इंदौर के 3 कलेक्टर पहले दे चुके 158 विकास मंजूरी, हाईकोर्ट के आदेश से एक हुई तो विवाद क्यों

Sanjay Gupta | Jul 14, 2026, 15:42 IST
Photograph: (THESOOTR)
INDORE. इंदौर के तीन पूर्व कलेक्टर जिले के मास्टर प्लान दायरे में आए जिन 79 गांवों में 158 विकास मंजूरी दे चुके, उसमें अब एक मंजूरी विवाद बन रही है। हालांकि, मंजूरी हाईकोर्ट के आदेश से हुई है।

इंदौर में एक जनवरी 2022 को मास्टर प्लान का दायरा बढ़ाकर 79 गांवों तक फैलाया गया। इसके बाद इन गांवों में नई मंजूरियां बंद हो गई और धारा 16 के तहत कम से कम चार हैक्टेयर जमीन पर ही नई मंजूरी देने का काम शुरू हुआ।



बाद में इसमें भी विवाद हुए और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में ही बोल दिया कि अब धारा 16 में भी मंजूरी नहीं दे रहे हैं, लेकिन अब इंदौर कलेक्टोरेट कॉलोनी सेल से हुई एक मंजूरी पर विवाद हो रहा है, जो हाईकोर्ट के आदेश से हुई।



क्या है पूरा मामला

मामला सांवेर तहसील के मुरादपुरा एसआर रियलिटी के गुरुकृपा टाउनशिप से जुड़ा है। इसकी विकास मंजूरी की फीस एक करोड़ 36 लाख प्रशासन द्वारा ली गई। इसके बाद विकास मंजूरी देने से मना कर दिया।



मामला हाईकोर्ट इंदौर गया और वहां से 9 दिसंबर 2025 को आदेश हुए कि इसमें कानून के अनुसार फैसला लेते हुए 30 दिन में फैसला करें।



इसके बाद इसमें प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी और मप्र शासन से कलेक्टर ने दो बार पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा। इसी बाच अवमानना नोटिस आया। इसके बाद 19 जून को इसकी विकास मंजूरी जारी कर दी गई।



क्या उठ रहा है विवाद

इस मामले में अब यह शिकायत इंदौर से लेकर भोपाल तक उठाई गई है कि यह गलत हुआ है और धारा 16 पर रोक है और यह मंजूरी नहीं हो सकती है।



यह भी तर्क दिया गया कि इसमें तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने 30 अप्रैल 2024 को शासन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा था। इसके बाद से मंजूरी नहीं दी गई है। फिर यह मंजूरी क्यों दी गई है।



विवाद के पीछे के पूरे तथ्य

इस विवाद और शिकवा-शिकायतों के परे कई तथ्य है। पहली बात तो यह कि तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह के पत्र 30 अप्रैल 2024 के बाद यह सिंगल मंजूरी दी गई। वजह थी हाईकोर्ट का आदेश और फिर इसमें आया अवमानना नोटिस।



एक शिकायत यह है कि प्रशासन इसमें रिट अपील में क्यों नहीं गया तो द सूत्र को मिले दस्तावेजों के अनुसार प्रशासन द्वारा इसमें डिप्टी एजी से विधिक सलाह ली गई थी और इसमें हाईकोर्ट के आदेशानुसार ही आगे बढ़ने के लिए कहा गया। वहीं इस आदेश के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने 21 अप्रैल और फिर 30 अप्रैल को शासन को पत्र लिखा।



मामला धारा 16 का है ही नहीं

साथ ही अहम बात कि यह केस धारा 16 का नहीं है। यह मास्टर प्लान का दायरा 79 गांव तक आने से पहले टीएंडसीपी के अभिमत से जो मंजूरियां जारी हुई इसका मामला है।



दरअसल एक जनवरी 2022 के पहले जो भी टीएडंसीपी के अभिमत से मंजूरियां हुई उसे टीएंडसीपी ने जिला प्रशासन को लिखे अपने 5 जुलाई 2023 के आदेश में सही बताया है।



इसमें कहा है कि यहां विकास करने में कोई बाधा नहीं हैं क्योंकि यह नई विकास मंजूरी नहीं है और पूर्व अभिमत की मंजूरियां है। ना ही यह धारा 16 से जुड़ा हुआ मामला है। ऐसे में विकास में बाधा नहीं है। यानी सरल शब्दों में यहां विकास मंजूरी देने में समस्या नहीं है।



इसके पहले 158 मंजूरियां इनके कार्यकाल में जारी

वहीं टीएंडसीपी के पूर्व अभिमत के आधार पर इंदौर में साल 2022 में तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह के समय पर 78 मंजूरियां, तत्कालीन कलेक्टर इलैयाराजा के समय 70 से ज्यादा और फिर आशीष सिंह के समय 1 मंजूरी जारी हुई।



यानी तीन साल में कुल 158 मंजूरियां जारी हुई। यह सभी उन अभिमत के आधार पर थी जो टीएंडसीपी ने एक जनवरी 22 के पूर्व जारी की थी। इसमें नई मंजूरी कोई नहीं थी और ना ही धारा 16 का इसमें मुद्दा था।



स्थिति स्पष्ट करने के लिए मांगा मार्गदर्शन

इस मामले में तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने अप्रैल 2024 में और फिर वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने भी अप्रैल 2026 में ही दो बार लिखा है। इसमें साफ लिखा है कि इंदौर कालोनी सेल द्वारा साल 2022 से 2024 तक कुल 158 मंजूरियांं दी गई है। जो टीएंडसीपी द्वारा एक जनवरी 22 के पूर्व दिए गए अभिमत के आधार पर है।



इन मामलों में अनावश्यक विलंब नहीं हो और पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों में अलग-अलग कार्यालयों की जानकारी में भिन्नता नहीं हो इसलिए निर्देशों में और अधिक स्पष्टता लाने की आवश्यकता प्रतीत होती है। इस संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करने का अनुरोध है।



दस और याचिकाएं हुई दायर

वहीं इसी मामले में करीब 35 से 40 टाउनशिप और मंजूरियों का इंतजार कर रहे हैं जो टीएडंसपी के पूर्व अभिमत के आधार पर है। इसमें से करीब दस डेवलपर्स भी अब हाईकोर्ट चले गए हैं और विकास मंजूरी की मांग कर रहे हैं।



हालांकि, जिला प्रशासन ने साफ किया है कि अपने स्तर पर मंजूरी नहीं जाएगी, यदि कोर्ट से आदेश आता है तो फिर आगे विधिक रूप से आगे बढ़ा जाएगा।



कहीं कोई गलत नहीं हुआ है

इस संबंध में जिला प्रशासन और कॉलोनी सेल के अधिकारियों ने साफ किया कि कहीं कोई विवाद जैसी स्थिति नहीं है। हाईकोर्ट का आदेश और अवमानना नोटिस है।



टीएडंसीपी से पूर्व में ही पत्र प्राप्त है। विधिक सलाह ली हुई है। इस संबंध में शासन स्तर पर भी पत्र भेजे गए हैं और इंदौर से भोपाल तक सभी को विस्तृत जानकारी है।



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