ई-चालान की डिजिटल मार ; तकनीकी चूक और गायब स्टॉप लाइन से आम जनता बेहाल
NEWS IN SHORT
- बुलेट पर सीट बेल्ट जैसे गलत ई-चालान से जनता परेशान।
- बिलासपुर में दो साल में दस करोड़ से अधिक जुर्माना वसूला।
- रायपुर में स्टॉप लाइन गायब, फिर भी कट रहे अंधाधुंध चालान।
- तकनीकी खामियों और सर्वर एरर के कारण निर्दोष चालक बेहाल।
- ई-चालान के फर्जी लिंक भेजकर साइबर ठग कर रहे वसूली।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में इन दिनों ई-चालान व्यवस्था वाहन चालकों के लिए गले की फांस बन गई है। ट्रैफिक सुधार के नाम पर लागू की गई हाई-टेक आईटीएमएस (ITMS) व्यवस्था अब विवादों के घेरे में है। बिलासपुर से लेकर राजधानी रायपुर तक, वाहन चालकों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि उन्हें बिना किसी सुनवाई या नोटिस के सीधे मोबाइल पर चालान का मैसेज मिल रहा है, जिनमें से कई मामले हास्यास्पद और तकनीकी खामियों से भरे हैं।
बुलेट पर सीट बेल्ट और फर्जी ओवरस्पीडिंग
बिलासपुर में ई-चालान की विसंगतियों का आलम यह है कि दो पहिया वाहनों (बुलेट) पर सीट बेल्ट न पहनने के आरोप में चालान काटे जा रहे हैं। ओडिशा के सुंदरगढ़ से आए एक ऐसे ही मामले ने व्यवस्था की पोल खोल दी है।
इसके अलावा, सर्वर एरर, नंबर प्लेट की गलत रीडिंग और कैमरों के गलत एंगल की वजह से निर्दोष चालक भी जुर्माने की जद में आ रहे हैं। ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों का कहना है कि कई बार जीपीएस रिकॉर्ड में गाड़ी की गति सीमा के भीतर होने के बावजूद पुलिसिया कैमरों में उन्हें ओवरस्पीड बताकर भारी जुर्माना थमा दिया जाता है।
भारी वसूली और हजारों शिकायतें
बिलासपुर जिले में पिछले दो वर्षों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यहां 2,00,687 ई-चालान काटे गए, जिनके जरिए सरकार ने 10 करोड़ 79 लाख 23 हजार 27 रुपए का जुर्माना वसूला।
विडंबना यह है कि केवल 2024-25 में ही 23,357 लोगों ने चालान सुधार के लिए आवेदन दिया है, जो यह दर्शाता है कि सिस्टम में कितनी बड़ी खामी है। वर्तमान में बिलासपुर में 35 से अधिक ई-चालान डिवाइस और आईटीएमएस कैमरों का उपयोग हो रहा है, लेकिन सुधार की गुंजाइश अब भी कोसों दूर है।
जहां स्टॉप लाइन ही नहीं, वहां कट रहे चालान
राजधानी रायपुर की स्थिति और भी अजीबोगरीब है। यहां रोजाना करीब 5000 ई-चालान भेजे जा रहे हैं, जिनमें से 30 प्रतिशत चालान 'स्टॉप लाइन' और 'जेब्रा क्रॉसिंग' उल्लंघन के हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शहर के प्रमुख चौराहों (जयस्तंभ, शास्त्री, शारदा, आमापारा) से स्टॉप लाइन की मार्किंग या तो धुंधली हो चुकी है या पूरी तरह मिट गई है। वाहन चालकों को पता ही नहीं चलता कि रेखा कहां है, लेकिन कैमरों के फुटेज के आधार पर उनके घर चालान पहुंच जाता है।
रायपुर में ई-चालान का ग्राफ
ऑनलाइन ठगी का नया खतरा
सिस्टम की इन खामियों के बीच साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। ई-चालान के नाम पर फर्जी लिंक और वेबसाइट के जरिए लोगों को मैसेज भेजे जा रहे हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति जुर्माना भरने के लिए इन लिंक पर क्लिक करता है, उसके बैंक खाते से जमापूंजी गायब हो जाती है। पुलिस ने इस संबंध में सावधानी बरतने की सलाह दी है।
निष्कर्ष
वाहन चालकों का कहना है कि प्रशासन को जुर्माना वसूलने से पहले बुनियादी ढांचे (जैसे सड़कों पर पेंटिंग और मार्किंग) पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, गलत चालान की स्थिति में ट्रैफिक ऑफिस के चक्कर काटने के बजाय एक त्वरित और पारदर्शी 'ऑनलाइन अपील' व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि निर्दोष लोगों को दफ्तरों की खाक न छाननी पड़े।
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