चॉक से बच्चों का भविष्य लिखने वाले शिक्षकों को सम्मान, चार को स्मृति पुरस्कार
किसी ने सीमित संसाधनों के बीच बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखा, किसी ने स्कूल में नए प्रयोग कर विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता बढ़ाई। किसी ने कमजोर बच्चों पर अतिरिक्त मेहनत की तो किसी ने अपने स्कूल को बेहतर बनाने में पूरी ताकत लगा दी। शिक्षक दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ के ऐसे ही शिक्षकों की मेहनत को पहचान मिली।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चुने गए 63 शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया। वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए चार शिक्षकों को स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया। इनमें खैरागढ़ के राजेश, कोरबा के कामता, दुर्ग की प्रज्ञा और सारंगढ़ की प्रियंका शामिल हैं।
सिर्फ पढ़ाना नहीं, बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी:
शिक्षक की भूमिका अब सिर्फ ब्लैकबोर्ड पर पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं रह गई है। बदलते दौर में शिक्षक को बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी रुचि, क्षमता और जरूरत को भी समझना पड़ता है।
सरकारी स्कूलों में यह जिम्मेदारी और चुनौतीपूर्ण हो जाती है, जहां सीमित संसाधनों के बीच बेहतर परिणाम देने की उम्मीद रहती है।राज्य शिक्षक सम्मान पाने वाले शिक्षकों के काम में भी यही समर्पण नजर आता है।
उन्होंने अपने स्कूलों में पढ़ाई को बेहतर बनाने के साथ विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के अवसर देने पर जोर दिया। कई शिक्षकों ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर बच्चों के लिए सीखने का माहौल तैयार किया।
चार शिक्षकों को स्मृति पुरस्कार:
इस बार चार शिक्षकों को विशेष तौर पर स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। खैरागढ़ के राजेश, कोरबा के कामता, दुर्ग की प्रज्ञा और सारंगढ़ की प्रियंका का चयन शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए किया गया।
इन शिक्षकों की कहानी इस बात की मिसाल है कि किसी स्कूल को बेहतर बनाने के लिए सिर्फ बड़े संसाधन ही जरूरी नहीं होते। शिक्षक की सोच, मेहनत और बच्चों के प्रति लगाव भी बड़ा बदलाव ला सकता है।
राजेश ने खैरागढ़ में विद्यार्थियों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए काम किया। वहीं कामता ने कोरबा में अपने शैक्षणिक दायित्वों के साथ बच्चों की जरूरतों को समझते हुए काम किया। दुर्ग की प्रज्ञा और सारंगढ़ की प्रियंका ने भी अपने-अपने स्कूलों में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
सम्मान के साथ बढ़ी जिम्मेदारी:
शिक्षक दिवस पर मिला यह सम्मान इन शिक्षकों के लिए सिर्फ पुरस्कार नहीं, बल्कि उनके वर्षों के काम की सार्वजनिक पहचान भी है। एक शिक्षक के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि उसके विद्यार्थियों की सफलता मानी जाती है।
ऐसे में राज्य स्तर पर सम्मान मिलना उस मेहनत को नई पहचान देता है।सम्मानित शिक्षकों के लिए यह उपलब्धि दूसरे शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। खासकर ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में काम करने वाले शिक्षक यह संदेश देते हैं कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, अगर शिक्षक बच्चों के साथ खड़ा रहे तो बदलाव संभव है।
डॉ. राधाकृष्णन की जयंती पर शिक्षकों को सलाम:
देश में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।
वे महान दार्शनिक, शिक्षाविद और शिक्षक थे।शिक्षक दिवस का उद्देश्य उन लोगों को सम्मान देना है, जो बच्चों को सिर्फ पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देते हैं। छत्तीसगढ़ में 63 शिक्षकों का सम्मान इसी भावना को आगे बढ़ाता है।
बच्चों के सपनों को दिशा:
कक्षा में बच्चों के सवालों का जवाब देने से लेकर उनके सपनों को दिशा देने तक, शिक्षक की भूमिका समाज में सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक है।
यही वजह है कि शिक्षक दिवस पर मिलने वाला सम्मान किसी एक दिन की उपलब्धि नहीं, बल्कि सालों की मेहनत और समर्पण की पहचान होता है।चॉक और ब्लैकबोर्ड से शुरू हुआ सफर जब बच्चों के सपनों तक पहुंचता है, तो शिक्षक की असली सफलता वहीं दिखाई देती है।
छत्तीसगढ़ के यह शिक्षक सम्मानित:
रायपुर: महेन्द्र कुमार पटेल, भास्ती अग्रवाल
धमतरी: रजिता साहू, लीलाराम साहू
सारंगढ़-बिलाईगढ़: हेमंत कुमार श्रीवास, सरिता सिदार
राजनांदगांव: थंगेश्वर कुमार, कोनिका सोनी
दंतेवाड़ा: कैलाश कुमार नीलम, सुमन चौधरी
कबीरधाम: चंद्रिका प्रसाद चंद्रवंशी, संतोष कुमार साहू
सरगुजा: अजय कुमार कश्यप, रेखा रॉय
नारायणपुर: विरेन्द्र कुमार निषाद
जशपुर: संतोषी डनसेना, रवि कुमार गुप्ता
कोरिया: जया मिश्रा, पूनम पाण्डेय
मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी: सुजीत कुमार साहू
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई: मोहन लाल जंघेल, पदमा साहू
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी: भजन लाल साहू, योगेन्द्र कुमार देवांगन
बलरामपुर-रामानुजगंज: संजय कुमार श्रीवास्तव, अमृता निकुंज
दुर्ग: कुमुद साहू, पवन कुमार सिंह
कोरबा: कौशिल्या खुराना, जितेन्द्र कुमार साहू
सूरजपुर: गोपाल सिंह, योगेश कुमार साहू
बलौदाबाजार-भाटापारा: कन्हैया लाल साहू, विशेषवर साहू
मुंगेली: रघुनाथ राठौर, वंदिता शर्मा
कोंडागांव: हीरा लाल चुरेन्द्र, सूरज लाल नेताम
रायगढ़: आरती साहू, ओमकुमारी पटेल
सुकमा: परिणीता कश्यप, सविता उसेंडी
गरियाबंद: ओमेश्वरी साहू, अनिल कुमार अवस्थी
सक्ती: छवि लाल राठौर, पिललाल पटेल
बालोद: नेमसिंह साहू, खेमंत कुमार साहू
जांजगीर-चांपा: गुलजार बरेठ, अंजू किरण
बेमेतरा: शीतल बैंस, आंचल वर्मा
महासमुंद: नीलाम्बर नायक, लक्ष्मण दास मानिकपुरी
बिलासपुर: जय कुमार कौशिक, प्रवीण मिश्रा
बस्तर: बुधराम कश्यप, कामेश्वरी कश्यप
कांकेर: प्रेमप्रकाश साहू, बोधन लाल साहू
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: धर्मेन्द्र कुमार कैवर्त्य, शिव नारायण सिंह
बीजापुर: अनिल कुमार जाटव, केदार नाथ देशमुख
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