उमंग सिंघार बोले UCC पर बीजेपी की जल्दबाजी, बैज ने कहा आदिवासियों के हक पर डाका
यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता को लेकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में संग्राम छिड़ गया है। आदिवासी कांग्रेस नेता इसकी मुखालफत पर उतर आए हैं। इन दोनों राज्यों में यूसीसी लागू करने की तैयारी चल रही है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे बीजेपी की जल्दबाजी करार दिया है। वहीं छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे आदिवासियों के हक पर डाका डालना बताया है।
मध्य प्रदेश में यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश किया गया है। कैबिनेट ने यूसीसी पर मुहर लगा दी है वहीं छत्तीसगढ़ में इसके लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है।
बीजेपी का दोहरा मापदंड :
सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 सदन में प्रस्तुत किया। इस पर उमंग सिंघार ने बीजेपी सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि बीजेपी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए UCC लागू करने की जल्दबाज़ी में है। लेकिन जब ओबीसी समाज, पिछड़े वर्गों और उनके अधिकारों की बात आती है, तो सरकार पूरी तरह खामोश हो जाती है।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल किया कि आखिर बीजेपी ओबीसी समाज और पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर चर्चा करने से क्यों कतरा रही है। प्रदेश की जनता इस दोहरे रवैये का जवाब चाहती है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह विधानसभा के भीतर और बाहर जनहित, सामाजिक न्याय और जवाबदेही के हर मुद्दे पर मजबूती से आवाज़ उठाती रहेगी और सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनना होगा।
आदिवासियों के खिलाफ यूसीसी :
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि अगर प्रदेश में यूसीसी लागू होता तो सबसे बड़ा नुकसान छत्तीसगढ़ के आदिवासियों को होगा। यूसीसी छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के खिलाफ है। राज्य में केवल आदिवासी ही ऐसे है जिन्हें प्रदेश में निवासरत अन्य लोगों की अपेक्षा विशेष संवैधानिक संरक्षण मिला हुआ है।
इसके अलावा कोई भी वर्ग छत्तीसगढ़ में नहीं है जिसके लिए विशेष नागरिक प्रावधान लागू है। छत्तीसगढ़ में 32 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासियों की है। संरक्षित जनजातियां है जिन्हें संविधान में कुछ विशेष अधिकार मिले है। उनकी रक्षा के लिए पेसा कानून लागू है और पांचवी अनुसूची लागू है और बीजेपी यूसीसी लाकर आदिवासियों के हितों में डकैती डालने की कोशिश में है।
आदिवासियों की जमीन पर उद्योगपतियों की नजर :
दीपक बैज ने कहा कि जब से बस्तर में नक्सलवाद खत्म होने की घोषणा हुई है उसके बाद से ही बीजेपी के समर्थित उद्योगपति बस्तर में आदिवासियों की जमीन पर नजरें गड़ाये हुए है। बस्तर में बीजेपी के समर्थित उद्योगपतियों की नजर लग चुकी है और वह आदिवासियों की जमीन हड़पना चाहते हैं।
यूसीसी लाने की कवायद इसीलिए है। राज्य के आदिवासियों के हितों को दरकिनार करके उद्योगपतियों के हितों को बढ़ावा देने की कोशिश है। आदिवासियों की जमीनें दूसरा कोई ले नहीं सकता, इसलिए तमाम तरीके के रास्ते खोजने की शुरूआत की जा रही है।
सरकार से सवाल :
क्या यूसीसी लागू होने के बाद प्रदेश में पेसा कानून का अस्तित्व यथावत रहेगा।
पांचवी अनुसूची की पंचायतों के अधिकारों में कोई छोड़छाड़ नहीं होगी।
राज्य की संरक्षित जनजातियां बैगा, कमार, पहाड़ी, कोरवा, बिरहोर, अबुझमाड़िया, भुंजिया, पांडा को संविधान में विशेष संरक्षण मिला है क्या यूसीसी लागू होने पर इनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
आदिवासियों की जमीनों पर उनके सामुदायिक अधिकारों का हनन नहीं किया जाएगा।
FAQ
- UCC क्या है?
UCC (Uniform Civil Code) एक ऐसा कानून है, जिसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करना है। - कांग्रेस ने UCC पर क्या आपत्ति जताई है?
कांग्रेस का कहना है कि UCC लागू होने से आदिवासी समुदाय के विशेष संवैधानिक अधिकार, पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के प्रावधान प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि सरकार की ओर से इन आशंकाओं पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
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