छत्तीसगढ़ में शहरी विकास को लगा ब्रेक, फाइलों में कैद हुए बड़े प्रोजेक्ट्स

Aishwarya Dwivedi | Jun 07, 2026, 10:03 IST
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प्रदेश के नगर निकायों को विकास कार्यों के लिए 834 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, लेकिन लेत-लतीफी के कारण अधिकांश बड़े प्रोजेक्ट्स अब भी प्रशासनिक फाइलों और शुरुआती प्रक्रियाओं में ही अटके हुए हैं।

NEWS IN SHORT

  • प्रदेश के नगर निकायों को मिले 834 करोड़ से अधिक रुपए।
  • बजट मिलने के बावजूद जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की गति सुस्त।
  • मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत 26 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी।
  • रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों के प्रोजेक्ट्स फाइलों में अटके।
  • नोडल अफसरों को जल्द दौरा कर रिपोर्ट सौंपने के कड़े निर्देश।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों की तस्वीर बदलने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के इरादे से शुरू की गई बड़ी योजनाएं फिलहाल प्रशासनिक लालफीताशाही और फाइलों के फेर में फंसी नजर आ रही हैं। राज्य के नगर निकायों को पिछले कुछ महीनों में दो महत्वपूर्ण योजनाओं के तहत 834 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि आवंटित की जा चुकी है। इस राशि में मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के 429.45 करोड़ रुपए और 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत 404.66 करोड़ रुपए शामिल हैं। हालांकि, इतना बड़ा बजट मिलने के बावजूद जमीनी स्तर पर अधिकांश निकायों में निर्माण कार्यों की गति बेहद सुस्त बनी हुई है।



योजना का उद्देश्य और मौजूदा स्थिति

मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के अंतर्गत प्रदेश के 13 नगर निगमों में कुल 26 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य शहरों को एक नई पहचान देना, यातायात व्यवस्था को सुधारना, जलापूर्ति सुदृढ़ करना, स्वच्छता बढ़ाना और शहरी अधोसंरचना को मजबूती प्रदान करना है।



परंतु, धरातल पर वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अब तक टेंडर प्रक्रिया, डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने या शुरुआती प्रशासनिक कागजी कार्रवाई से आगे नहीं बढ़ पाई हैं। प्रदेश की राजधानी रायपुर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है,



जहाँ 91.27 करोड़ रुपए के चार बड़े प्रोजेक्ट्स स्वीकृत हुए हैं, लेकिन इनमें से महादेव घाट पुनरुद्धार, 18 रोड जंक्शनों का विकास और गौरवपथ-2 जैसे अहम कार्यों में कोई ठोस प्रगति देखने को नहीं मिली है। तेलीबांधा में प्रस्तावित टेक्निकल टॉवर परियोजना ही इकलौती ऐसी योजना है जहाँ टेंडर और शुरुआती प्रक्रियाएं थोड़ी आगे बढ़ी हैं।



प्रमुख नगर निगमों में स्वीकृत बजट और कार्यों का विवरण

प्रदेश के विभिन्न नगर निगमों में विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:



रायपुर (91.27 करोड़): महादेव घाट पुनरुद्धार, टेक्निकल टॉवर, जलापूर्ति सुदृढ़ीकरण, और 18 रोड जंक्शनों का विकास।



रायगढ़ (64.66 करोड़): मरीन ड्राइव विस्तार, ऑक्सीजन-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, और अंतरराज्यीय बस टर्मिनल।



बिलासपुर (57.92 करोड़): अटल पथ, सड़क चौड़ीकरण, तालाब सौंदर्यीकरण, सीसी रोड और स्ट्रीट लाइट कार्य (यहाँ अधिकांश कार्यों की प्रगति केवल 15 से 50 प्रतिशत के बीच है)।



कोरबा (36.55 करोड़): गौरव पथ का निर्माण।



भिलाई-चरौदा (29.43 करोड़) : केनाल रोड निर्माण कार्य।



धमतरी (24.64 करोड़): हाईटेक बस स्टैंड और ऑडिटोरियम का निर्माण (यहाँ बस स्टैंड का काम शुरुआती चरण में है)।



बीरगांव (24.75 करोड़) व भिलाई (24.30 करोड़): उरला नाला, प्रमुख सड़कें और विभिन्न अधोसंरचना विकास।



जगदलपुर (19.95 करोड़) व रिसाली (17.33 करोड़): दलपत सागर विकास, बाईपास और प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण।



चिरमिरी (14.84 करोड़) व अंबिकापुर (13.99 करोड़): मां महामाया कॉरिडोर, पार्क विकास, बाईपास और सौंदर्यीकरण कार्य।



दुर्ग (9.84 करोड़): फोरलेन सड़क का निर्माण।



प्रशासनिक समीक्षा और कड़े निर्देश

परियोजनाओं में हो रही इस लेत-लतीफी को देखते हुए शासन ने सख्त रुख अपनाया है। स्थिति की निगरानी और कार्यों में तेजी लाने के लिए जिलों में नोडल अफसरों की नियुक्ति की गई है। हाल ही में नोडल अफसरों ने विभिन्न निकायों का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया।



नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रायपुर सहित अन्य जिलों के नगरीय निकायों के अफसरों की बैठक लेकर कार्यों की समीक्षा की गई है। बाकी निगमों में भी अधिकारियों को जल्द से जल्द दौरा कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और उसे शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अटके हुए प्रोजेक्ट्स को गति दी जा सके।



निष्कर्ष

नगरीय निकायों को 834 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट मिलने के बाद भी जमीनी स्तर पर काम न होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। यदि नोडल अधिकारियों की समीक्षा के बाद भी टेंडर और डीपीआर जैसी शुरुआती प्रक्रियाओं में तेजी नहीं लाई गई, तो शहरों के विकास की यह योजना सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।



FAQ

  1. मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत छत्तीसगढ़ के कितने नगर निगमों में बड़े प्रोजेक्ट्स स्वीकृत किए गए हैं?
    उत्तर: इस योजना के तहत प्रदेश के कुल 13 नगर निगमों में 26 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है।
  2. छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों को दो बड़ी योजनाओं के तहत कुल कितनी राशि आवंटित की गई है?
    उत्तर: कुल 834 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई है (जिसमें मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के 429.45 करोड़ और 15वें वित्त आयोग के 404.66 करोड़ रुपये शामिल हैं)।
  3. प्रदेश की राजधानी रायपुर के लिए कितनी राशि के प्रोजेक्ट्स मंजूर किए गए हैं और उनमें कौन से प्रमुख कार्य शामिल हैं?
    उत्तर: रायपुर के लिए 91.27 करोड़ रुपये के चार प्रमुख प्रोजेक्ट्स मंजूर हुए हैं। इनमें महादेव घाट पुनरुद्धार, टेक्निकल टॉवर (तेलीबांधा), जलापूर्ति सुदृढ़ीकरण और 18 रोड जंक्शनों का विकास शामिल है।

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