छत्तीसगढ़ सरकार को सुप्रीम फटकार; कोर्ट के आदेश को हल्के में लेना पड़ा भारी, कारण बताओ नोटिस जारी
NEWS IN SHORT
- सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस को लगाई फटकार
- कोरबा एसपी को नोटिस, अदालत के आदेश का उल्लंघन किया
- सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की अनुपस्थिति पर जताई नाराजगी
- राज्य सरकार पर आरोप, कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया
- कोरबा एसपी को 24 अप्रैल को अदालत में पेश होने का आदेश
NEWS IN DETAIL
New Delhi: Supreme Court ने एक आपराधिक मामले में बरी किए गए व्यक्ति को अदालत में पेश न करने के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार और पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इसे स्पष्ट और जानबूझकर उल्लंघन करार दिया और कोरबा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को (Show cause notice)कारण बताओ नोटिस जारी किया।
मामला क्या था?
यह मामला एक विशेष अनुमति याचिका से जुड़ा है, जिसमें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरोपी को बलात्कार और एससी/एसटी अधिनियम के तहत दर्ज मामले में बरी कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह प्रतिवादी संख्या-2 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश करे।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को क्या निर्देश दिए थे?
पहली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से 15 अप्रैल 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा था।
लेकिन 15 अप्रैल को सबरीमाला संदर्भ मामले की सुनवाई के कारण संबंधित पीठ उपलब्ध नहीं हो पाई और मामले की सुनवाई टल गई। फिर भी, राज्य ने 20 अप्रैल को प्रतिवादी की अनुपस्थिति के बारे में कोर्ट को गलत जानकारी दी।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस पर नाराजगी जताई
जब 20 अप्रैल को मामला सुनवाई के लिए आया, तो कोर्ट को बताया गया कि आरोपी अदालत में मौजूद नहीं था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य
के रवैये पर नाराजगी जताई और कहा कि 20 अप्रैल के लिए दिए गए निर्देश के बावजूद राज्य ने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया।
कोरबा एसपी को सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने (korba)कोरबा एसपी को तलब करते हुए उनसे यह पूछा कि अदालत के आदेश की अवहेलना क्यों की गई। कोर्ट ने एसपी से यह भी कहा
कि वह 24 अप्रैल 2026 को सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हों और आरोपी की उपस्थिति भी सुनिश्चित करें।
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