AI, ड्रोन और आदिवासी ट्रैकर्स से बाघ बचाने की नई जंग

Rajesh Lahoti | Jun 22, 2026, 16:01 IST
AI ड्रोन और आदिवासी ट्रैकर्स से बाघ बचाने की नई जंग
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में घटते बाघों को बचाने के लिए AI, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। जंगल की निगरानी और अतिक्रमण रोकने के लिए आधुनिक सिस्टम लगाए गए हैं। इससे वन्यजीव संरक्षण में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

Raipur। कभी 18 बाघों की दहाड़ से गूंजने वाला छत्तीसगढ़ का उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व आज बाघों के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन अब इस संघर्ष में जंगल के साथ खड़ी है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)। वन विभाग का दावा है कि AI आधारित निगरानी, ड्रोन सर्विलांस, सैटेलाइट मैपिंग और स्थानीय आदिवासी ट्रैकर्स की मदद से रिजर्व में वन्यजीवों की वापसी के संकेत मिलने लगे हैं।



उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 1998 में यहां 18 बाघ थे, लेकिन लगातार शिकार, अतिक्रमण और आवासीय दबाव के कारण उनकी संख्या घटती गई। 2023 तक स्थिति यह हो गई कि रिजर्व में कोई स्थायी बाघ नहीं बचा। राज्य पशु जंगली भैंसा भी लगभग विलुप्ति की कगार पर पहुंच गया।



AI से जंगल की निगरानी

वन विभाग ने 2022 से गूगल अर्थ इंजिन और अन्य AI आधारित तकनीकों का उपयोग शुरू किया। सेटेलाइट तस्वीरों की मदद से जंगल में पेड़ों की कटाई, वन क्षेत्र में कमी, जल स्रोतों के सूखने और अतिक्रमण वाले क्षेत्रों की पहचान की गई। इसके बाद ड्रोन सर्वे और जमीनी जांच के जरिए कार्रवाई शुरू हुई। पिछले तीन वर्षों में करीब 850 हेक्टेयर अतिक्रमण हटाया गया और कई जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया गया।



घुसपैठ और वन्यजीवों की सूचना

रिजर्व में AI आधारित इन्फ्रारेड नाइट विजन कैमरे लगाए गए हैं जो हाथी, तेंदुआ, भालू और संदिग्ध घुसपैठियों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। यह सिस्टम वनकर्मियों और ग्रामीणों को अलर्ट भेज सकता है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने में मदद मिल रही है।



इस तकनीक के लिए उदंती-सीतानदी को राज्य स्तर पर सम्मान भी मिल चुका है। तकनीक के साथ-साथ वन विभाग ने स्थानीय आदिवासी समुदायों को भी संरक्षण अभियान से जोड़ा है। भुंजिया और कमार जनजाति के युवाओं को हॉर्नबिल ट्रैकर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। ये प्रतिदिन जंगल में पैदल गश्त कर दुर्लभ पक्षियों और वन्यजीवों की निगरानी करते हैं तथा शिकार रोकने में मदद करते हैं।



दुर्लभ प्रजातियों की वापसी

इन प्रयासों का असर अब दिखाई देने लगा है। मालाबार पाइड हॉर्नबिल, इंडियन फ्लाइंग स्क्विरल और मालाबार जायंट स्क्विरल जैसी दुर्लभ प्रजातियों की संख्या और क्षेत्रफल दोनों बढ़े हैं। वन विभाग ने इनके लिए विशेष हॉर्नबिल रेस्टोरेंट भी विकसित किए हैं, जहां फलदार पेड़ लगाए जा रहे हैं ताकि पक्षियों को प्राकृतिक भोजन मिल सके।



रहस्यमयी बाघिन ने जगाई उम्मीद

इस साल जनवरी में एक चार वर्षीय बाघिन उदंती-सीतानदी पहुंची और भीषण गर्मी के बावजूद रिजर्व नहीं छोड़ा। वन विभाग ने उसका नाम पहेली रखा है क्योंकि उसका रिकॉर्ड किसी ज्ञात टाइगर डेटाबेस में नहीं मिला। अधिकारियों का मानना है कि बाघिन का यहां टिके रहना इस बात का संकेत है कि रिजर्व का आवास फिर से बाघों के रहने लायक बन रहा है। हालांकि तस्वीर पूरी तरह उजली नहीं है।



हाल ही में रिजर्व के आसपास हजारों पेड़ों की कटाई और अतिक्रमण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। वन विभाग और ग्रामीणों के बीच टकराव भी हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीक से जंगल नहीं बचेंगे, इसके लिए स्थानीय समुदायों का विश्वास जीतना और अवैध गतिविधियों पर लगातार नियंत्रण जरूरी होगा।



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संरक्षण की रणनीति

उदंती-सीतानदी में AI अब केवल कंप्यूटर की तकनीक नहीं, बल्कि संरक्षण की रणनीति बन चुका है। कैमरे, ड्रोन, सैटेलाइट और आदिवासी ट्रैकर्स मिलकर जंगल की नई सुरक्षा दीवार खड़ी कर रहे हैं, लेकिन क्या यह प्रयास उस रिजर्व में फिर से बाघों की स्थायी आबादी लौटा पाएंगे, जहां कभी 18 बाघों का राज था? आने वाले कुछ वर्ष इस सवाल का जवाब देंगे।



IMP FACTS

1998 में रिजर्व में लगभग 18 बाघ मौजूद थे



2023 तक यहां कोई स्थायी बाघ नहीं बचा



राज्य पशु जंगली भैंसा भी लगभग विलुप्ति की कगार पर पहुंचा



2022 से AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया



गूगल अर्थ इंजन और सैटेलाइट इमेज से वन क्षेत्र की निगरानी शुरू हुई



पिछले 3 वर्षों में करीब 850 हेक्टेयर अतिक्रमण हटाया गया



रिजर्व में ड्रोन सर्वे और इन्फ्रारेड कैमरे लगाए गए



भुंजिया और कमार जनजाति के युवाओं को हॉर्नबिल ट्रैकर के रूप में प्रशिक्षित किया गया



मालाबार पाइड हॉर्नबिल, फ्लाइंग स्क्विरल जैसी दुर्लभ प्रजातियों की वापसी दर्ज



इस साल एक अनजान बाघिन पहेली की मौजूदगी दर्ज की गई



रिजर्व में मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए अलर्ट सिस्टम सक्रिय



हाल में पेड़ कटाई और अतिक्रमण को लेकर विवाद भी सामने आया



FAQ

  1. उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में पहले कितने बाघ थे?
    1998 में इस रिजर्व में करीब 18 बाघ पाए जाते थे, लेकिन शिकार और अतिक्रमण के कारण संख्या लगातार घटती गई।
  2. इस रिजर्व में AI तकनीक का क्या उपयोग हो रहा है?
    वन विभाग AI, ड्रोन सर्विलांस, सैटेलाइट मैपिंग और इन्फ्रारेड कैमरों के जरिए जंगल की निगरानी कर रहा है और अतिक्रमण व वन्यजीव गतिविधियों पर नजर रख रहा है।
  3. क्या यहां फिर से बाघ लौट रहे हैं?
    हाल ही में एक अज्ञात बाघिन पहेली की मौजूदगी दर्ज हुई है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि रिजर्व का आवास फिर से बाघों के लिए अनुकूल बन रहा है।

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