पहले पुल बनाइए, फिर ऑनलाइन हाजिरी मांगिए, नदी पार कर स्कूल पहुंच रहे शिक्षक
RAIPUR : बस्तर के दूरदराज़ और दुर्गम इलाकों में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है। कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड में पदस्थ शिक्षक रोज अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती कोटरी नदी को छोटी डोंगी के सहारे पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं। इन शिक्षकों के सामने केवल नदी पार करने की चुनौती ही नहीं है, बल्कि नेटवर्क की कमी के बावजूद VSK ऐप पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने का दबाव भी बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला राजनीतिक रंग भी पकड़ चुका है।
क्या है वायरल वीडियो में :
वायरल वीडियो में कुछ शिक्षक डोंगी में बैठकर तेज बहाव वाली नदी पार करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एक शिक्षक कहते सुनाई देते हैं कि पहले यह बताइए कि ऐसी परिस्थितियों में ऑनलाइन उपस्थिति कैसे दर्ज करें। वहीं दूसरे शिक्षक बाढ़ के तेज बहाव को लेकर चिंता व्यक्त करते नजर आते हैं। करीब 30 सेकंड के इस वीडियो ने बस्तर के दूरस्थ इलाकों में शिक्षकों की कठिन परिस्थितियों को पूरे प्रदेश के सामने ला दिया है।
स्कूल के लिए नदी पार:
जानकारी के अनुसार कोयलीबेड़ा क्षेत्र के लगभग 24 शिक्षक प्रतिदिन इसी तरह नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं। उनका सफर बेहद कठिन है। पहले कई किलोमीटर बाइक से नदी तक पहुंचना पड़ता है, फिर छोटी डोंगी से नदी पार करनी होती है। दूसरी ओर उतरने के बाद फिर पैदल चलना पड़ता है और अंत में दोबारा बाइक से स्कूल पहुंचना होता है। बरसात के मौसम में यह यात्रा और भी खतरनाक हो जाती है, क्योंकि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता रहता है और सुरक्षित आवागमन का कोई स्थायी साधन उपलब्ध नहीं है।
जान पर खेलते मास्साब:
शिक्षकों का कहना है कि हर दिन यह चिंता बनी रहती है कि शाम को सुरक्षित घर लौट पाएंगे या नहीं। उनका कहना है कि यदि सरकार फिलहाल पुल का निर्माण नहीं करा सकती तो कम से कम सुरक्षित नाव और लाइफ जैकेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि दुर्घटना की आशंका कम हो सके। साथ ही जिन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क नहीं है, वहां ऑनलाइन उपस्थिति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
बस्तर में टूटी सड़कें:
बस्तर संभाग के कई दूरस्थ इलाकों में हर साल मानसून के दौरान सड़क संपर्क प्रभावित हो जाता है। कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिलों में करीब 200 स्कूल ऐसे हैं, जहां बरसात के दिनों में पहुंचना बेहद कठिन हो जाता है। कई गांवों में मोबाइल नेटवर्क भी उपलब्ध नहीं रहता, जिससे ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना शिक्षकों के लिए बड़ी समस्या बन जाता है। इसके बावजूद समय पर उपस्थिति नहीं लगने पर वेतन कटने की आशंका बनी रहती है।
हरकत में शिक्षा विभाग:
वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग भी हरकत में आया है। अधिकारियों ने कहा है कि पूरे मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि दुर्गम और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर व्यावहारिक समाधान तलाशने का प्रयास किया जाएगा, ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
कांग्रेस का निशाना:
इधर इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। उनका कहना है कि जब शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं, तब सरकार का पूरा ध्यान केवल ऑनलाइन हाजिरी पर केंद्रित नहीं होना चाहिए। बैज ने मांग की कि पहले पुल, सुरक्षित आवागमन, नेटवर्क और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, उसके बाद जवाबदेही तय की जाए।
FAQ
- बस्तर में शिक्षकों की मुख्य समस्याएं क्या हैं?
उत्तर: उफनती नदियों पर पुल न होना, आवागमन के पक्के साधनों की कमी और दूरस्थ इलाकों में मोबाइल नेटवर्क न होना, जिससे ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना कठिन हो जाता है। - शिक्षकों पर किस ऐप पर हाजिरी का दबाव है?
उत्तर: शिक्षकों पर VSK ऐप (विद्या समीक्षा केंद्र) के जरिए ऑनलाइन हाजिरी लगाने का दबाव है, जो शिक्षा विभाग की डिजिटल उपस्थिति प्रणाली है।
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