छत्तीसगढ़ की चिट्ठी : सदन में राम मंदिर पर संग्राम, बाहर घोटालों पर बवाल

Rajesh Lahoti | Jul 18, 2026, 18:52 IST
छत्तीसगढ़ की चिट्ठी 2026
छत्तीसगढ़ में इस सप्ताह राजनीति और प्रशासन कई बड़े घटनाक्रमों के कारण चर्चा में रहे। विधानसभा के मानसून सत्र में राम मंदिर चंदा विवाद और वेदांता मुद्दे पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने रहे।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी और वेदांता मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहे, जिससे सदन में जमकर हंगामा हुआ। वहीं सीएजी रिपोर्ट ने जल जीवन मिशन पर सवाल खड़े करते हुए 11 हजार करोड़ रुपए खर्च के बावजूद योजनाओं की धीमी प्रगति और हर घर जल के दावों की जमीनी हकीकत उजागर की। महिला आयोग की अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर किरणमयी नायक और ममता साहू के बीच घमासान पुरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय रहा, जबकि महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले में ईडी की पूछताछ टीवी एंकर शेफाली बग्गा तक पहुंच गई है। दूसरी ओर सरकार ने 42 साल पुराने भूमि विकास नियमों में बदलाव कर निर्माण और नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को नए नियमों के दायरे में ला दिया है। इसी बीच 540 करोड़ रुपए के कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामले में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी और ईओडब्ल्यू रिमांड के बाद अगली कार्रवाई पर सभी की नजर है।



राम के नाम पर सियासत, सदन में शोर ही शोर

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन विकास, महंगाई या योजनाओं से कम और भगवान राम के नाम पर ज्यादा गूंजता रहा। विपक्ष अयोध्या के राम मंदिर में कथित चंदा और चढ़ावा गड़बड़ी पर चर्चा चाहता था, लेकिन सत्ता पक्ष ने नियम-कायदे का हवाला देकर खुद को बचाने की कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि राम मंदिर के चंदे की लूट पर बात होनी चाहिए, तो भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने कांग्रेस के राम प्रेम पर ही सवाल खड़े कर दिए। भूपेश बघेल ने भी आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के श्रद्धालुओं के चंदे में डकैती हुई। बस फिर क्या था, सदन में जय श्रीराम से ज्यादा गूंज नारेबाजी की सुनाई दी। अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव खारिज कर दिया और चर्चा की जगह हंगामे ने ले ली। विधानसभा का पहला दिन यह संदेश देकर खत्म हुआ कि राम अब भी भारतीय राजनीति के सबसे बड़े चुनावी और संसदीय किरदार हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई उन्हें आस्था से जोड़ता है, तो कोई आरोपों से।



वेदांता पर वार, निशाने पर अनिल अग्रवाल

वहीं विधानसभा में वेदांता का मुद्दा उठा तो विपक्ष ने सीधे उद्योगपति अनिल अग्रवाल को कठघरे में खड़ा कर दिया। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने सवाल दागा कि एफआईआर में नाम होने के बावजूद आखिर कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ रही? क्या कोई अदृश्य लेन-देन चल रहा है? भूपेश बघेल ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या बड़े उद्योगपतियों के लिए कानून का पैमाना अलग है। सरकार की ओर से उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने वही जवाब दिया जो ऐसे मौकों पर अक्सर सुनाई देता है। जांच जारी है, दोषी बचेंगे नहीं। विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। सदन में आरोप, प्रत्यारोप और शोर का स्तर इतना बढ़ा कि मूल सवाल कहीं पीछे छूट गया। विधानसभा में यह बहस सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना की नहीं रही, बल्कि सत्ता और उद्योग जगत के रिश्तों पर उठते सवालों की भी बन गई।



हर घर जल… लेकिन कागजों में ज्यादा

सीएजी की रिपोर्ट ने जल जीवन मिशन की चमकदार तस्वीर पर पानी फेर दिया। 11 हजार करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद छत्तीसगढ़ देश में 23वें स्थान पर है। 29 हजार से ज्यादा योजनाएं मंजूर हुईं, लेकिन पूरी सिर्फ 172 ही हुई है। हर घर जल का सपना भी कागजों पर ज्यादा और जमीन पर कम दिखाई दिया। 19 हजार से ज्यादा गांवों में लक्ष्य था, लेकिन प्रमाणित हुए केवल 716 गांव ही। यानी नल से ज्यादा तेजी से प्रमाणपत्र बहते रहे। रिपोर्ट में योजना निर्माण से लेकर फंडिंग, जल गुणवत्ता और सोलर सिस्टम तक कई खामियां गिनाई गईं। सरकार की उपलब्धियों के दावों के बीच सीएजी ने याद दिलाया कि पाइप बिछा देना और रोज पानी पहुंचाना दो अलग बातें हैं। सिस्टम में मौजूद हर आदमी जल जीवन मिशन का करोडों रुपए डकार चुका है। जनता को नल से पानी मिलेगा या नहीं, ये पता नहीं, लेकिन सरकारी रिपोर्ट के मनगढंत आंकड़े जरुर मिलेंगे।



