द्वापर युग से जुड़ा खल्लारी का इतिहास, नौ दिन, नौ देवियां

thesootr Desk | Mar 23, 2026, 19:40 IST
The History of Khallari Linked Dwapar Yuga
खल्लारी माता मंदिर, छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित, पांडवों की कथाओं और हिडिम्बनी की भक्ति से जुड़ा पौराणिक और धार्मिक स्थल है। नवरात्रि और चैत पूर्णिमा पर यहाँ लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन और मनोकामना पूर्ति के लिए आते हैं।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से करीब 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित खल्लारी माता मंदिर नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनता है। यह मंदिर खल्लारी पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित है, जहाँ 1985 में पहली बार ज्योत प्रज्जवलित की गई थी। तब से नवरात्रि के दौरान यह ज्योत लगातार जलती रहती है।



माता के दर्शन का मार्ग

मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पहले करीब 850 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं, लेकिन अब सुविधा के लिए रोप-वे की व्यवस्था कर दी गई है। श्रद्धालु दूर-दूर से माता के दर्शन और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसा माना जाता है कि संतान सुख से वंचित दंपत्ति माता के दर्शन और मनोकामना ज्योति प्रज्जवलित करने से अपने संतान प्राप्ति की कामना पूरी कर सकते हैं।



खल्लारी में मेला महोत्सव

मंदिर में हर साल शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र के दौरान भारी भीड़ उमड़ती है। नवरात्रि के दिनों में रोजाना 30 से 35 हजार श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। साथ ही, चैत पूर्णिमा के दिन यहां मेला महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने और उपवास रखने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।



खल्लारी माता मंदिर



खल्लारी की पौराणिक महिमा

खल्लारी का उल्लेख द्वापर युग से मिलता है। कहा जाता है कि इस स्थान पर हिडिम्ब नामक राक्षस का राज्य था। हिडिम्ब की बहन हिडिम्बनी इस स्थान में आती थीं और देवीशक्ति की पूजा करती थीं। पांडवों के 12 वर्ष के निर्वासन के दौरान भी वे इस स्थान से गुजरे थे। भीम पांडव और हिडिम्बनी की कथा आज भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है।



प्रतिदिन और विशेष भोग

प्रतिदिन का भोग

  • सोमवार: तिखुर का हलवा, पान
  • मंगलवार: सिंघाड़ा का हलवा, पान
  • बुधवार: बेसन का लड्डू, मुंग दाल का खिचड़ी, पान
  • गुरुवार: खीर, पुड़ी, पान
  • शुक्रवार: पंचमेवा, मुंग दाल का खिचड़ी, पान
  • शनिवार: हलवा, पुड़ी चना, पान
  • रविवार: अनार, ऋतू फल, दाल चावल, पान

विशेष भोग

  • पूर्णिमा: मालपुवा, मीठा चावल, बूंदी, पान
  • अमावस्या: सोठ, मखाना, चावल दाल, पान

खल्लारी माता मंदिर न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र है बल्कि ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के कारण भी लोगों के लिए खास स्थान रखता है।



निष्कर्ष

खल्लारी की ऊँची चोटी माता का पावन धाम है। यह स्थल न केवल छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले का धार्मिक केंद्र है, बल्कि पांडव काल की गाथाओं से भी जुड़ा हुआ है। श्रद्धालु यहां दूर-दूर से माता के दर्शन और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं। अब रोप-वे की सुविधा के कारण यह मार्ग और भी सुगम हो गया है। माता की कृपा से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और उनका अनुभव एक सुखद अहसास बनकर उनके हृदय में बस जाता है।



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