वेदांता प्लांट हादसा; घायलों की लिस्ट गायब, अस्पतालों के चक्कर काटकर थक गए बेबस परिजन

Aishwarya Dwivedi | Apr 16, 2026, 16:54 IST
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रायगढ़ में वेदांता प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने 20 लोगों की जान ले ली। परिजनों ने मर्चुरी में शवों की पहचान के लिए कई अस्पतालों का चक्कर लगाया। प्रशासन की लापरवाही ने दर्द को और बढ़ा दिया। कई घायल अभी भी नाजुक स्थिति में हैं।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में मंगलवार को हुए वेदांता प्लांट हादसा ने कई घरों के चिरागों को बुझा दिया। यह त्रासदी केवल वेदांता प्लांट तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने रायगढ़ के अस्पतालों में भी अपनों को खोने के दर्द को बढ़ा दिया। मर्चुरी में शवों के बीच, परिजनों का विलाप, कातर आवाजें और बेबसी की झलकियों ने इस घटना को और भी घना बना दिया।



परिवारों की खोज में छटपटाहट

परिजनों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण घायलों और मृतकों की सूची समय पर सार्वजनिक नहीं की गई। डभरा निवासी विमल पटेल ने बताया कि अगर प्रशासन सूची जारी करता तो उनके जैसे परिवारों को मर्चुरी के चक्कर नहीं काटने पड़ते। वहीं झारखंड के दीपक कुमार ने बताया कि उन्हें अपने साले पप्पू कुमार की मौत का समाचार देर से मिला। दीपक ने रातभर अस्पतालों का चक्कर लगाया और अंत में मेडिकल कॉलेज में सुबह शव पाया।



सोशल मीडिया पर मिली जानकारी

सोशल मीडिया पर मिल रही जानकारी से इस हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। बुधवार दोपहर तक इस हादसे में 20 लोगों की मौत हो चुकी थी, जिनमें से 18 रायगढ़ में हुईं। निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी के कारण कई मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।



पिता-पुत्र की एक दुखद कहानी

इस हादसे में अपने पिता को खोने वाले कीर्तन कुमार यादव का दिल तोड़ने वाली कहानी सामने आई। कीर्तन और उनके पिता उद्धव सिंह यादव दोनों प्लांट में साथ काम करते थे। मंगलवार को कीर्तन की तबीयत खराब हो गई थी, इसलिए वह घर पर रह गए। लेकिन उनके पिता काम पर गए और हादसे में अपनी जान गवां बैठे। पोस्टमार्टम के बाद कीर्तन अपने पिता के शव को घर लेकर जा रहे थे।



भाई की तलाश में भटकता सनी कुमार

जांजगीर चांपा जिले के हरदी विशाल गांव के सनी कुमार ने अपने भाई की तलाश में कई अस्पतालों का दौरा किया। उनका भाई रामेश्वर महिलांगे बॉयलर ऑपरेटर थे और हादसे का शिकार हो गए। सनी ने बुधवार सुबह तक कई अस्पतालों में अपनी तलाश जारी रखी, लेकिन उन्हें कहीं भी अपने भाई का नाम नहीं मिला।



निष्कर्ष

इस हादसे ने न केवल रायगढ़ बल्कि पूरे राज्य को झकझोर दिया है। प्रशासन की लापरवाही और मृतकों और घायलों की पहचान में हो रही देरी से परिवारों को और अधिक दर्द सहना पड़ा है। इस घटना ने कई परिवारों को अपनों से जुदा कर दिया और उनके दिलों में शोक का गहरा असर छोड़ दिया।



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