महिला आयोग की कुर्सी

महिला आयोग के अध्यक्ष की कुर्सी इन दिनों सत्ता और कानून के बीच रस्साकशी का मंच बन गई है। सरकार ने आदेश जारी कर साफ कर दिया कि डॉ. किरणमयी नायक का तीन साल का कार्यकाल खत्म हो चुका है, लेकिन किरणमयी नायक का कहना है कि मामला हाईकोर्ट में लंबित है और स्टे प्रभावी होने के कारण वे अब भी खुद को वैध अध्यक्ष मानती हैं। दूसरी ओर नई अध्यक्ष ममता साहू सरकार के आदेश के आधार पर पदभार संभाल चुकी हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने कानूनी तर्कों के साथ मैदान में हैं। एक ओर अवमानना याचिका की चेतावनी है, तो दूसरी ओर कोर्ट जाना है तो जाइए वाला जवाब। यानी आयोग की कुर्सी पर फिलहाल दो दावे हैं। फिलहाल महिला आयोग से ज्यादा चर्चा उसकी अध्यक्ष की कुर्सी की हो रही है।



महादेव की जांच में नया चेहरा

महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप की जांच अब मनोरंजन जगत के चेहरों तक पहुंच चुकी है। इस बार ईडी ने टीवी एंकर और बिग बॉस की पूर्व प्रतिभागी शेफाली बग्गा से रायपुर में लंबी पूछताछ की। एजेंसी यह जानना चाहती है कि क्या उन्होंने किसी ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के प्रचार से आर्थिक लाभ लिया था। जांच में कुछ डिजिटल साक्ष्य और सोशल मीडिया गतिविधियों का भी हवाला दिया जा रहा है। हालांकि शेफाली ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया है। फिलहाल वे आरोपी नहीं हैं, बल्कि जांच का हिस्सा हैं। महादेव केस की यही खासियत है कि इसकी फाइलें कभी कारोबारी तक पहुंचती हैं, कभी नेताओं तक और अब मनोरंजन जगत भी इसकी जद में दिखाई दे रहा है। लगता है इस कहानी के नए किरदार अभी और सामने आने बाकी हैं।



अब नक्शा भी नियम से चलेगा

छत्तीसगढ़ में अब घर बनाना पहले जितना आसान नहीं रहेगा। सरकार ने 42 साल पुराने भूमि विकास नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है। अब कौन-सी जमीन पर क्या बनेगा, कितनी ऊंची इमारत होगी और कितनी खुली जगह छोड़नी होगी, सब पहले से तय रहेगा। नई नेगेटिव लिस्ट यह भी बताएगी कि किस इलाके में कौन-सा निर्माण बिल्कुल नहीं हो सकता। सरकार इसे व्यवस्थित शहरी विकास की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। आम लोगों और बिल्डरों के लिए इसका मतलब है कि अब नक्शा पास कराने से पहले नियमों की मोटी किताब पढ़नी पड़ेगी। मनमर्जी से निर्माण का दौर खत्म करने की कोशिश तो शुरू हो गई है, अब देखना होगा कि नियम सिर्फ कागज पर सख्त रहते हैं या जमीन पर भी उतनी ही मजबूती से लागू होते हैं।



रिमांड में रामगोपाल, जांच का नया दौर

540 करोड़ के कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटाले की जांच में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद मामला नए चरण में पहुंच गया है। अब रामगोपाल से शराब घोटाले में भी पूछताछ की जाएगी। अदालत ने उन्हें 22 जुलाई तक ईओडब्ल्यू की रिमांड पर भेज दिया है। एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान पैसों के लेन-देन, बैंक खातों और कथित नेटवर्क की कई परतें खुल सकती हैं। बचाव पक्ष ने रिमांड का विरोध किया, लेकिन अदालत ने जांच एजेंसी की दलीलों को पर्याप्त माना। छत्तीसगढ़ की राजनीति में कोल घोटाला लंबे समय से सबसे चर्चित मामलों में रहा है और हर नई गिरफ्तारी के साथ राजनीतिक बहस भी तेज हो जाती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि रिमांड खत्म होने तक ईओडब्ल्यू के हाथ क्या नए तथ्य लगते हैं और क्या इस जांच की आंच आगे किसी और बड़े नाम तक पहुंचती है।



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