बालिग पर मर्जी थोपना कानूनन गलत, मां की याचिका पर एमपी हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
Manya Jain | Jul 13, 2026, 12:30 IST
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मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। यह फैसला बालिग लड़कियों के अधिकारों को लेकर आया है। कोर्ट ने कहा कि बालिग बेटी अपनी मर्जी से रह सकती है।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है।
- कोर्ट ने कहा कि बालिग बेटी अपनी मर्जी से कहीं भी रह सकती है।
- एक मां ने बेटी को वापस लाने के लिए याचिका दायर की थी।
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मां की याचिका खारिज कर दी।
- कोर्ट ने साफ कहा कि अदालत सुपर गार्जियन नहीं बन सकती।
मां पहुंची थी हाईकोर्ट
जबलपुर पुलिस को कोर्ट ने बेटी को पेश करने का आदेश दिया था। पुलिस ने महिला को कोर्ट में पेश किया। इसके बाद जजों ने बेटी से अकेले में बात की।
बेटी ने कोर्ट में क्या कहा
बेटी ने कोर्ट में साफ कहा कि वह बालिग है। उसने कहा कि वह रितिक के साथ रहना चाहती है। रितिक इस याचिका में एक पक्षकार भी था। बेटी ने यह भी कहा कि यह उसका अपना फैसला है। उसने कहा कि किसी ने उस पर कोई दबाव नहीं डाला। न रितिक ने, न किसी और ने।
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका
कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के 2018 के एक फैसले का हवाला दिया। यह फैसला सोनी गैरी बनाम गैरी डगलस मामले का था। कोर्ट ने कहा कि बालिग होना हर इंसान की जिंदगी में बड़ी बात है। बालिग होते ही व्यक्ति को अपना फैसला खुद लेने का हक मिल जाता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक किसी की पसंद कायम है, अदालत पेरेंस पेट्री (parens patriae) की भूमिका नहीं निभा सकती। कोर्ट ने कहा कि बेटी को आजादी से जीने का पूरा हक है। कोर्ट किसी मां के भावुक होने या पिता के अहंकार से प्रभावित होकर सुपर गार्जियन नहीं बन सकता।
फैसले का असर
यह फैसला उन तमाम मामलों के लिए मिसाल बन सकता है, जहां बालिग बच्चों की पसंद को लेकर परिवार में विवाद होता है। कोर्ट ने साफ संदेश दिया कि बालिग होने के बाद हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी खुद तय करने का अधिकार है।
क्या है हैबियस कॉर्पस याचिका?
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