत महाडिक (जिला पंचायत सदस्य): इनका कहना है कि गरियाबंद जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए मेडिकल कॉलेज की नितांत आवश्यकता है।
- रिकेश साहू (भाजपा मंडल अध्यक्ष): राजिम को जिले का प्रवेश द्वार बताते हुए उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मुलाकात कर इस मांग को पुरजोर तरीके से रखेंगे।
- अशोक मिश्रा (अध्यक्ष, राजिम विकास मंच): उन्होंने घोषणा की है कि शिक्षा मंत्री को इस संबंध में ज्ञापन सौंपकर जल्द ही ठोस कार्रवाई की मांग की जाएगी।
निष्कर्ष
राजिम केवल मंदिरों का शहर बनकर नहीं रहना चाहता, वह ज्ञान का केंद्र भी बनना चाहता है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस पौराणिक नगरी की आधुनिक जरूरतों को समझते हुए यहाँ 'मेडिकल कॉलेज' की सौगात देती है या मेधावी छात्रों का भविष्य फाइलों में ही दबा रहेगा।
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