सुशासन तिहार ने बढ़ाई अफसरों की माथापच्ची, हर दिन निपटाने होंगे 20 हजार आवेदन
Raipur : छत्तीसगढ़ सरकार का 40 दिन चला सुशासन तिहार निपट गया। यह सुशासन तिहार अफसरों पर बहुत भारी पड़ा है। पूरे प्रदेश में 6 लाख से ज्यादा आवेदन सरकार को मिले हैं। इनमें ज्यादातर जनता के मांग पत्र हैं।
सरकार ने ऐलान तो कर दिया है कि एक महीने में सभी आवेदनों को पूरा कर दिया जाएगा। अफसरों के सामने अब नई चुनौती आ गई है। प्रशासन को हर दिन साढ़े बीस हजार आवेदनों का निपटारा करना होगा। सरकार को 26 हजार शिकायतें भी मिली हैं। इन शिकायतों को भी दूर करना है।
अफसरों के परफॉर्मेंस की निगरानी
सुशासन तिहार अभियान भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन अब इसकी असली चुनौती शुरू होने जा रही है। पूरे अभियान के दौरान प्राप्त 6.43 लाख आवेदनों में से लगभग 95.9 प्रतिशत यानी 6,17,111 आवेदन जनता की विकास संबंधी मांगों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े हैं।
अब इन मांगों को तय समय-सीमा में पूरा करना प्रदेश के 33 जिलों के प्रशासन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। सरकार ने इन आवेदनों के निराकरण के लिए 30 दिनों की समय-सीमा तय की है। इसका मतलब है कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को प्रतिदिन औसतन 20,570 आवेदनों का निपटारा करना होगा।
यह केवल कागजी प्रक्रिया पूरी करने का मामला नहीं है, बल्कि योजनाओं और घोषणाओं को धरातल पर उतारने की असली कसौटी भी है। अभियान के दौरान लोगों ने बड़ी संख्या में सड़क, पेयजल, बिजली, सिंचाई, आवास और अन्य विकास कार्यों से जुड़ी मांगें रखीं। अब इन पर कार्रवाई ही सुशासन तिहार की सफलता का पैमाना बनेगी।
प्रशासन के लिए चुनौती सिर्फ फाइलों का निस्तारण नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आम लोगों को तय समय में वास्तविक लाभ मिले। आने वाले 30 दिन इस बात का फैसला करेंगे कि यह अभियान केवल जनसुनवाई तक सीमित रहा या फिर लोगों की उम्मीदों को वास्तविक परिणामों में बदलने में सफल हुआ।
परफॉर्मेंस पर टिका कॅरियर
अफसरों का भविष्य इस परफॉर्मेंस पर ही टिका है। सुशासन तिहार सीएम विष्णुदेव साय का महत्वाकांक्षी अभियान है। इस अभियान के जरिए ही सीएम सुशासन बाबू की छवि को गढ़ना चाहते हैं। उन्होंने सुशासन तिहार में मिले आवेदनों को पूरा करने के लिए जिला प्रशासन को एक महीने का समय दिया है।
इस एक महीने में ही इन आवेदनों को पूरा करना होगा और यह जमीन पर उतरा है या नहीं इसकी मॉनिटरिंग खुद सीएम कर रहे हैं। अफसरों को रोजाना बताना होगा कि उन्होंने आज कितने आवेदनों का निपटारा किया। यह रिपोर्ट खुद सीएम सचिवालय देखेगा। अफसरों की परफॉर्मेंस ही उनका भविष्य तय होगा कि कौन फील्ड में रहेगा और कौन लूप लाइन में जाएगा। इन आवेदनों ने अफसरों की न सिर्फ माथापच्ची बल्कि चुनौती भी बढ़ा दी है।
सुशासन तिहार में क्या हुआ
सुशासन तिहार का अभियान 40 दिनों तक चला। यह एक मई से शुरु हुआ था। इस दौरान सरकार ने गांव-गांव और शहर-शहर पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनीं और विकास कार्यों से जुड़े सुझाव व मांगें जुटाईं। अभियान के दौरान 33 जिलों में कुल 1,286 समाधान शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 6.43 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए।
इनमें से केवल करीब 26 हजार आवेदन शिकायतों से जुड़े थे, जबकि 6.17 लाख से ज्यादा आवेदन विकास कार्यों और जनहित की मांगों से संबंधित रहे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल 6,43,334 आवेदनों में से 6,17,111 आवेदन विकास कार्यों और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े रहे, जबकि 26,223 आवेदन शिकायत श्रेणी में दर्ज किए गए। इससे यह संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में लोग अपने क्षेत्रों में नई सुविधाओं और विकास कार्यों की मांग लेकर प्रशासन तक पहुंचे।
सीएम ने लिया फीडबैक
इतनी बड़ी संख्या में आवेदन मिलने का एक मतलब यह भी है कि लोगों के पास बुनियादी चीजों की भारी कमी है। सीएम ने जगह जगह औचक निरीक्षण कर फीडबैक लिया।
अफसरों पर तीखे तेवर दिखाए तो आम आदमी की समस्याएं भी सुनीं। इससे साफ है कि सीएम के पास योजनाओं के क्रियान्वयन का पूरा फीडबैक पहुंच गया है। इस फीडबैक के आधार पर ही अफसरों की जवाबदेही तय की जाएगी।
FAQ
- सुशासन तिहार अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या था?
जनता की शिकायतों और विकास संबंधी मांगों को सुनना और उन्हें तय समय में निपटाना। - आवेदन निपटाने की समय-सीमा और लक्ष्य क्या है?
6.43 लाख आवेदन में से 6.17 लाख विकास संबंधी और 26 हजार शिकायतें, 30 दिन में हर दिन लगभग 20,570 आवेदन निपटाने का लक्ष्य। - अफसरों की जवाबदेही कैसे तय होगी?
सीएम खुद रोजाना आवेदन निपटान की रिपोर्ट देखेंगे परफॉर्मेंस आधार पर भविष्य तय होगा।
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