इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 3 बाघों का शिकार, स्टाफ ने ही लीक की थी लोकेशन
Harrison Masih | Jul 11, 2026, 13:37 IST
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों का शिकार 2026
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बाघों की लोकेशन लीक होने से शिकारियों को मदद मिली, और तीन बाघों का शिकार किया गया। वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह में है।
समझें क्या है पूरा मामला
ट्रैप कैमरे में बाघ दिखते ही शिकारियों ने उनका किलिंग प्लान तैयार किया। नतीजा यह हुआ कि एक महीने के भीतर पासेवाड़ा क्षेत्र में तीन बाघ मार दिए गए और उनकी नीट-एंड-क्लीन खाल उतार ली गई।
कैमरे में बाघ दिखे, शिकारियों ने प्लान बनाया
अप्रैल-मई के दौरान फरसेगढ़ इलाके में जब बाघों की तस्वीरें कैमरों में आईं तो यह खबर पूरे महकमे में फैल गई।
जब बाघ ट्रैप कैमरे में कैद हुए तो विभाग के किसी अंदरूनी स्टाफ ने उनकी सटीक लोकेशन शिकारियों तक लीक कर दी। इनपुट मिलते ही शिकारियों के लिए बाघों की मूवमेंट पर नजर रखना बेहद आसान हो गया।
एक महीने में तीन बाघ मारे
यह चौंकाने वाली बात यह भी है कि विभाग के मैदानी स्टाफ को बाघों की पुख्ता मौजूदगी की खबर लीक होने से बहुत पहले लग चुकी थी, जिसे दबाए रखा गया।
आईटीआर में कैमरा ट्रैपिंग के दौरान 12 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी जो एक सुखद खबर था। अब आशंका है कि शिकार हुए बाघों की संख्या और अधिक हो सकती है।
बाघ शिकार का कोर एरिया पासेवाड़ा
स्टाफ विरोध कर रहा था क्योंकि उसे पता था कि क्षेत्र में शिकारी सक्रिय हैं और बाघ कैमरों में कैद हो सकते हैं।
यह भी सामने आया कि बाघों के शिकार के दौरान क्षेत्र में 6 मवेशियों का शिकार भी किया था।
बाघों का शिकार
पैदल गार्ड गिरफ्तार, फॉरेस्ट गार्ड सस्पेंड
फॉरेस्ट गार्ड विश्वनाथ मांझी को इसी क्षेत्र के निवासी व यूनियन लीडर होने के कारण सस्पेंड किया गया है। उनके निलंबन आदेश में स्पष्ट लिखा है कि 'लापरवाही, उदासीनता और निर्देशों की अवहेलना के कारण यह घटना हुई।'
खुंखार तस्कर अजीत राजगोंड की नजर
जनवरी 2025 में महाराष्ट्र के चंद्रपुर से उसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे मध्य भारत के टाइगर लैंडस्केप में हाई अलर्ट जारी किया गया था।
आशंका जताई जा रही है कि छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में हाल ही में हुए 3 बाघों के शिकार के पीछे इसी पारधी गैंग का हाथ है। इस सिलसिले में मध्यप्रदेश की टाइगर स्ट्राइक फोर्स इसी महीने अजीत को जबलपुर कोर्ट में पेश करने वाली है।
इंद्रावती-अबूझमाड़-गढ़चिरौली-चंद्रपुर पर पारधी गैंग की नजर
इंद्रावती-अबूझमाड़-गढ़चिरौली-चंद्रपुर का यह पूरा वन क्षेत्र इस गैंग के निशाने पर बताया जाता है।
कैमरा लगाने का क्यों हो रहा था विरोध
राज्य में स्टाफ की कमी के चलते एक-एक बीट गार्ड 3-4 बीट के भरोसे हैं। इसी का फायदा उठाने में शिकारी सफल रहे।
रेफ्रेंस: दैनिक भास्कर
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