नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 2005 के बाद पहली बार आई बारात, बिना नक्सली परमिशन के शुरू हुए मंगल कार्य

Aishwarya Dwivedi | Apr 12, 2026, 16:41 IST
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बस्तर में नक्सलवाद की दहशत का असर अब खत्म हो चुका है। लोग फिर से अपने रिश्तों को जोड़ने लगे हैं। अब इलाके में शादी-ब्याह की बारातें लौटने लगी हैं और लोग पहले की तरह खुशियाँ मनाने में सक्षम हो पाए हैं।

छत्तीसगढ़ के बस्तर के जगरगुंडा इलाके में कई सालों बाद एक बार फिर से रिश्तों का सिलसिला शुरू हो गया है। एक समय था जब यहां कोई अपनी लड़की का ब्याह करने को तैयार नहीं होता था, क्योंकि नक्सलियों की दहशत के कारण शादी करना जोखिम भरा था। सालों से इस इलाके में कोई भी बारात नहीं आई थी।



नक्सलियों से मंजूरी का था रिवाज

पहले, अगर किसी को शादी करनी होती थी, तो उन्हें नक्सलियों से मंजूरी लेनी पड़ती थी। नक्सलियों को यह बताना पड़ता था कि फलां इलाके में रिश्ता जोड़ा जा सकता है या नहीं! इसके बाद, शादी के समय कितने बाराती आएंगे, कब तक कार्यक्रम होगा और बाराती कब तक गांव लौटेंगे, इन सबकी जानकारी भी देना जरूरी था। ऐसी शादियों में सरकारी कर्मचारियों की मौजूदगी तक की बात नहीं की जाती थी।



शादी और दुख के कार्यक्रमों पर था नक्सलियों का डर

नक्सलियों के आतंक का असर सिर्फ शादी-ब्याह तक ही सीमित नहीं था, बल्कि लोगों के दुख के मौके, जैसे किसी की मृत्यु या बीमारी के समय भी जगरगुंडा और आसपास के इलाकों में जाना डरावना होता था। क्षेत्र में हल्बा, आदिवासी समाज के अलावा अन्य समाज के लोग भी रहते थे, जो शादी के लिए न पंडितों से मुहूर्त निकलवा सकते थे और न ही दुख के कार्यक्रम में बिना भय पूरे विधि-विधान से अनुष्ठान करवा सकते थे।



बस्तर नक्सलमुक्त, लोग लौटने लगे अपने घर

अब जब बस्तर नक्सलमुक्त हो चुका है, तो लोग अपने गांवों और घरों की ओर लौटने लगे हैं। इसका असर अब नजर आ रहा है, और इलाके में एक बार फिर से शादियों का सिलसिला शुरू हो गया है।



कामाराम गांव में 2005 के बाद पहली बार आई बारात

जगरगुंडा से लगभग 10 किलोमीटर दूर कामाराम गांव में दंतेवाड़ा के गोंगपाल गांव से बारात आई थी। यह 2005 के बाद पहला मौका था जब इलाके में कोई बारात गाड़ियों के साथ धूमधाम से पहुंची थी। गोंगपाल का वर और वधु कामाराम गांव के थे। वर पक्ष के प्रेम नाग ने बताया, "हमारे नाते-रिश्तेदार जगरगुंडा क्षेत्र में रहते हैं।"



निष्कर्ष

बस्तर के नक्सलमुक्त होने के बाद, इलाके में रिश्ते जुड़ने और लोगों की वापसी का सिलसिला एक नई उम्मीद जगा रहा है। यह क्षेत्र अब फिर से खुशियों से भरने लगा है, और यह एक बदलाव का संकेत है जो नक्सलवाद की दहशत से मुक्ति के बाद आ रहा है।



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