एमपी के 1895 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं! CAG की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट सख्त

Sandeep Kumar | Jul 15, 2026, 17:33 IST
एमपी की 1895 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं
मध्य प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। यह खुलासा 2025 की कैग रिपोर्ट में हुआ। इंदौर के सौरभ त्रिपाठी ने इसी आधार पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश के 1,895 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं।
  • खुलासा 2025 की कैग रिपोर्ट में हुआ है।
  • इंदौर निवासी सौरभ त्रिपाठी ने याचिका लगाई।
  • हाईकोर्ट ने सरकार और शिक्षा विभाग को नोटिस दिया।
  • सरकार को नियुक्ति और बजट खर्च पर जवाब देना होगा।

स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं

मध्य प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। यह खुलासा 2025 की कैग (CAG – Comptroller and Auditor General) रिपोर्ट में हुआ। इंदौर के सौरभ त्रिपाठी ने इसी आधार पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया।



अब सरकार को शिक्षक नियुक्ति और बजट खर्च पर जवाब देना होगा। इंदौर के रहने वाले सौरभ त्रिपाठी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। याचिका का आधार साल 2025 की कैग रिपोर्ट है।



बजट भरपूर, फिर भी शिक्षक नहीं

याचिका में एक और गंभीर बात सामने आई है। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षा विभाग का बजट 7 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है। इतना बड़ा बजट होने के बावजूद हजारों स्कूल शिक्षकों से खाली पड़े हैं।



याचिकाकर्ता का कहना है कि यह सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही का मामला है। बजट खर्च कहां हुआ, यह सवाल अब कोर्ट के सामने है। सरकार को इसका पूरा हिसाब देना होगा।



हाईकोर्ट की बेंच ने क्या कहा

इस याचिका पर सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने की। बेंच ने प्रथम दृष्टया इस मामले को गंभीर माना।



अदालत ने राज्य सरकार के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने तीन बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा है। पहला, शिक्षक नियुक्ति की मौजूदा स्थिति क्या है। दूसरा, बजट का इस्तेमाल कहां हुआ। तीसरा, कैग रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर सरकार का पक्ष क्या है।



परीक्षा परिणामों पर सीधा असर

याचिका में सिर्फ शिक्षकों की कमी की बात नहीं है। इसमें परीक्षा परिणामों के आंकड़े भी दिए गए हैं। यह आंकड़े स्थिति की गंभीरता को साफ दिखाते हैं।



साल 2018-19 में हाईस्कूल का पास प्रतिशत 67.74% था। यह आंकड़ा 2021-22 में गिरकर 38.53% रह गया। यानी चार साल में पास प्रतिशत लगभग आधा हो गया।



याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह गिरावट अचानक नहीं हुई। शिक्षकों की लगातार कमी का सीधा असर परिणामों पर पड़ा है। स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।



अब सरकार को देना होगा जवाब

प्राथमिक सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अगले कदम तय कर दिए हैं। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को अब लिखित जवाब देना होगा।



सरकार को यह बताना होगा कि शिक्षकों की भर्ती के लिए क्या योजना है। बजट का सही इस्तेमाल कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।



इस मामले की अगली सुनवाई में सरकार का जवाब सामने आने की उम्मीद है। तब तक याचिकाकर्ता और आम जनता की नजर इस मामले पर टिकी रहेगी। यह मामला प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल बन गया है।



FAQ

  1. मध्य प्रदेश के कितने सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं?
    2025 की कैग रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। यह याचिका का मुख्य आधार है।
  2. हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है। सरकार को शिक्षक नियुक्ति और बजट खर्च पर जवाब देना होगा।

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