CGPSC 2021 : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बेदाग अभ्यर्थियों को मिलेगी नियुक्ति
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की 2021 परीक्षा में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। बिलासपुर हाईकोर्ट ने बेदाग अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अब सरकार की इस याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इससे सीबीआई जांच के दायरे से बाहर के अभ्यर्थियों की नौकरी का रास्ता साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC – Chhattisgarh Public Service Commission) के अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर आई है। देश की सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया है।
यह याचिका बिलासपुर हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया था। यह निर्देश उन लोगों के लिए था जिनका नाम जांच के दायरे में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सैकड़ों युवाओं को राहत मिली है।
जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच का रुख
इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की विशेष डिवीजन बेंच ने की। इस बेंच में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता शामिल थे। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया।
डिवीजन बेंच ने कहा कि वह हाई कोर्ट के फैसले में दखल नहीं देना चाहती। अदालत ने माना कि सभी योग्य अभ्यर्थियों को रोकना ठीक नहीं है। इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने सरकार की अपील को तुरंत खारिज कर दिया। अब लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने की उम्मीद है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
यह पूरा विवाद वर्ष 2021 की राज्य सेवा परीक्षा से जुड़ा हुआ है। सीजीपीएससी ने तब डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी (DSP – Deputy Superintendent of Police) समेत 171 पदों के लिए विज्ञापन निकाला था। मई 2023 में इस परीक्षा के अंतिम परिणाम घोषित किए गए थे।
परिणाम आते ही चयन प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगने शुरू हो गए थे। इसमें बड़े पैमाने पर भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के दावे किए गए थे। इसके बाद प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने बिलासपुर हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL – Public Interest Litigation) दायर की थी। उन्होंने पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI – Central Bureau of Investigation) से जांच कराने की मांग की थी।
हाई कोर्ट ने दिया था यह आदेश
बढ़ते विवाद को देखते हुए राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। जांच लंबित होने का हवाला देकर सरकार ने नियुक्तियों पर रोक लगा दी थी। सरकार के इस फैसले से परेशान होकर चयनित अभ्यर्थी हाई कोर्ट पहुंच गए।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने इस पर सुनवाई की। हाई कोर्ट ने कहा कि केवल कुछ लोगों के कारण पूरी सूची को दूषित नहीं माना जा सकता। जिन लोगों के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं, उन्हें बेदाग माना जाएगा। अदालत ने सरकार को इन सभी योग्य अभ्यर्थियों को सशर्त नियुक्ति पत्र देने का आदेश दिया था।
नियुक्ति के साथ जुड़ी हैं शर्तें
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में नियुक्तियों के लिए कुछ कड़ी शर्तें भी तय की थीं। सरकार द्वारा दिए जाने वाले नियुक्ति पत्र में इन शर्तों का स्पष्ट उल्लेख रहेगा। यह नियुक्तियां पूरी तरह से सीबीआई की चल रही जांच के अंतिम फैसले के अधीन होंगी।
यदि भविष्य में किसी भी अभ्यर्थी के खिलाफ कोई गलत तथ्य मिलता है, तो कार्रवाई होगी। ऐसे अभ्यर्थियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जा सकती हैं। नियुक्ति मिलने का यह मतलब बिल्कुल नहीं होगा कि अभ्यर्थी को जांच से हमेशा के लिए क्लीन चिट मिल गई है। अब सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद इस आदेश का पालन करना होगा।
FAQ
- सुप्रीम कोर्ट ने सीजीपीएससी 2021 मामले में क्या फैसला सुनाया?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने बिलासपुर हाई कोर्ट के उस फैसले को सही रखा है, जिसमें बेदाग अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की बात कही गई थी। - परीक्षा में चयन को लेकर क्या विवाद था?
उत्तर: वर्ष 2021 की भर्ती में डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी समेत 171 पद शामिल थे। परिणाम आने के बाद इसमें भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है। - चयनित अभ्यर्थियों को किस शर्त पर नौकरी मिलेगी?
उत्तर: अभ्यर्थियों की नियुक्ति सीबीआई जांच के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी। यदि भविष्य में किसी भी चयनित उम्मीदवार के खिलाफ कोई प्रतिकूल सबूत मिलता है, तो उसकी सेवा तुरंत समाप्त कर दी जाएगी।
यह खबरें भी पढ़ें...
प्रमोशन और ओबीसी आरक्षण: हाईकोर्ट में कल दो स्पेशल बेंच करेंगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के गोहत्या बैन आदेश पर लगाई रोक, कहा सुधार जरूरी
हाथियों की मौत पर घिरी CSPDCL, हाईकोर्ट में झूठे ब्यौरे देने के आरोप
बालिग पर मर्जी थोपना कानूनन गलत, मां की याचिका पर एमपी हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी