छत्तीसगढ़ में पदोन्नति नियम बदले ; TET हुआ अनिवार्य, हजारों शिक्षकों पर संकटV
छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिला शिक्षा अधिकारी के एक आदेश ने हजारों सहायक और समायोजित शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। साफ शब्दों में कहा गया है कि जो शिक्षक, टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास नहीं हैं, उन्हें प्राथमिक प्रधान पाठक के पद पर प्रमोशन नहीं दिया जाएगा। आदेश जारी होते ही शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों में हलचल तेज हो गई है।
DEO कार्यालय से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि प्राथमिक स्तर पर पदोन्नति के लिए TET अब अनिवार्य योग्यता मानी जाएगी। यानी केवल वर्षों का अनुभव या सेवा अवधि अब पर्याप्त नहीं होगी। यदि शिक्षक ने TET पास नहीं किया है, तो वह प्रमोशन सूची में शामिल नहीं हो सकेगा। इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन इससे बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित होने वाले हैं।
कानून और कोर्ट के फैसले का हवाला
DEO के आदेश में तीन महत्वपूर्ण कानूनी अधिकारों का उल्लेख किया गया है। पहला, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 23, जिसमें कहा गया है कि शिक्षक बनने के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता जरूरी होगी। दूसरा, NCTE की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना, जिसमें कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए TET को अनिवार्य बताया गया है।
तीसरा और सबसे अहम आधार सुप्रीम कोर्ट का 2025 का फैसला है, जिसमें स्पष्ट कहा गया कि निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करने वाले कर्मचारी पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे। यानी अब विभाग सीधे तौर पर यह मानकर चल रहा है कि TET केवल नियुक्ति की शर्त नहीं, बल्कि पदोन्नति की पात्रता का भी हिस्सा है। यही वजह है कि बलौदाबाजार-भाटापारा DEO ने सभी शिक्षक संगठनों और संघों को निर्देश दिया है कि वे अपने सदस्यों को इस नियम की जानकारी दें और इसका पालन सुनिश्चित कराएं।
अनुभव बनाम परीक्षा की बहस
इस आदेश के बाद शिक्षकों के बीच नाराजगी भी बढ़ने लगी है। कई शिक्षक ऐसे हैं जो 15 से 20 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, लेकिन अब तक TET पास नहीं कर पाए हैं। उनका कहना है कि लंबे अनुभव और शिक्षण कार्य को नजरअंदाज कर केवल परीक्षा को आधार बनाना न्यायसंगत नहीं है। शिक्षकों का एक वर्ग इसे “अनुभव की अनदेखी” बता रहा है।
वहीं कुछ शिक्षक संगठन इस आदेश के खिलाफ कानूनी राय लेने और आंदोलन की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। संगठन यह तर्क दे रहे हैं कि समायोजित शिक्षकों और पुराने कर्मचारियों के लिए अलग नीति बनाई जानी चाहिए।
अब नियमों में ढील नहीं
शिक्षा विभाग के इस फैसले को सरकार के सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। संकेत साफ हैं कि अब शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। विभाग योग्यता आधारित पदोन्नति व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या बलौदाबाजार-भाटापारा से शुरू हुआ यह आदेश पूरे छत्तीसगढ़ में लागू किया जाएगा? यदि ऐसा होता है, तो प्रदेशभर में हजारों शिक्षकों के प्रमोशन अटक सकते हैं और शिक्षा विभाग में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।
फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि अब TET केवल भर्ती की औपचारिक परीक्षा नहीं रह गई है, बल्कि शिक्षकों के पूरे करियर और तरक्की का निर्णायक पड़ाव बन चुकी है।
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