सियासत में फिर सक्रिय हुए टीएस सिंहदेव, क्या गुल खिलाएगी बघेल और बैज के साथ जुगलबंदी
RAIPUR: छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर बाबागिरी शुरू हो गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव जिस तरह से एक्टिव हुए हैं उससे सियासत का पारा चढ़ गया है।सिंहदेव कभी भूपेश बघेल के साथ कार में सवार हो रहे हैं, तो कभी दीपक बैज के साथ भूख हड़ताल पर बैठ रहे हैं। इतना ही नहीं वे मोदी और विष्णु सरकार पर भी खूब निशाना साध रहे हैं। सवाल यह उठ रहा कि बाबा की सक्रियता क्या कोई नया गुल खिलाने वाली है। क्या बाबा की बघेल और बैज से जुगलबंदी क्या कांग्रेस की नई राजनीति की तरफ इशारा कर रही है।
स्टेयरिंग पर सिंहदेव:
छत्तीसगढ़ की सियासत में लंबे समय बाद एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने खुद कार चलाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपने साथ बैठाकर संदेश दिया कि कांग्रेस के बड़े नेता एकजुट हैं। सूरजपुर जिले में चल रहे कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बीच दोनों नेताओं का यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में टीएस सिंहदेव ड्राइविंग सीट पर नजर आ रहे हैं, जबकि बगल वाली सीट पर भूपेश बघेल बैठे दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान सिंहदेव ने कहा कि “हम हमेशा साथ हैं”, जिससे पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश मानी जा रही है।
बैज के साथ धरने पर बैठे:
विश्रामपुर थाने के सामने कांग्रेस का धरना पिछले दो दिनों से जारी था। कांग्रेस नेताओं ने पार्टी पदाधिकारी नरेंद्र जैन पर दर्ज मामले को लेकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ था। धरने में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, टीएस सिंहदेव और भूपेश बघेल समेत कई बड़े नेता शामिल हुए। बैज के साथ सिंहदेव ने भूख हड़ताल की, जो दूसरे दिन समाप्त हो गई।
पुलिस पर राजनीतिक दवाब:
धरना स्थल पर कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बताया। टीएस सिंहदेव ने सवाल उठाते हुए कहा कि आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है तो हथियार की बरामदगी कहां है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी माहौल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को परेशान करने के लिए यह कार्रवाई की गई। कांग्रेस नेताओं ने आंदोलन स्थगित करने का फैसला लिया। इसके बाद भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव एक साथ रवाना हुए। दोनों नेताओं की साथ मौजूदगी को कांग्रेस संगठन के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में पार्टी के भीतर बयानबाजी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज थीं।
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