11 हजार 501 करोड़ की इंदौर मेट्रो अब सिर्फ 25 मिनट चलेगी, सवारी नहीं मिली तो सेवा सिमटी, सिस्टम पर उठे सवाल

Rahul Dave | Jan 10, 2026, 15:09 IST
11 thousand crore indore metro failed
इंदौर में ट्रैफिक की समस्या का हल मानी जाने वाली मेट्रो अब खुद मुश्किल में है। अब इंदौर मेट्रो का चलना सिर्फ 25 मिनट के लिए होगा। सवारी न मिलने की वजह से मेट्रो कॉर्पोरेशन ने सिर्फ एक फेरा लगाने का फैसला लिया है।

News In Short

  • इंदौर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने मेट्रो परियोजना को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है।
  • इंदौर मेट्रो अब दिन में सिर्फ एक फेरा लगाएगी।
  • सवारी नहीं मिलने के कारण संचालन को 25 मिनट तक सीमित किया गया।
  • 11 हजार 501 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजना पर गंभीर सवाल उठे।
  • गांधी नगर से दोपहर 3 बजे रवाना होगी इकलौती ट्रेन।

News In Detail

सिर्फ 25 मिनट चलेगी मेट्रो

मेट्रो, जिसे शहर की ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान बताया गया था, अब सवारी के अभाव में एक दिन में सिर्फ 25 मिनट तक ही चलाई जाएगी। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने रविवार से संचालन एक फेरे तक सीमित कर दिया है। 11 हजार 501 करोड़ रुपए की परियोजना का यह फैसला बताता है कि जमीनी जरूरत और योजना के बीच बड़ा अंतर है।



इंदौर मेट्रो का आम नागरिकों के लिए संचालन 31 मई 2025 को शुरू हुआ था। शुरुआत में उम्मीद जताई गई थी कि मेट्रो सुपर कॉरिडोर पर यात्रियों की बड़ी संख्या को आकर्षित करेगी, लेकिन आंकड़े इसके उलट निकले। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने अब निर्णय लिया है कि रविवार को मेट्रो सिर्फ एक राउंड लगाएगी।



indore metro


मेट्रो अब दिन में सिर्फ एक फेरा

गांधी नगर स्टेशन से दोपहर 3 बजे मेट्रो रवाना होगी और सुपर कॉरिडोर-03 स्टेशन से 3:25 बजे वापसी करेगी। इसके बाद आम यात्रियों के लिए सेवा बंद रहेगी। प्रबन्धन का कहना है कि शेष समय में गांधी नगर से मालवीय नगर तक ट्रायल रन और तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। फिलहाल मेट्रो केवल 5 स्टेशनों के बीच सीमित है, जिससे यात्रियों को न तो फुल कनेक्टिविटी मिल पा रही है और न ही समय की बचत।



एम डी एस. कृष्ण चैतन्य ने बताया कि हमारा काम अभी चल रहा है फिलहाल मेट्रो में सवारी के अभाव में रविवार से संचालन एक फेरे तक सीमित कर दिया है। हमारी कोशिश है जल्द ही सारे काम पूर्ण हो जिससे सारे स्टेशन पर मेट्रो चलाई जाए इसका फायदा सीधे यात्रियों को मिलेगा।



indore metro


सूत्र Knowledge

शहरों में मेट्रो तब ही सफल होती है जब पूरा रूट चालू हो, फीडर बस, पार्किंग और लास्ट माइल कनेक्टिविटी हो, और ऑफिस टाइम और भीड़ वाले रूट भी कवर किए जाएं। इंदौर मेट्रो में ये तीनों बातें अभी तक अधूरी हैं। बस ट्रैक बना लेना ही काफी नहीं है, यात्रियों तक पहुंचाना भी जरूरी है।



सूत्र Expert

अर्बन ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट बताते हैं कि आधा-अधूरा कॉरिडोर चलाने से मेट्रो की आदत लोगों में नहीं बनती। जब तक पूरी लाइन, इंटरचेंज और टाइमिंग भरोसेमंद नहीं होगी, यात्री निजी वाहन छोड़ने को तैयार नहीं होंगे।



indore metro


आगे क्या

अगले डेढ़ साल तक मेट्रो ट्रायल मोड में रहेगी। यात्रियों का भरोसा कमजोर हो सकता है। राजस्व घाटा बढ़ेगा सरकार पर सवाल उठेंगे कि पहले पूरा नेटवर्क क्यों नहीं बनाया गया। मार्च 2026 तक पूरा कॉरिडोर नहीं चला, तो यह परियोजना लो यूटिलाइजेशन का उदाहरण बन सकती है।



निष्कर्ष

इंदौर मेट्रो की समस्या ट्रैक की नहीं, प्लानिंग की है। जब 11,501 करोड़ की परियोजना 25 मिनट में सिमट जाए, तो सवाल सिर्फ सवारी का नहीं, सिस्टम का होता है।



ये खबरें भी पढ़िए...



इंदौर मेट्रो: बिना बीमा-बिना सुरक्षा, भगवान भरोसे हैं यात्री



Tags:
  • इंदौर न्यूज
  • Indore Metro
  • इंदौर मेट्रो
  • मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन
  • सुपर कॉरिडोर