सूरजपुर में बाघ की खाल के साथ 5 तस्कर गिरफ्तार! जबलपुर की टीम ने ऐसे बिछाया जाल
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से वन्यजीव तस्करी से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। जबलपुर की वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन टीम ने सूरजपुर में बाघ की खाल के साथ पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। टीम ने ओड़गी और भैयाथान के बीच धारसेड़ी क्षेत्र में जाल बिछाकर आरोपियों को खाल के साथ बुलाया था। मौके पर पहुंचते ही टीम ने सभी को घेर लिया। यह प्रदेश में बीते चार महीनों में बाघ के शिकार का पांचवां मामला है।
यह कार्रवाई सूरजपुर वनमंडल के धारसेड़ी गांव में की गई। आरोपी बाघ की खाल बेचने के इरादे से वहां पहुंचे थे।
पुलिस और वन विभाग की मौजूदगी का आभास होते ही आरोपियों ने भागने की कोशिश की। लेकिन पीछा कर सभी पांचों को पकड़ लिया गया।
जाल बिछाकर पकड़ी गई गैंग
जबलपुर की वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन टीम को पहले से इस सौदे की भनक लग चुकी थी। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर आरोपियों को खाल लेकर मौके पर बुलाया।
जैसे ही आरोपी बाघ की खाल लेकर पहुंचे, टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। हालांकि पुलिस और वन विभाग की मौजूदगी भांपते ही आरोपियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने पीछा कर सभी को धर दबोचा।
पूछताछ में जुटी टीम
गिरफ्तार आरोपियों से अब पूछताछ की जा रही है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि बाघ का शिकार कहां हुआ, इसमें और कौन-कौन शामिल था और खाल किसे बेची जानी थी।
वन विभाग और वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन टीम को आशंका है कि इसके पीछे कोई बड़ा तस्करी नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। इसी एंगल से आगे की जांच की जा रही है।
प्रदेश में लगातार बढ़ रहे हैं शिकार के मामले
प्रदेश में एक और बाघ की खाल मिलने से माना जा रहा है कि उसका भी शिकार हुआ है। इससे पहले एक शिकार दंतेवाड़ा में और तीन शिकार बीजापुर में हो चुके थे।
सूरजपुर के इस मामले को मिलाकर बीते चार महीनों में प्रदेश में कुल पांच बाघों का शिकार हो चुका है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बीते 20 साल में छत्तीसगढ़ में कुल 30 बाघ मारे जा चुके हैं।
बड़े तस्करी नेटवर्क की आशंका
सूरजपुर और आसपास के इलाकों में इससे पहले भी वन्यजीवों की खाल की तस्करी से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। इस बार की गिरफ्तारी को भी उसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है।
टीम को शक है कि इस मामले में और लोगों की संलिप्तता भी हो सकती है। जांच एजेंसी इस दिशा में आगे की छानबीन कर रही है।
अब आगे क्या होगा
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद वन विभाग आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा। बाघ के शिकार की जगह और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान होने के बाद और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
बार-बार सामने आ रहे इन मामलों ने प्रदेश में बाघ संरक्षण को लेकर वन विभाग की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में अब तक कितने बाघों का शिकार हो चुका है?
बीते चार महीने में छत्तीसगढ़ में बाघ शिकार के कुल पांच मामले सामने आए हैं, जिसमें सूरजपुर का यह मामला भी शामिल है। इससे पहले दंतेवाड़ा में एक और बीजापुर में तीन शिकार हुए थे। बीते 20 साल में प्रदेश में 30 बाघ मारे जा चुके हैं। - बाघ की खाल की तस्करी करने पर क्या सजा मिलती है?
भारत में बाघ की खाल की तस्करी, खरीद-फरोख्त या अवैध कब्जा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत गंभीर अपराध है। बाघ अनुसूची-I (Schedule I) का संरक्षित वन्यजीव है। ऐसे मामलों में कम से कम 3 साल से लेकर 7 साल तक की जेल और ₹25,000 या उससे अधिक का जुर्माना हो सकता है।
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