मल्टीनेशनल कंपनियों की नौकरी छोड़ साइबर ठगी का रास्ता चुन रहे युवा

Aishwarya Dwivedi | May 30, 2026, 10:52 IST
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छत्तीसगढ़ में बैंक मैनेजर, इंजीनियर और सीए जैसे प्रोफेशनल युवा नौकरी छोड़कर साइबर ठग बन रहे हैं। वे डिजिटल अरेस्ट और शेयर मार्केट के नाम पर दिग्गजों से करोड़ों की ठगी कर रहे हैं।

NEWS IN SHORT

  • शॉर्टकट में पैसा कमाने के लिए पढ़े-लिखे युवा बने साइबर अपराधी।
  • ठगों के निशाने पर विधायक, डॉक्टर और रिटायर्ड अधिकारी शामिल।
  • सीमित वेतन के लालच में प्रोफेशनल्स ने चुनी ठगी की राह।
  • पुलिस ने दो साल में 475 साइबर ठगों को किया गिरफ्तार।
  • जागरूकता, सतर्कता और युवाओं की काउंसिलिंग से ही थमेगा साइबर अपराध।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। राज्य में बिना मेहनत के शॉर्टकट से पैसा कमाने की होड़ में पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल युवा नौकरी छोड़कर ठगी के काले धंधे में उतर रहे हैं। पुलिस द्वारा पिछले दो वर्षों में की गई कार्रवाई में 475 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गिरोह में कोई नौसिखिए नहीं, बल्कि बैंक कर्मी, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), फार्मासिस्ट और शिक्षक जैसे उच्च शिक्षित लोग शामिल हैं।



सालभर की सैलरी एक झटके में, इसलिए छोड़ रहे नौकरी

साइबर एक्सपर्ट्स और पुलिस के अनुसार, इन प्रोफेशनल्स को अपनी नौकरी में सीमित वेतन मिलता था, जबकि साइबर फ्रॉड में कमाई की कोई सीमा नहीं है। एक झटके में सालभर की सैलरी से ज्यादा रकम मिलने के लालच में ये लोग अपने हुनर और तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं। ठगी की इस काली कमाई को बाद में शेयर मार्केट और प्रॉपर्टी में निवेश किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ की धरती पर बैठकर ये शातिर ठग न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि विदेशी नागरिकों तक को अपना निशाना बना रहे हैं।



विधायक और डॉक्टर्स भी निशाने पर

रिपोर्ट के मुताबिक, कम पढ़े-लिखे लोगों की तुलना में अब हाई-एजुकेटेड और समाज के रसूखदार लोग इन ठगों के आसान शिकार बन रहे हैं। बड़े उद्योगों के अधिकारी, रिटायर्ड अफसर, नेता और डॉक्टर्स कथित 'डिजिटल अरेस्ट' और 'शेयर मार्केट में निवेश' के नाम पर करोड़ों रुपए गंवा रहे हैं।



ठगी के शिकार हुए प्रमुख लोग और गंवाई गई रकम

डॉ. सुनील देवांगन (विशेषज्ञ डॉक्टर, रायपुर) : 2 करोड़ 92 लाख


सोनिया हंसपाल (रिटायर्ड जीएम, जायसवाल निको स्टील) : 2 करोड़ 83 लाख


एमवी लक्ष्मी राव (विधानसभा) : 2 करोड़


डॉ. सपन कुमार (रिटायर्ड वेटरनरी डॉक्टर) : 1 करोड़ 25 लाख


संतोष दबड़घाव (प्रोफेसर, शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज): 88 लाख


पुरंदर मिश्रा (विधायक, रायपुर उत्तर व वित्तीय सलाहकार): 10 हजार



पुलिस की बड़ी कार्रवाई

Major Police Action


छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ पिछले दो सालों में व्यापक अभियान चलाया है, जिसके आंकड़े इस प्रकार हैं:



गिरफ्तार आरोपी : 475 (जिसमें 3 नाइजीरियन और 8 फर्जी सिम विक्रेता शामिल)



बैंक अधिकारी गिरफ्तार : 31 (इंडियन ओवरसीज बैंक के ब्रांच मैनेजर और RBL के रिलेशनशिप मैनेजर आदि)



ब्लॉक किए गए सिम और मोबाइल: 14 हजार सिम कार्ड और 3 हजार मोबाइल बंद किए गए।



अकाउंट एक्शन : 1 हजार बैंक खाते ब्लॉक, 32 करोड़ की राशि खातों में होल्ड कराई गई और 7 करोड़ पीड़ितों को वापस दिलाए गए।



जागरूकता और काउंसिलिंग ही एकमात्र बचाव

मुकेश चौधरी (साइबर क्राइम एक्सपर्ट):



"डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया अस्तित्व में ही नहीं है, लोग सिर्फ डर के मारे पैसे दे देते हैं। इन अपराधियों को सजा या सामाजिक प्रतिष्ठा खोने का डर नहीं है। संदिग्ध कॉल या मैसेज आने पर तुरंत अपने परिवार से चर्चा करें और पुलिस से संपर्क करें।"



अमरेश मिश्रा (आईजी रेंज, साइबर):



"युवाओं के पास प्रोफेशनल डिग्रियां हैं, लेकिन वे अपने हुनर का विनाशकारी दुरुपयोग कर रहे हैं। आने वाले समय में साइबर क्राइम सबसे बड़ी चुनौती होगा। इस दलदल से युवाओं को बचाने के लिए माता-पिता और कंपनियों को सतर्क रहना होगा और युवाओं की उचित काउंसिलिंग बेहद जरूरी है।"



निष्कर्ष

बिना मेहनत के शॉर्टकट से अमीर बनने की चाह में उच्च शिक्षित प्रोफेशनल्स का साइबर ठगी की ओर झुकाव एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक चिंता है। सीमित वेतन के मुकाबले झटके में मिलने वाली मोटी रकम युवाओं को कानून और परिवार की परवाह किए बिना इस दलदल में धकेल रही है।



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